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JPNIC को लेकर CM योगी का सपा पर हमला, बोले- ‘दंगों के बादशाह, कर्फ्यू इनकी पहचान’

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में करीब 101 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान राष्ट्र प्रेरणा स्थल के पास एक चौराहे पर स्वतंत्रता सेनानी वीरांगना अवंती बाई लोधी की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बिना नाम लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए। सीएम योगी ने सपा की पुरानी सरकारों के कार्यकाल और जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर भी सवाल उठाए।

‘दंगों के बादशाह हैं, कर्फ्यू इनकी पहचान’

मुख्यमंत्री योगी ने सपा पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पहचान दंगों और कर्फ्यू से जुड़ी रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के खजाने में लूट-खसोट करना और सरकारी जमीनों पर कब्जा करना सपा की राजनीति का हिस्सा रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोग एक बार फिर समाज को जाति और वर्ग के नाम पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने PDA के मुद्दे को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि समाज को बांटने की राजनीति करने वालों की मानसिकता को समझना जरूरी है।

कल्याण सिंह और JPNIC को लेकर अखिलेश पर निशाना

सीएम योगी ने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिक्र करते हुए सपा पर हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण सिंह के निधन के समय समाजवादी पार्टी के नेताओं ने श्रद्धांजलि देने की बात तो दूर, सोशल मीडिया पर भी संवेदना व्यक्त नहीं की।

इसके बाद उन्होंने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले जयप्रकाश नारायण के नाम पर लखनऊ में स्मारक परियोजना शुरू की गई थी।

योगी ने दावा किया कि करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई JPNIC परियोजना पर 864 करोड़ रुपये खर्च हो गए, इसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि परियोजना को 18 महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन निर्धारित समय के बाद भी यह अधूरी रही।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बाद में इस परियोजना पर समाजवादी पार्टी का कथित कब्जा बनाए रखने के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि इसमें अखिलेश यादव, डिंपल यादव, अखिलेश यादव के निजी सचिव और सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी जैसे लोग शामिल थे।

‘हमारी नीति माफिया को मिट्टी में मिलाने की है’

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि किसी महापुरुष के अपमान को डबल इंजन की सरकार स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार की नीति माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है, उसी तरह भ्रष्टाचार और बेईमानी के खिलाफ भी जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।

सीएम योगी ने कहा कि सरकारी धन किसी राजनीतिक दल या किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की जनता का पैसा है।

उन्होंने सरकार की ओर से वीरांगनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। योगी ने बताया कि विभिन्न पीएसी वाहिनियों का नाम वीरांगना अवंती बाई लोधी, ऊदा देवी पासी और झलकारी बाई जैसी वीरांगनाओं के नाम पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्नातक अंतिम वर्ष में पढ़ने वाली 50 हजार बेटियों को महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर स्कूटी देने की योजना पर भी काम कर रही है।

राजनाथ सिंह ने योगी सरकार के कामकाज की तारीफ की

कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि लखनऊ में तेजी से हो रहे विकास कार्यों में प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि लखनऊ के जनप्रतिनिधियों द्वारा जब भी विकास से जुड़ी मांग मुख्यमंत्री के सामने रखी गई, सरकार ने उसका सहयोग किया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार, रक्षा मंत्रालय और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल से विकास कार्यों को गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारें एक समान दिशा में काम करती हैं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है।

‘मूर्ख थी जो सोचा था कि…’, IAS दिव्या मित्तल ने इस्तीफे के बाद लिखी भावुक पोस्ट

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। कई जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर काम कर चुकीं दिव्या मित्तल अपनी संवेदनशील कार्यशैली और जनता से सीधे जुड़ने के अंदाज के लिए जानी जाती रही हैं

हाल ही में उन्हें देवरिया के जिलाधिकारी पद से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके कुछ समय बाद अचानक उनके इस्तीफे की खबर सामने आई। उनके इस फैसले की वजह को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी भावुक पोस्ट में दिव्या मित्तल ने इस्तीफे का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

उनकी पोस्ट में देश, मिट्टी, जनता के भरोसे और अपने प्रशासनिक सफर से जुड़ी कई भावनाएं दिखाई देती हैं।

‘13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया’

दिव्या मित्तल ने X पर लिखा कि उन्होंने 13 साल की अपनी प्रशासनिक यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से इस्तीफा दिया है।

उन्होंने बताया कि साधारण परिवेश में रहते हुए उन्होंने एक अच्छे और सफल जीवन का सपना देखा था। कड़ी मेहनत के बाद IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की और इसके बाद लंदन में नौकरी हासिल की। लेकिन विदेश में अच्छा करियर बनाने के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर होने का एहसास भीतर से परेशान करता रहा।

उन्होंने लिखा कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी आत्मसम्मान के साथ खड़े होने की क्षमता पर इस मिट्टी का कर्ज था। इसी कर्ज को चुकाने की इच्छा से वह वापस भारत लौटीं और IAS अधिकारी बनने का अवसर मिला।

देवरिया और मिर्जापुर से मिली बड़ी सीख

अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

वहीं, मिर्जापुर से उन्हें यह सीख मिली कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं बल्कि सिर्फ एक राय है। मां विंध्यवासिनी का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि उन्होंने वहां महसूस किया कि वास्तविक शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि विश्वास और आशीर्वाद से आती है।

उन्होंने कहा कि अपने लिए देखे गए कई सपने पूरे हो चुके थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने आम लोगों के लिए देखे गए सपनों को जीना शुरू किया।

‘हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान है’

दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में उन लोगों का भी जिक्र किया, जिनके जीवन में प्रशासनिक काम के जरिए बदलाव लाने का मौका उन्हें मिला।

उन्होंने लिखा कि जिस परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, जिस दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिला और जिस किसान के खेत तक पानी पहुंचा, उनकी खुशी में उन्हें असली संतोष मिला।

उन्होंने कहा कि लोगों के संघर्ष में उनके साथ चलते हुए उन्होंने यह समझा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय का वास्तविक अर्थ है।

‘मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आई हूं’

दिव्या मित्तल की पोस्ट की सबसे ज्यादा चर्चा इसी भावुक हिस्से को लेकर हो रही है। उन्होंने लिखा कि उन्हें लगता था कि वह कुछ देने के लिए आई हैं, लेकिन बाद में समझ आया कि उन्होंने खुद ही सबसे ज्यादा पाया।

उन्होंने बताया कि लोगों का प्यार और भरोसा उन्हें उस समय भी मिला, जब वह खुद थकी हुई या कमजोर महसूस कर रही थीं। उनके मुताबिक, जनता से मिला सम्मान और अपनापन उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन गया।

उन्होंने अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का भी आभार जताया और कहा कि इन लोगों ने हर मुश्किल समय में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।

लहुरियादह की बुजुर्ग महिला का किया जिक्र

इस्तीफे के बाद लिखी गई पोस्ट के अंतिम हिस्से में दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के लहुरियादह गांव की एक बुजुर्ग महिला का भावुक जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि जब गांव में पहली बार पानी पहुंचा तो वह बुजुर्ग महिला कुछ नहीं बोलीं। उन्होंने सिर्फ कांपते हाथों से दिव्या मित्तल के सिर को छुआ और उन्हें आशीर्वाद दिया।

दिव्या मित्तल ने लिखा कि आज पद भले ही छूट गया हो, लेकिन उस बुजुर्ग महिला का वह स्पर्श उनके जीवन में हमेशा बना रहेगा। साथ ही देश की मिट्टी से मिला वह सपना भी उनके भीतर कायम रहेगा।

मिर्जापुर में पानी पहुंचाने से मिली थी खास पहचान

दिव्या मित्तल अपने प्रशासनिक कार्यों के कारण पहले भी काफी चर्चा में रही हैं। मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने हलिया ब्लॉक के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र लहुरियादह में पेयजल पहुंचाने की दिशा में काम किया था।

इस पहल के बाद वह सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चित हुई थीं। वर्ष 2023 में मिर्जापुर से उनके तबादले के समय स्थानीय लोगों की भावुक विदाई भी खूब चर्चा में रही थी।

बस्ती और देवरिया में भी उनकी कार्यशैली और जनता से संवाद के कारण उन्हें लोकप्रियता मिली। अब उनके अचानक इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्होंने IAS की नौकरी छोड़ने का फैसला क्यों किया। दिव्या मित्तल की भावुक पोस्ट से उनके मन की स्थिति और प्रशासनिक सफर की झलक जरूर मिलती है, लेकिन इस्तीफे की कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आती।

बेटियों की सुरक्षा को लेकर दहशत में हैं माता-पिता,अखिलेश यादव ने यूपी की कानून व्यवस्था पर फिर उठाए सवाल

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: ग्रेटर नोएडा में छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला बताते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि ग्रेटर नोएडा में छह वर्षीय मासूम के साथ हुई वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की घटनाओं के कारण बेटियों के माता-पिता उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित और भयभीत हैं।

अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

सपा प्रमुख ने सवाल किया कि आखिर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब कैसे हो गई कि अपराधियों के मन में पुलिस और शासन का भय नहीं रह गया है।

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में सत्ता और पुलिस व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ अपराधों को कथित राजनीतिक संरक्षण मिलने से अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने भ्रष्ट पुलिसकर्मियों और अपराधियों के बीच कथित सांठगांठ का भी आरोप लगाया।

सपा अध्यक्ष ने घटना की निंदा करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

बीजेपी ने अखिलेश यादव के बयान पर किया पलटवार

अखिलेश यादव के आरोपों पर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और मौजूदा सरकार में अपराधियों को संरक्षण नहीं दिया जाता।

बीजेपी प्रवक्ता ने घटना को जघन्य और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना मानवता को शर्मसार करती है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने अखिलेश यादव से कहा कि उन्हें अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पुलिस की कार्रवाई का भी उल्लेख करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ सरकार में पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई की और आरोपी मुठभेड़ के दौरान मारा गया।

पुलिस मुठभेड़ में आरोपी की मौत

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, छह साल की बच्ची शुक्रवार रात अपने घर से लापता हुई थी। परिवार की ओर से मध्य नोएडा के ईकोटेक-3 थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी।

मध्य नोएडा के अपर पुलिस उपायुक्त स्वतंत्र कुमार सिंह के अनुसार, पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य माध्यमों की मदद से 40 वर्षीय बलराज की पहचान बच्ची के अपहरण के आरोपी के रूप में की।

पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी और शव को बोरे में रखकर फेंक दिया था।

अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी को हिरासत में लेने के बाद हथियार बरामदगी की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान उसने पुलिस टीम पर गोली चला दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी घायल हुआ और उसकी मौत हो गई।

घटना के बाद कानून-व्यवस्था पर सियासी बहस तेज

ग्रेटर नोएडा की इस घटना ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में महिला एवं बाल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जहां अखिलेश यादव ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं बीजेपी ने पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद IAS दिव्या मित्तल ने दिया इस्तीफा? BJP नेता प्रशांत उमराव का बड़ा दावा

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी और देवरिया की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी दी। इस बीच बीजेपी नेता प्रशांत उमराव ने उनके इस्तीफे को लेकर सवाल उठाते हुए कई दावे किए हैं।

प्रशांत उमराव ने X पर दावा किया कि दिव्या मित्तल ने इस्तीफा देने से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े किसी राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशांत उमराव ने दिव्या मित्तल पर लगाए कई आरोप

बीजेपी नेता ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में दिव्या मित्तल के इस्तीफे और उनके प्रशासनिक कार्यकाल को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि आईएएस अधिकारी को संयुक्त सचिव का पद पसंद नहीं था और वह जिलाधिकारी के बाद सीधे मंडलायुक्त के पद पर जाना चाहती थीं।

उन्होंने अपने पोस्ट में दिव्या मित्तल के कामकाज और जनप्रतिनिधियों के साथ कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। प्रशांत उमराव ने कई अन्य आरोप भी लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि दिव्या मित्तल के कार्यकाल के दौरान सरकारी योजनाओं को लेकर प्रचार और जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़े विवाद रहे। उन्होंने उनके पति और कथित आर्थिक गतिविधियों को लेकर भी आरोप लगाए।

इन आरोपों पर दिव्या मित्तल की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल ने क्या कहा?

आईएएस से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल ने X पर अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा कि 13 साल की अपनी प्रशासनिक यात्रा को उन्होंने स्वेच्छा से विराम दिया है।

उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने जीवन में आगे बढ़ने का सपना देखा। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई की। इसके बाद उन्हें लंदन में नौकरी मिली, लेकिन विदेश में अच्छी नौकरी होने के बावजूद उन्हें लगा कि कुछ अधूरा है।इसी सोच के साथ उन्होंने देश की सेवा करने का फैसला किया और सिविल सेवा की ओर कदम बढ़ाया।

पहले IPS, फिर बनीं IAS

दिव्या मित्तल की शैक्षणिक और प्रशासनिक यात्रा भी काफी चर्चा में रही है। मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से BTech और IIM बेंगलुरु से MBA किया।

MBA के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की। इसके बाद देश सेवा के उद्देश्य से उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। वर्ष 2012 में अपने पहले प्रयास में वह IPS बनीं, जबकि 2013 में दूसरे प्रयास में 68वीं रैंक हासिल कर IAS बनीं।

मिर्जापुर में पानी पहुंचाने के काम से मिली पहचान

दिव्या मित्तल अपने प्रशासनिक कार्यों को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने हलिया ब्लॉक के दूरस्थ पहाड़ी गांव लहुरियादह में पेयजल पहुंचाने की दिशा में काम किया।गांव में आजादी के कई दशक बाद पहली बार नल के जरिए पानी पहुंचने की पहल ने उन्हें काफी चर्चा दिलाई थी।

दिव्या मित्तल संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। देवरिया के बाद वह उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।

इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद उनके प्रशासनिक करियर और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, बीजेपी नेता प्रशांत उमराव के आरोपों ने इस मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। फिलहाल, राहुल गांधी से कथित मुलाकात और इस्तीफे के बीच संबंध को लेकर किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

PM Modi को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, ताशकंद से दिया खास संदेश

नई दिल्ली /सर्वोदय न्यूज़:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ओली दाराजाली दुस्तलिक’ से सम्मानित किया गया है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने रविवार को एक समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।

सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने इसे बेहद विनम्रता के साथ स्वीकार करते हुए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों और साझा विरासत को समर्पित किया। उन्होंने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की भी सराहना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और अब इन्हें व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर तक ले जाया गया है।

‘सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है’

पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी पुरस्कार से गौरव और सम्मान की अनुभूति होती है, लेकिन उसके साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

उन्होंने उज्बेकिस्तान की धरती से वहां के लोगों को भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगा।

प्रधानमंत्री ने भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों को सदियों पुरानी दोस्ती और साझा सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को आने वाले समय में और व्यापक बनाया जाएगा।

ताशकंद में आर्थिक सहयोग पर बनी रणनीति

राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की उस पहल की तारीफ की, जिसमें द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं की पहचान के साथ उनकी समयसीमा भी तय की गई है। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश मिलकर इन परियोजनाओं पर जल्द आगे बढ़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछली रात डिनर के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बातचीत हुई। इन विषयों पर दोनों देशों की टीमें भी सहमत हैं।

विदेश मंत्री स्तर पर बनेगी समन्वय परिषद

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाने के लिए विदेश मंत्री स्तर पर एक समन्वय परिषद गठित करने की बात कही गई है।

इसके साथ ही दोनों देशों के संयुक्त आयोग को सचिव स्तर से बढ़ाकर मंत्री स्तर तक ले जाने पर भी सहमति बनी है। दोनों देशों के कारोबारी नेताओं को एक मंच पर लाने के लिए संयुक्त रूप से बिजनेस समिट आयोजित करने की योजना भी सामने आई है।

यूरेनियम सप्लाई को लेकर भी अहम चर्चा

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था बनाने पर भी काम किया जाएगा।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच तीन सिस्टर-सिटी और सिस्टर-स्टेट व्यवस्थाएं स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन पहलों की क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।

पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान के ‘न्यू ताशकंद’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए गुजरात की GIFT City का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान से एक प्रतिनिधिमंडल को भारत आमंत्रित किया जा सकता है, ताकि वह तकनीक के इस्तेमाल और आधुनिक शहरी विकास का अनुभव हासिल कर सके।

राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने की भारत की जमकर तारीफ

बैठक के दौरान राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक विकास की मजबूत गति बनाए रखते हुए बड़े स्तर की परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने डिजिटलीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष अनुसंधान सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति को उल्लेखनीय बताया।

मिर्जियोयेव ने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की आवाज और प्रभाव लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान भारत का करीबी मित्र है और भारत की उपलब्धियों को देखकर वह बेहद प्रसन्न हैं।

RMLIMS के डॉ. विकास सिंह ने कोलकाता में हासिल किए दो प्रतिष्ठित पुरस्कार

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: डॉ.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS), लखनऊ के जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ.विकास सिंह ने चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कोलकाता में आयोजितAssociation of Minimal Access Surgeons of India (AMASI)के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

डॉ. विकास सिंह को Best Institutional Video Award के तहत Gold Medal प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान उनके वीडियो “Concomitant Laparoscopic Repair of Perineal Hernia with Inguinal Hernia” के लिए मिला।

इसके अलावा, उन्होंने सम्मेलन के Free Paper Session में “Laparoscopic Repair of Biliary Duct Injury” विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया, जिसके लिए उन्हें Best Paper Award से सम्मानित किया गया।

लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में अहम योगदान

AMASI भारत में मिनिमल एक्सेस और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में कार्य करने वाली प्रमुख राष्ट्रीय संस्थाओं में शामिल है। इसके अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश के साथ-साथ विदेशों से भी विशेषज्ञ सर्जन और चिकित्सा क्षेत्र के पेशेवर हिस्सा लेते हैं।

ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर डॉ. विकास सिंह द्वारा दो पुरस्कार हासिल करना RMLIMS के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

ASI के Governing Council Member हैं डॉ. विकास सिंह

डॉ. विकास सिंह Association of Surgeons of India (ASI) के Governing Council Member होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि भी हैं। वह लंबे समय से उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के साथ शोध और अकादमिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

उनके कार्यों से RMLIMS और जनरल सर्जरी विभाग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। चिकित्सा शिक्षा, शोध और सर्जिकल तकनीकों के क्षेत्र में उनका योगदान लगातार जारी है।

संस्थान के निदेशक ने दी बधाई

डॉ. विकास सिंह की इस उपलब्धि पर RMLIMS के निदेशक प्रो. डॉ. सी.एम. सिंह ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने दोनों पुरस्कारों को संस्थान और जनरल सर्जरी विभाग के लिए गौरव की बात बताया।

निदेशक ने डॉ. विकास सिंह के आगामी अकादमिक और सर्जिकल कार्यों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि वह भविष्य में भी इसी तरह संस्थान का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते रहेंगे।

मोहन भागवत के बयान से खुश हुए बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी, बोले- ‘देश की तरक्की के लिए भाईचारा जरूरी’

अयोध्या/सर्वोदय न्यूज़: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता और देश में आपसी भाईचारे को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। भागवत के बयान का अयोध्या में बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने स्वागत किया है।

मोहन भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा। उनके इस बयान को इकबाल अंसारी ने सही बताते हुए कहा कि देश की मजबूती और विकास के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता बेहद जरूरी है।

‘मोहन भागवत ने बिल्कुल सही बात कही’

इकबाल अंसारी ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने जो बात कही है, वह सही है और यह देश की प्रगति, विकास तथा रोजगार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत को दर्शाती है।

अंसारी के मुताबिक, भागवत का बयान इस बात का उदाहरण है कि देश को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो समाज के हर वर्ग की चिंता करे। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमानों के बीच एकता मजबूत होगी तो देश भी तेजी से आगे बढ़ेगा।

‘धर्म अलग हो सकता है, कर्म नहीं’

इकबाल अंसारी ने कहा कि भारत की पहचान हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और आपसी प्रेम से है। उनका कहना था कि यदि देश में आपसी सौहार्द और इंसानियत मजबूत रहेगी तो भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन होगा।

उन्होंने कहा, धर्म अलग-अलग हो सकता है, लेकिन कर्म अलग नहीं होता। इंसान को अपने धर्म के साथ अच्छे कर्म और इंसानियत को भी महत्व देना चाहिए। उनके अनुसार जिस देश में लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और भाईचारे के साथ रहते हैं, वह देश प्रगति करता है।

‘राम, हनुमान और अल्लाह सभी का सम्मान’

बाबरी मस्जिद मामले से जुड़े रहे इकबाल अंसारी ने धार्मिक सद्भाव की बात करते हुए कहा कि वह अयोध्या के निवासी हैं और सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।

उन्होंने कहा कि उनके लिए भगवान राम, हनुमान जी और अल्लाह सभी सम्मान के योग्य हैं। उन्होंने लोगों से भी सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करने की अपील की।

अंसारी ने गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि इंसान को अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए और अच्छे कर्मों का फल भी अच्छा ही मिलता है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को आपसी विवाद से ऊपर उठकर भाईचारे और देश की तरक्की की बात करनी चाहिए।

मोहन भागवत ने दादरी विमान हादसे का जिक्र क्यों किया?

न्यूयॉर्क में अपने संबोधन के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हरियाणा के दादरी में हुए विमान हादसे का उदाहरण देते हुए संघ के स्वयंसेवकों के राहत और बचाव कार्य का भी उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि हादसे में दो विमान आपस में टकरा गए थे और इनमें अरब देशों के नागरिक सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम यात्री शामिल थे। भागवत के मुताबिक, दुर्घटना के बाद RSS के स्वयंसेवक मौके पर पहुंचने वालों में सबसे आगे थे और उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में हिस्सा लिया।

मोहन भागवत ने इसी उदाहरण के जरिए कहा कि RSS को केवल उसके बारे में कही जाने वाली बातों से नहीं, बल्कि उसके कार्यों को करीब से देखकर समझना चाहिए।

भाईचारे और इंसानियत पर जोर

मोहन भागवत और इकबाल अंसारी के बयानों में एक बात समान रूप से सामने आती है—देश की प्रगति के लिए सामाजिक एकता, भाईचारा और इंसानियत को मजबूत करना जरूरी है। अंसारी ने भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि देश में हिंदू-मुसलमानों के बीच आपसी सम्मान और सद्भाव बना रहना चाहिए।

प्रतापगढ़ में SDM की बेटी को कथित तौर पर दी गई एक्सपायरी दवा, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप; दो कर्मचारी निलंबित

Pratapgarh News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में सरकारी अस्पताल में दवाओं की गुणवत्ता और स्टोरेज व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। लालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और ट्रॉमा सेंटर में कथित तौर पर एक्सपायरी दवाएं मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामला तब सुर्खियों में आया जब लालगंज के SDM वाचस्पति सिंह की बेटी के इलाज के दौरान कथित तौर पर एक्सपायरी पैरासिटामोल इंजेक्शन और ग्लूकोज दिए जाने की बात सामने आई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल की दवा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कर दवाओं के स्टॉक और उनकी एक्सपायरी डेट की जांच की।

बुखार के इलाज के लिए CHC पहुंची थी SDM की बेटी

बताया जा रहा है कि SDM वाचस्पति सिंह की बेटी को बुखार होने के बाद इलाज के लिए लालगंज CHC लाया गया था। उपचार के दौरान उसे पैरासिटामोल का इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई।

बाद में जब संबंधित दवाओं की एक्सपायरी डेट को लेकर सवाल उठा तो मामला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद अस्पताल में रखी दवाओं की जांच शुरू की गई।

CMO ने किया अस्पताल का अचानक निरीक्षण

मामले की जानकारी मिलने के बाद CMO ने शुक्रवार को लालगंज CHC और ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दवा स्टोर में मौजूद स्टॉक, दवाओं की एक्सपायरी डेट और उनके रखरखाव की व्यवस्था को देखा गया।

अधिकारियों ने दवाओं से संबंधित रिकॉर्ड भी खंगाला। साथ ही यह जांच की गई कि एक्सपायरी हो चुकी दवाओं को उपयोग योग्य स्टॉक से अलग रखने के लिए अस्पताल में क्या व्यवस्था है और उसका पालन किस स्तर तक किया जा रहा था।

स्टोर में मिलीं एक्सपायरी दवाएं

निरीक्षण के बाद शनिवार सुबह अस्पताल के स्टोर में मौजूद एक्सपायरी दवाओं को अलग करने की प्रक्रिया शुरू की गई। जांच के दौरान कुछ एक्सपायरी दवाएं और ग्लूकोज मिलने की बात सामने आई।

स्वास्थ्य विभाग ने इन दवाओं को इस्तेमाल किए जाने वाले स्टॉक से अलग कर दिया है। इसके बाद अस्पताल में दवाओं के भंडारण और स्टॉक की नियमित निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

स्टोर प्रभारी और फार्मासिस्ट पर कार्रवाई

मामले में स्वास्थ्य विभाग ने दो कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। स्टोर प्रभारी अरविंद कुमार शुक्ला और फार्मासिस्ट देव कुमार दुबे को निलंबित कर दिया गया है।

बताया जा रहा है कि स्टोर प्रभारी पर एक्सपायरी इंजेक्शन जारी करने का आरोप है। वहीं फार्मासिस्ट पर इंजेक्शन देने से पहले दवा की एक्सपायरी डेट की जांच नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एक्सपायरी दवा मरीज को किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में दी गई।

दवाओं के स्टॉक की निगरानी पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सरकारी अस्पतालों में दवाओं के रखरखाव और स्टॉक मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक्सपायरी दवाएं स्टोर में मौजूद रहने के बावजूद समय रहते अलग क्यों नहीं की गईं।

स्वास्थ्य विभाग इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि दवाओं के स्टॉक की नियमित जांच की जिम्मेदारी किसकी थी और एक्सपायरी दवाओं को नष्ट या अलग करने की प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

फिलहाल दो कर्मचारियों के निलंबन के बाद मामले की जांच जारी है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी और लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

योगी से बैर नहीं, BJP विधायकों से ज्यादा गुस्सा;पंजाब में भगवंत मान की स्थिति क्या? सर्वे में बड़ा खुलासा

UP Election 2027 Survey: उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन तीनों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच सामने आए एक सर्वे ने मतदाताओं के मौजूदा मूड की तस्वीर पेश की है। सर्वे के मुताबिक, लोगों की नाराजगी राज्य सरकारों या मुख्यमंत्रियों की तुलना में अपने-अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायकों को लेकर ज्यादा दिखाई दे रही है।

वोट वाइब (Vote Vibe) और इंडिया टुडे-सीवोटर मूड ऑफ द नेशन सर्वे में मतदाताओं से सरकार, मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक के प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछे गए। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि विधायकों के खिलाफ असंतोष के बावजूद इसका असर सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दलों की लोकप्रियता पर उसी अनुपात में नहीं दिखाई दे रहा है।

वोट वाइब के संस्थापक अमिताभ तिवारी के मुताबिक, स्थानीय विधायकों की जनता से दूरी इस नाराजगी की प्रमुख वजहों में से एक है। उनके अनुसार चुनाव जीतने के बाद कई जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगता है कि वे क्षेत्र में सक्रिय रहने के बजाय राजधानी में ज्यादा समय बिताते हैं और जनता से जुड़े काम अपने रिश्तेदारों या करीबी लोगों के भरोसे छोड़ देते हैं।

सर्वे से यह भी संकेत मिलता है कि तीनों राज्यों में करीब 10 से 15 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जो उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और उसके व्यवहार को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान स्थानीय विधायक के प्रति जनता की नाराजगी राजनीतिक दलों के लिए अहम मुद्दा बन सकती है।

यूपी में योगी से ज्यादा विधायक निशाने पर

उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधायकों के खिलाफ असंतोष सबसे ज्यादा दिखाई दिया। सर्वे में करीब 49 प्रतिशत लोगों ने अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायक के कामकाज पर असंतोष जताया, जबकि लगभग 27.9 प्रतिशत लोग विधायक के प्रदर्शन से संतुष्ट नजर आए।

वहीं मुख्यमंत्री पद की पसंद को लेकर तस्वीर अलग रही। 43.3 प्रतिशत लोगों ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद किया, जबकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 35.5 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

सरकार के कामकाज को लेकर भी योगी सरकार को सर्वे में अपेक्षाकृत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। करीब 41.8 प्रतिशत लोगों ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रदर्शन को अच्छा बताया।

यानी सर्वे के आंकड़ों में एक दिलचस्प अंतर दिखाई देता है—राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को लेकर समर्थन अपेक्षाकृत मजबूत है, जबकि स्थानीय विधायकों के प्रति मतदाताओं में नाराजगी ज्यादा है।

NDA और सपा गठबंधन में कांटे की टक्कर

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर वोट शेयर के सवाल पर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए और सपा गठबंधन के बीच मुकाबला काफी करीबी नजर आया।

सर्वे के मुताबिक, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 41.8 प्रतिशत वोट और सपा गठबंधन को 38.7 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि जब मतदाताओं से यह पूछा गया कि चुनाव में कौन जीत सकता है, तो दोनों खेमों के बीच मुकाबला बराबरी का दिखाई दिया।

उम्र के आधार पर मतदाताओं की पसंद में भी अंतर सामने आया। 45 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं में योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रति समर्थन मजबूत नजर आया, जबकि युवा मतदाताओं में अखिलेश यादव के प्रति ज्यादा झुकाव दिखाई दिया।

पंजाब में विधायकों से नाराजगी, मान की पकड़ कायम

पंजाब में भी स्थानीय विधायकों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी सामने आई है। सर्वे में 45.3 प्रतिशत लोगों ने अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायक के कामकाज से असंतोष जताया।

हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। करीब 40 प्रतिशत लोगों ने पंजाब सरकार के कामकाज पर संतुष्टि जताई। मुख्यमंत्री पद की पसंद में भगवंत मान 40.1 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे रहे।

कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी 20.6 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे नंबर पर दिखाई दिए।

AAP सबसे आगे, कांग्रेस दूसरे नंबर पर

पंजाब में संभावित वोट शेयर की बात करें तो आम आदमी पार्टी सबसे आगे दिखाई दे रही है। सर्वे में AAP को 34 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। कांग्रेस करीब 30.2 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर है।

वहीं भाजपा को 12.2 प्रतिशत और शिरोमणि अकाली दल को 11.3 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।

सर्वे का एक और महत्वपूर्ण पहलू पंजाब के मतदाताओं को लेकर सामने आया। करीब 71.2 प्रतिशत लोगों ने अपनी वोट की पसंद पहले से तय होने की बात कही। यह आंकड़ा तीनों राज्यों में सबसे ज्यादा बताया गया है और पंजाब में अपेक्षाकृत स्थिर वोटर बेस की ओर इशारा करता है।

2027 में उम्मीदवारों का चेहरा बन सकता है बड़ा मुद्दा

सर्वे के आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए एक अहम संकेत दे रहे हैं। सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति संतुष्टि के बावजूद स्थानीय विधायकों से नाराजगी बताती है कि आगामी चुनाव में केवल सरकार का प्रदर्शन ही निर्णायक नहीं होगा।

उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, जनता से संपर्क और क्षेत्र में उसकी सक्रियता भी वोटरों के फैसले को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले पार्टियों के लिए टिकट वितरण एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।

ताशकंद पहुंचे PM Modi, भारत के इतिहास से जुड़ा है ये शहर; मिला था एक जख्म

न्यूज़ डेस्क/ सर्वोदय न्यूज़:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान के ताशकंद के लिए रवाना हो गए। पीएम मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिज गणराज्य की यात्रा पर हैं। इस दौरान वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे।

प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा को भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा से मध्य एशिया के साथ भारत के रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए साझा प्रयासों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

भारत के इतिहास में क्यों खास है ताशकंद?

पीएम मोदी अपने दौरे की शुरुआत ताशकंद से कर रहे हैं। यहां उनकी मुलाकात उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव से होगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

ताशकंद भारत के आधुनिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना से भी जुड़ा हुआ है। 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद इसी शहर में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ताशकंद समझौता हुआ था। हालांकि, समझौते के कुछ ही समय बाद भारत को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन के रूप में गहरा सदमा लगा।

10 जनवरी 1966 को हुआ था ताशकंद समझौता

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 के युद्ध के बाद शांति बहाल करने के उद्देश्य से सोवियत संघ की मध्यस्थता में ताशकंद में वार्ता हुई थी। उस समय सोवियत संघ का हिस्सा रहे ताशकंद में 10 जनवरी 1966 को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

वार्ता में भारत की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान शामिल हुए थे। सोवियत संघ के प्रधानमंत्री एलेक्सी कोसिगिन ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

समझौते के तहत दोनों देशों ने युद्ध से पहले की स्थिति में लौटने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर सहमति जताई थी।

समझौते के बाद उसी रात शास्त्री जी का निधन

ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ घंटे बाद ही लाल बहादुर शास्त्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई। 11 जनवरी 1966 की रात उनका निधन हो गया। आधिकारिक तौर पर उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था।

शास्त्री जी के निधन को लेकर समय-समय पर कई सवाल और चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी मौत का कारण हृदयाघात ही दर्ज है।

ताशकंद समझौते के तहत भारत द्वारा कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को पाकिस्तान को वापस किए जाने को लेकर भी उस समय राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हुई थी।

ताशकंद में शास्त्री स्मारक भी जाएंगे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा से पहले कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वह राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

पीएम मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। इन स्थलों को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों का प्रतीक माना जाता है।

ताशकंद के बाद बिश्केक जाएंगे पीएम मोदी

उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे। वहां वह राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर SCO के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब शंघाई सहयोग संगठन अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। भारत वर्ष 2017 से SCO का सक्रिय सदस्य है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत क्षेत्र में सुरक्षा, संपर्क और अवसरों पर आधारित अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना चाहता है। आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करना जरूरी है।

विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन में भी शामिल होंगे

बिश्केक में पीएम मोदी राष्ट्रपति सादिर झापारोव और अन्य SCO नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे।

विश्व घुमंतू खेल मध्य एशिया की पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला प्रमुख आयोजन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है।

मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी पर जोर

पीएम मोदी ने भरोसा जताया है कि उनकी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा से मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। साथ ही इससे भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच ऐतिहासिक एवं सभ्यतागत संबंध भी और गहरे होंगे।

प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत मध्य एशिया के साथ व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लगातार बढ़ाने पर जोर दे रहा है।