योगी से बैर नहीं, BJP विधायकों से ज्यादा गुस्सा;पंजाब में भगवंत मान की स्थिति क्या? सर्वे में बड़ा खुलासा

UP Election 2027 Survey: उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन तीनों राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच सामने आए एक सर्वे ने मतदाताओं के मौजूदा मूड की तस्वीर पेश की है। सर्वे के मुताबिक, लोगों की नाराजगी राज्य सरकारों या मुख्यमंत्रियों की तुलना में अपने-अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायकों को लेकर ज्यादा दिखाई दे रही है।

वोट वाइब (Vote Vibe) और इंडिया टुडे-सीवोटर मूड ऑफ द नेशन सर्वे में मतदाताओं से सरकार, मुख्यमंत्री और स्थानीय विधायक के प्रदर्शन को लेकर सवाल पूछे गए। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि विधायकों के खिलाफ असंतोष के बावजूद इसका असर सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दलों की लोकप्रियता पर उसी अनुपात में नहीं दिखाई दे रहा है।

वोट वाइब के संस्थापक अमिताभ तिवारी के मुताबिक, स्थानीय विधायकों की जनता से दूरी इस नाराजगी की प्रमुख वजहों में से एक है। उनके अनुसार चुनाव जीतने के बाद कई जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगता है कि वे क्षेत्र में सक्रिय रहने के बजाय राजधानी में ज्यादा समय बिताते हैं और जनता से जुड़े काम अपने रिश्तेदारों या करीबी लोगों के भरोसे छोड़ देते हैं।

सर्वे से यह भी संकेत मिलता है कि तीनों राज्यों में करीब 10 से 15 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जो उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और उसके व्यवहार को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान स्थानीय विधायक के प्रति जनता की नाराजगी राजनीतिक दलों के लिए अहम मुद्दा बन सकती है।

यूपी में योगी से ज्यादा विधायक निशाने पर

उत्तर प्रदेश में मौजूदा विधायकों के खिलाफ असंतोष सबसे ज्यादा दिखाई दिया। सर्वे में करीब 49 प्रतिशत लोगों ने अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायक के कामकाज पर असंतोष जताया, जबकि लगभग 27.9 प्रतिशत लोग विधायक के प्रदर्शन से संतुष्ट नजर आए।

वहीं मुख्यमंत्री पद की पसंद को लेकर तस्वीर अलग रही। 43.3 प्रतिशत लोगों ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद के लिए पसंद किया, जबकि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 35.5 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहे।

सरकार के कामकाज को लेकर भी योगी सरकार को सर्वे में अपेक्षाकृत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। करीब 41.8 प्रतिशत लोगों ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रदर्शन को अच्छा बताया।

यानी सर्वे के आंकड़ों में एक दिलचस्प अंतर दिखाई देता है—राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को लेकर समर्थन अपेक्षाकृत मजबूत है, जबकि स्थानीय विधायकों के प्रति मतदाताओं में नाराजगी ज्यादा है।

NDA और सपा गठबंधन में कांटे की टक्कर

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर वोट शेयर के सवाल पर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए और सपा गठबंधन के बीच मुकाबला काफी करीबी नजर आया।

सर्वे के मुताबिक, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 41.8 प्रतिशत वोट और सपा गठबंधन को 38.7 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। हालांकि जब मतदाताओं से यह पूछा गया कि चुनाव में कौन जीत सकता है, तो दोनों खेमों के बीच मुकाबला बराबरी का दिखाई दिया।

उम्र के आधार पर मतदाताओं की पसंद में भी अंतर सामने आया। 45 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं में योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रति समर्थन मजबूत नजर आया, जबकि युवा मतदाताओं में अखिलेश यादव के प्रति ज्यादा झुकाव दिखाई दिया।

पंजाब में विधायकों से नाराजगी, मान की पकड़ कायम

पंजाब में भी स्थानीय विधायकों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी सामने आई है। सर्वे में 45.3 प्रतिशत लोगों ने अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायक के कामकाज से असंतोष जताया।

हालांकि मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। करीब 40 प्रतिशत लोगों ने पंजाब सरकार के कामकाज पर संतुष्टि जताई। मुख्यमंत्री पद की पसंद में भगवंत मान 40.1 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे रहे।

कांग्रेस नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी 20.6 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे नंबर पर दिखाई दिए।

AAP सबसे आगे, कांग्रेस दूसरे नंबर पर

पंजाब में संभावित वोट शेयर की बात करें तो आम आदमी पार्टी सबसे आगे दिखाई दे रही है। सर्वे में AAP को 34 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। कांग्रेस करीब 30.2 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर है।

वहीं भाजपा को 12.2 प्रतिशत और शिरोमणि अकाली दल को 11.3 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।

सर्वे का एक और महत्वपूर्ण पहलू पंजाब के मतदाताओं को लेकर सामने आया। करीब 71.2 प्रतिशत लोगों ने अपनी वोट की पसंद पहले से तय होने की बात कही। यह आंकड़ा तीनों राज्यों में सबसे ज्यादा बताया गया है और पंजाब में अपेक्षाकृत स्थिर वोटर बेस की ओर इशारा करता है।

2027 में उम्मीदवारों का चेहरा बन सकता है बड़ा मुद्दा

सर्वे के आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए एक अहम संकेत दे रहे हैं। सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति संतुष्टि के बावजूद स्थानीय विधायकों से नाराजगी बताती है कि आगामी चुनाव में केवल सरकार का प्रदर्शन ही निर्णायक नहीं होगा।

उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, जनता से संपर्क और क्षेत्र में उसकी सक्रियता भी वोटरों के फैसले को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले पार्टियों के लिए टिकट वितरण एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।

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