चेन्नई/सर्वोदय न्यूज़: तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से अलग होने के बाद राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। चेन्नई में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने अपने फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक सोच और प्राथमिकताएं अब भाजपा के मौजूदा नेतृत्व के दृष्टिकोण से मेल नहीं खाती हैं।
अन्नामलाई ने कहा कि लंबे समय से उनके मन में वैचारिक स्तर पर संघर्ष चल रहा था। उन्होंने बताया कि एक ओर वह भाजपा के नेता के रूप में कार्य कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु और तमिल समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी अलग सोच विकसित हो रही थी। इसी कारण उन्होंने पार्टी से अलग होकर नया रास्ता चुनने का निर्णय लिया।
पहले ही बना लिया था इस्तीफे का मन
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि उन्होंने पिछले वर्ष ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे के इरादे से अवगत करा दिया था। हालांकि, संगठन की ओर से उन्हें कुछ समय तक जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया गया था। अन्नामलाई के अनुसार, उन्होंने पार्टी के हितों को ध्यान में रखते हुए तत्काल निर्णय नहीं लिया और उचित समय का इंतजार किया।
नई राजनीतिक शुरुआत की घोषणा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि वह केवल भाजपा छोड़कर राजनीति से दूर नहीं जा रहे हैं, बल्कि एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी नई पार्टी तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव में भाग लेगी और राज्य की राजनीति में एक वैकल्पिक विकल्प प्रस्तुत करेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी राजनीति की जरूरत है जो स्थानीय मुद्दों, विकास और सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता दे। इसी उद्देश्य के साथ नया संगठन तैयार किया जा रहा है।
नेतृत्व पर दबाव नहीं डालना चाहते थे
अन्नामलाई ने बताया कि उन्होंने अपने इस्तीफे में भी यह उल्लेख किया था कि तमिलनाडु की राजनीति और विकास को लेकर उनकी जो सोच है, उसे लेकर वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर किसी प्रकार का अतिरिक्त दबाव नहीं बनाना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने स्वतंत्र राजनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया।
रजनीकांत के प्रस्ताव को भी किया अस्वीकार
प्रेस वार्ता के दौरान अन्नामलाई ने यह भी बताया कि उन्हें अभिनेता रजनीकांत की ओर से साथ काम करने का प्रस्ताव मिला था। हालांकि, उन्होंने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने का फैसला किया।
उनके अनुसार, वह किसी दूसरे मंच से जुड़ने के बजाय अपने विचारों और एजेंडे के आधार पर स्वतंत्र राजनीतिक आंदोलन खड़ा करना चाहते हैं। अब तमिलनाडु की राजनीति में उनकी नई पार्टी किस तरह प्रभाव डालती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



