पटना/सर्वोदय न्यूज़:- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह को विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही मौजूदा एमएलसी संजय मयूख को दोबारा मौका दिया गया है। भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल कुमार ठाकुर और शीला प्रजापति को भी उम्मीदवार बनाया है।
पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की सूची राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी की ओर से जारी की गई। सूची सामने आने के बाद बिहार की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
पवन सिंह को मिला राजनीतिक अवसर
भोजपुरी सिनेमा के चर्चित चेहरे पवन सिंह को भाजपा ने पहली बार विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले उनके नाम की चर्चा राज्यसभा चुनाव के दौरान भी हुई थी, लेकिन तब उन्हें मौका नहीं मिला था।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने काराकाट संसदीय सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी। बाद में उन्होंने भाजपा के साथ अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई और अब पार्टी ने उन्हें एमएलसी चुनाव में उतारा है।
संजय मयूख पर फिर जताया भरोसा
भाजपा ने वर्तमान विधान परिषद सदस्य संजय मयूख को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। उनका मौजूदा कार्यकाल इसी महीने समाप्त होने वाला है। चुनाव जीतने की स्थिति में वह अगले छह वर्षों तक विधान परिषद के सदस्य बने रहेंगे।
राजनीतिक गलियारों में उनका नाम पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के संभावित उम्मीदवारों में भी चर्चा में था, लेकिन पार्टी ने उन्हें पुनः विधान परिषद भेजने का फैसला किया है।
18 जून को होगा मतदान
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा कोटे की नौ विधान परिषद सीटों के लिए 18 जून को मतदान कराया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया जारी है और उम्मीदवार 8 जून तक अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
चुनाव में विजयी उम्मीदवारों का कार्यकाल छह वर्ष का होगा। दूसरी ओर जनता दल (यूनाइटेड) ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
एनडीए का पलड़ा भारी
बिहार विधानसभा में मौजूदा संख्याबल को देखते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार नौ में से आठ सीटों पर एनडीए समर्थित उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट विपक्षी महागठबंधन के खाते में जा सकती है।
विधानसभा में एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल है, जिससे भाजपा, जदयू और सहयोगी दल मिलकर अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज कर सकते हैं। हालांकि अंतिम परिणाम मतदान और संभावित क्रॉस वोटिंग पर भी निर्भर करेगा।
उपचुनाव पर भी नजर
इन चुनावों के साथ एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा, जो पूर्व मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। इस सीट का कार्यकाल अभी कई वर्षों तक शेष है। ऐसे में इस चुनाव पर भी राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।



