Reported By- Hari Ram, Lucknow
लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश सरकार ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन कार्यरत शिक्षकों और शिक्षिकाओं की अंतर्जनपदीय स्थानांतरण (ट्रांसफर) नीति जारी कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष जनगणना कार्य और विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए केवल विशेष परिस्थितियों में ही स्थानांतरण की अनुमति दी जाएगी।
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Sandeep Singh ने बताया कि सरकार शिक्षकों की वास्तविक और मानवीय समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में शिक्षकों के हितों के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालयों में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रदेश में जनगणना 2026-27 का कार्य भी संचालित किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसी वजह से इस बार तबादला नीति को सीमित दायरे में रखा गया है।
किन मामलों में मिलेगा स्थानांतरण?
अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार निम्न परिस्थितियों में अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया जा सकेगा—
- शिक्षक या शिक्षिका स्वयं दिव्यांग हों।
- पति, पत्नी या अविवाहित पुत्र/पुत्री दिव्यांग हों।
- शिक्षक अथवा उनकी अविवाहित संतान कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो।
- शिक्षक या उनकी अविवाहित संतान डायलिसिस पर हो।
शिक्षक दंपतियों को भी राहत
नई नीति में शिक्षक दंपतियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। यदि पति-पत्नी दोनों बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत हैं, तो छात्र-शिक्षक अनुपात और विद्यालयों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उनके स्थानांतरण पर विचार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पारिवारिक जीवन और शैक्षिक जरूरतों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना है।
विशेष मानवीय परिस्थितियों में भी मिलेगा मौका
सरकार ने यह भी प्रावधान किया है कि किसी अत्यंत गंभीर और मानवीय परिस्थिति में मुख्यमंत्री की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद स्थानांतरण पर विचार किया जा सकता है।
राज्य सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करते हुए शिक्षा व्यवस्था और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यों को प्रभावित होने से बचाना है।



