लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार नई भवन उपविधियां लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के तहत एमएसएमई, डाटा सेंटर और अन्य औद्योगिक इकाइयों को पहले की तुलना में अधिक ऊंचाई तक निर्माण करने की अनुमति मिल सकती है। इसके साथ ही चौड़ी सड़कों के किनारे बड़े पैमाने पर निर्माण की राह भी आसान होगी।
औद्योगिक विकास विभाग ने नई उपविधियों का प्रारूप जारी कर दिया है और इस पर आम जनता तथा संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। अंतिम मंजूरी के बाद प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
सड़क की चौड़ाई के आधार पर मिलेगा अधिक निर्माण का अधिकार
प्रस्तावित नियमों के अनुसार 12 से 24 मीटर चौड़ी सड़क वाले क्षेत्रों में उद्योगों को अधिक निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। ऐसे क्षेत्रों में छह मंजिला तक भवन निर्माण संभव होगा।
वहीं 24 से 45 मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे स्थित भूखंडों पर अधिकतम 10.5 एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) तक निर्माण की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा 45 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क वाले क्षेत्रों में ऊंची इमारतों के निर्माण पर काफी हद तक प्रतिबंधों में ढील देने की तैयारी है।
सरकार का उद्देश्य निवेशकों को बेहतर बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना और औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना है।
ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को भी फायदा
नई उपविधि में औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर विकसित होने वाली ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को भी राहत देने का प्रस्ताव है। 12 से 18 मीटर और 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों के किनारे सात मंजिल तक भवन निर्माण की अनुमति दी जा सकती है।
वर्तमान में एफएआर, सेटबैक, ग्राउंड कवरेज और भवन की ऊंचाई को लेकर अलग-अलग नियम लागू हैं, जिन्हें अधिक व्यावहारिक और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में बदलाव किया जा रहा है।
सेटबैक नियमों में भी बदलाव
नई व्यवस्था के तहत सेटबैक नियमों को अधिक तर्कसंगत बनाया गया है। प्रस्ताव के अनुसार छोटे भूखंडों पर कम सेटबैक रखना होगा, जबकि बड़े भूखंडों के लिए निर्धारित दूरी बनाए रखना अनिवार्य रहेगा।
100 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर आगे की ओर 1.5 मीटर सेटबैक का प्रावधान है, जबकि बड़े भूखंडों के लिए यह दूरी क्रमशः बढ़ती जाएगी। 6000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर आगे 9 मीटर और अन्य दिशाओं में 6-6 मीटर सेटबैक प्रस्तावित किया गया है।
पार्किंग और हरित क्षेत्र के नियमों में राहत
औद्योगिक और आवासीय परियोजनाओं में भूमि के अधिकतम उपयोग को ध्यान में रखते हुए लैंडस्केपिंग की अनिवार्यता को 25-50 प्रतिशत से घटाकर 5-10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था को भी व्यावहारिक बनाया गया है। नए नियमों के अनुसार आवासीय परियोजनाओं में कुल क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत और गैर-आवासीय परियोजनाओं में 10 प्रतिशत हिस्सा पार्कों के लिए सुरक्षित रखना होगा।
हालांकि 3000 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाली परियोजनाओं के लिए अलग से पार्क विकसित करने की बाध्यता नहीं होगी। इससे अधिक क्षेत्रफल वाली योजनाओं में पार्क और हरित क्षेत्र के लिए भूमि आरक्षित करना अनिवार्य रहेगा।
निवेश को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि नई भवन उपविधियां लागू होने के बाद प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति मिलेगी। इससे एमएसएमई, डाटा सेंटर, औद्योगिक पार्क और आवासीय परियोजनाओं के विकास में तेजी आएगी तथा निवेशकों को बेहतर और लचीला नियामकीय ढांचा उपलब्ध होगा।



