न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़ :-उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। राज्य में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकाइयों को सरकारी जमीन खरीदने पर अधिकतम 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाएगा। हालांकि तय समय सीमा में परियोजना पूरी न होने पर अनुदान की राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वसूली जाएगी। कैबिनेट से मंजूर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में इस प्रावधान को शामिल किया गया है।
क्षेत्रवार तय हुई अनुदान की दर
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में GCC इकाइयों को अलग-अलग दरों पर भूमि अनुदान दिया जाएगा। पूर्वांचल और बुंदेलखंड में स्थापित पात्र इकाइयों को सबसे अधिक, यानी 50 प्रतिशत तक का अनुदान मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे इन पिछड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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वहीं गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में GCC इकाइयों को 30 प्रतिशत तक भूमि अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा पश्चिमांचल (गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को छोड़कर) और मध्यांचल क्षेत्र में स्थापित होने वाली इकाइयों को 40 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिलेगा।
समय पर परियोजना पूरी करना होगा जरूरी
सरकार ने साफ किया है कि अनुदान लेने वाली इकाइयों को निर्धारित समय के भीतर परियोजना पूरी करनी होगी। जब तक वाणिज्यिक संचालन शुरू नहीं हो जाता या तय अवधि पूरी नहीं होती, तब तक दी गई भूमि संबंधित सरकारी निकाय के पास बंधक रहेगी। यदि तय समय में परियोजना पूरी नहीं हुई, तो भूमि अनुदान की राशि 12 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वसूली जाएगी। इस अनुदान पर होने वाला खर्च औद्योगिक विकास विभाग वहन करेगा।
केवल सरकारी भूमि पर ही मिलेगा लाभ
भूमि अनुदान का लाभ सिर्फ उन्हीं GCC इकाइयों को दिया जाएगा, जो राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण, विकास प्राधिकरण, शहरी निकाय या किसी अन्य सरकारी एजेंसी से जमीन खरीदेंगी। किराये के भवन, को-वर्किंग स्पेस या निजी परिसर में संचालित इकाइयों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है—सरकारी भूमि के माध्यम से औद्योगिक विकास को गति देना और प्रदेश में निवेश को आकर्षित करना।



