Saturday, May 9, 2026

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लखनऊ में पल्लवी पटेल ने इंजन पर चढ़कर रोकी ट्रेन; UGC नियम लागू करने की मांग तेज

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शनिवार को जोरदार राजनीतिक प्रदर्शन का केंद्र बनी रही। सिराथू से विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल हजारों समर्थकों के साथ सड़क पर उतरीं और यूजीसी के नए नियम लागू करने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया।

पल्लवी पटेल ने विधानसभा कूच का ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने चारबाग रेलवे स्टेशन के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए और प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए चारबाग स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 तक पहुंच गए।

ट्रेन के इंजन पर चढ़ीं पल्लवी पटेल

प्रदर्शन के दौरान पल्लवी पटेल समर्थकों के साथ ट्रेन के इंजन पर चढ़ गईं और जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए रेगुलेशन को तत्काल लागू करने की मांग उठाई।

पल्लवी पटेल ने कहा कि पिछले तीन महीनों से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है और अब सरकार व न्यायपालिका से जवाब मांगा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्ग के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।

पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच घंटों टकराव

चारबाग स्टेशन पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लंबे समय तक धक्का-मुक्की और नारेबाजी चलती रही। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने पल्लवी पटेल समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों के जरिए इको गार्डन भेज दिया।

प्रदर्शन में शामिल एक कार्यकर्ता ने कहा कि जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उसने कहा कि “आज ट्रेन रोकी है, जरूरत पड़ी तो हवाई जहाज भी रोकेंगे।”

पुलिस से भी हुई तीखी बहस

विधानसभा की ओर बढ़ने के दौरान पल्लवी पटेल की पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियम सामाजिक न्याय के लिए जरूरी हैं और इन्हें लागू करवाने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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पल्लवी पटेल ने कहा कि यदि मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो सरकार को सही तरीके से पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ वर्गों के विरोध के बावजूद उनकी पार्टी इन नियमों का समर्थन करती रहेगी।

क्या हैं UGC के नए नियम?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी 2026 को ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ नाम से नया नोटिफिकेशन जारी किया था।

इन नियमों के तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीम बनाने का प्रावधान किया गया था। इन समितियों का काम अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी छात्रों की शिकायतों का निस्तारण करना था।

हालांकि इन नियमों का कई जगह विरोध भी हुआ। विरोध करने वाले छात्रों का कहना था कि इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभाव बढ़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के इन नए नियमों पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी। फिलहाल मामला न्यायालय में लंबित है।

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