Ram Mandir News:- अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ी याचिकाओं पर आज (13 जुलाई) सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। माना जा रहा है कि अदालत आज जांच की दिशा और आगे की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण फैसला या निर्देश दे सकती है।
इससे पहले 29 जून को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि इसमें इतनी जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है। अब सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
CJI सूर्यकांत की पीठ करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की सूची के अनुसार, CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी।
मामले में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं जिनमे नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव और राजद सांसद सुधाकर सिंह शामिल है| इन सभी याचिकाओं में मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
CBI जांच, CAG ऑडिट और फोरेंसिक ऑडिट की मांग
याचिकाओं में अलग-अलग स्तर पर कई मांगें रखी गई हैं।
- पूरे मामले की CBI जांच
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से वित्तीय ऑडिट
- मंदिर ट्रस्ट के खातों का फोरेंसिक ऑडिट
- विशेषज्ञों की SIT गठित कर विस्तृत जांच
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
नियामक व्यवस्था बनाने की भी मांग
याचिकाओं में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को ऐसा निगरानी एवं ऑडिट सिस्टम विकसित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है, जिससे भविष्य में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता की आशंका न रहे।
बिना FIR जांच शुरू होने पर उठे सवाल
याचिकाओं में यह भी दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने बिना किसी नियमित एफआईआर दर्ज किए ही जांच शुरू कर दी, जिस पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्र एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराने की मांग दोहराई है।
ट्रस्ट की भूमिका भी चर्चा में
राम मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन का निर्देश दिया था। मंदिर के संचालन और चढ़ावे के प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास है। ऐसे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।
हालांकि, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पहले आरोपों से इनकार किया था, जबकि मामले की जांच को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस लगातार जारी है।
अखिलेश यादव ने उठाए थे सवाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सबसे पहले सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे को उठाया था। बाद में उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी और उसके प्रमुख की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। वहीं, सरकार की ओर से गठित एसआईटी अपनी प्रारंभिक जांच जारी रखे हुए है।
नोट: मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।



