नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- देश में नए राजनीतिक प्रयोगों के बीच पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू ने एक नए राजनीतिक संगठन ‘इश्क करो पार्टी’ (IKP) की घोषणा की है। उन्होंने पार्टी के लिए सदस्यता अभियान शुरू करने का दावा करते हुए लोगों से जुड़ने की अपील की है। साथ ही उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं।
इश्क करो पार्टी में शामिल होने का आह्वान
सोशल मीडिया पर जारी संदेश में मार्कंडेय काटजू ने कहा कि जो लोग CJP से जुड़े हैं, वे अपना समय वहां बर्बाद करने के बजाय इश्क करो पार्टी से जुड़ें। उन्होंने बताया कि पार्टी जल्द ही अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शुरू करेगी। काटजू ने खुद को पार्टी का संरक्षक बताया और सदस्यता के लिए संपर्क विवरण भी साझा किया।
अभिजीत दीपके की मांगों पर उठाए सवाल
काटजू ने कहा कि केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उनका कहना था कि यदि किसी मंत्री का इस्तीफा हो भी जाए तो उसकी जगह दूसरा व्यक्ति आ जाएगा, इसलिए मूल समस्याओं पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
पदाधिकारियों की भी घोषणा
पूर्व जज ने दावा किया कि पार्टी में शामिल होने वाले लोगों को संगठन में जिम्मेदारियां भी दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष इरफान अली हैं और योग्य सदस्यों को उपाध्यक्ष जैसे पदों पर भी नियुक्त किया जा सकता है।
बेरोजगारी और गरीबी जैसे मुद्दों पर फोकस
मार्कंडेय काटजू के अनुसार, इश्क करो पार्टी का मुख्य उद्देश्य देश में बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी है CJP का आंदोलन
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
दीपके ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में देश की राजनीति वास्तविक मुद्दों से भटक गई है और बेरोजगारी जैसे गंभीर विषयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
हाल के दिनों में NEET परीक्षा और CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे विवादों के बीच यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।



