न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- ब्रजभूमि में पुरुषोत्तम मास के दौरान चल रही चौरासी कोस परिक्रमा के बीच एक सास-बहू की अनोखी कहानी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रही है। हरियाणा की लोक गायिका काजल चौधरी अपनी 95 वर्षीय सास को प्लास्टिक के टब में बैठाकर सिर पर उठाए हुए पूरे श्रद्धाभाव के साथ ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा कर रही हैं।
करीब 267 किलोमीटर लंबे इस धार्मिक मार्ग पर काजल रोजाना कई किलोमीटर पैदल चल रही हैं। उनकी इस अनूठी सेवा और समर्पण को देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। परिक्रमा मार्ग पर यह सास-बहू की जोड़ी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
सास की अधूरी इच्छा को बनाया अपना संकल्प
जानकारी के अनुसार, काजल चौधरी ने 31 मई को हरियाणा के पलवल क्षेत्र स्थित दाऊजी मंदिर से अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। हाल ही में वह गोवर्धन क्षेत्र के समीप कौथारा गांव पहुंचीं, जो परिक्रमा का प्रमुख पड़ाव माना जाता है।
काजल का कहना है कि उनकी सास लंबे समय से ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा करना चाहती थीं। हालांकि बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उनके लिए पैदल यात्रा करना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने सास की इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया और उन्हें अपने साथ लेकर परिक्रमा पर निकल पड़ीं।
लोगों ने बताया कठिन, लेकिन नहीं छोड़ा हौसला
काजल के मुताबिक, जब उन्होंने यह निर्णय लिया तो कई लोगों ने उन्हें समझाया कि इतनी लंबी दूरी तक किसी बुजुर्ग को सिर पर बैठाकर ले जाना बेहद कठिन होगा। लेकिन उन्होंने इसे सेवा, सम्मान और भक्ति का माध्यम मानते हुए अपना संकल्प जारी रखा।
उन्होंने बताया कि यात्रा के शुरुआती दिनों में वह प्रतिदिन 40 से 45 किलोमीटर तक पैदल चलीं। हालांकि अब श्रद्धालुओं से मुलाकात और स्वागत कार्यक्रमों के कारण उनकी रफ्तार कुछ कम हो गई है।
परिक्रमा मार्ग पर मिल रहा सम्मान
काजल चौधरी का कहना है कि यात्रा के दौरान उन्हें लोगों का भरपूर स्नेह और समर्थन मिल रहा है। जहां भी वे पहुंचती हैं, बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनसे मिलने आते हैं और उनकी सेवा भावना की सराहना करते हैं।
कई लोग इस यात्रा को भक्ति, त्याग और पारिवारिक मूल्यों का अनूठा उदाहरण बता रहे हैं। श्रद्धालु सास-बहू की इस जोड़ी को देखकर भावुक भी हो रहे हैं और आशीर्वाद दे रहे हैं।
सेवा और सम्मान का संदेश
काजल का कहना है कि इससे पहले भी वह लगभग एक दशक पहले ब्रज परिक्रमा कर चुकी हैं, लेकिन इस बार का अनुभव बिल्कुल अलग है। उनके अनुसार, यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं बल्कि परिवार के बुजुर्गों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भी संदेश देती है।
ब्रजभूमि में चल रही यह अनोखी यात्रा अब श्रद्धा के साथ-साथ रिश्तों में प्रेम, सम्मान और समर्पण की मिसाल के रूप में भी देखी जा रही है। सास की इच्छा पूरी करने के लिए बहू का यह प्रयास लोगों को प्रेरित कर रहा है।



