न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार के चर्चित शिक्षक और कोचिंग संचालक खान सर की कानूनी परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके कोचिंग संस्थान से जुड़े सुरक्षा कर्मियों द्वारा कथित फायरिंग के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने जांच और कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में खान सर के खिलाफ भी गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज होने की चर्चा है, जिसके बाद उनकी संभावित गिरफ्तारी को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने शुक्रवार रात विभिन्न संभावित ठिकानों पर छापेमारी की, लेकिन खान सर का पता नहीं चल सका। इस बीच यह भी चर्चा है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वे अदालत की शरण ले सकते हैं और कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
कोचिंग सेंटर के बाहर जुटे छात्र
घटना के बाद से खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर छात्रों की आवाजाही बढ़ गई है। देर रात तक बड़ी संख्या में छात्र परिसर के आसपास मौजूद रहे। हालात को देखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
फायरिंग वीडियो के बाद बदला मामला
बताया जा रहा है कि गुरुवार को हुए विवाद के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर सुरक्षा कर्मी फायरिंग करते दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो सुरक्षा गार्डों को हिरासत में लिया। पूछताछ के आधार पर आगे की जांच जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जुटा रही साक्ष्य
पटना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की समीक्षा के लिए बैठक भी की है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और आधिकारिक रूप से किसी संभावित गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है।
अफवाहों का दौर भी जारी
शुक्रवार रात सोशल मीडिया पर खान सर की गिरफ्तारी को लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैलती रहीं, हालांकि पुलिस की ओर से ऐसी किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। मामले को लेकर छात्रों और समर्थकों के बीच लगातार चर्चा बनी हुई है।
नोट: मामले की जांच जारी है। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगे आरोप तब तक आरोप ही माने जाते हैं, जब तक अदालत या जांच एजेंसी द्वारा उन्हें प्रमाणित न कर दिया जाए।



