नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद सियासी और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। सरकार जहां इस डील को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर बता रही है, वहीं किसान संगठनों और विपक्ष ने इसे किसानों के हितों के खिलाफ करार दिया है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उनके मुताबिक यह ट्रेड डील भारत के कई सेक्टरों के लिए “गेम-चेंजर” साबित होगी। हालांकि इन दावों के बावजूद किसान संगठनों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
ट्रेड डील पर संयुक्त किसान मोर्चा का तीखा विरोध
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कड़ा ऐतराज जताया है। एसकेएम ने इसे किसानों के साथ “ऐतिहासिक विश्वासघात” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में झुकने का आरोप लगाया।
किसान संगठन ने एक बयान में प्रधानमंत्री के पिछले स्वतंत्रता दिवस भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि लाल किले से किसानों के हितों की रक्षा का जो वादा किया गया था, यह समझौता उस भरोसे को तोड़ने जैसा है।
‘अमेरिकी कृषि उत्पादों से भर जाएगा भारतीय बाजार’
एसकेएम का दावा है कि इस समझौते के जरिए अमेरिका को अपने भारी सब्सिडी वाले कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में उतारने का रास्ता मिल जाएगा। संगठन का कहना है कि इससे देश का कृषि और डेयरी सेक्टर बुरी तरह प्रभावित होगा।
2020-21 के किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले एसकेएम ने कहा कि अमेरिकी उत्पादों पर शून्य प्रतिशत आयात शुल्क की अनुमति देना किसानों और आम जनता के साथ सीधा विश्वासघात है। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी दबाव के आगे झुक गई है, जिसका खामियाजा देश के किसान वर्ग को भुगतना पड़ेगा।
क्या खेती और डेयरी सुरक्षित हैं?
सरकार ने साफ किया है कि अनाज, मक्का, सोयाबीन और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) खाद्य उत्पादों को इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते से बाहर रखा जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक किसानों और पशुपालन से जुड़े लोगों के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है।
सरकार का दावा है कि कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इस समझौते से सीधा लाभ मिलेगा, जिससे रोजगार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
टैरिफ में राहत, MSMEs को फायदा
इस व्यापार समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ है। इससे भारतीय MSMEs और निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अमेरिका पर लगाए गए शुल्क को शून्य तक ले जाएगा और ऊर्जा समेत 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा।
आयात और निवेश के आंकड़ों पर सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का 500 अरब डॉलर का दावा फिलहाल आंकड़ों से मेल नहीं खाता। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल वस्तु आयात लगभग 721 अरब डॉलर रहा है। अनुमान है कि आने वाले पांच वर्षों में अमेरिका से भारत का सालाना आयात करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष लगभग 46 अरब डॉलर था।
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भारत मुख्य रूप से अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी, हाई-वैल्यू चिप्स, डेटा सेंटर उपकरण, विमान व उनके पुर्जे और परमाणु उपकरणों का आयात बढ़ा सकता है।
चरणबद्ध लागू होंगी टैरिफ रियायतें
सरकार ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका को दी जाने वाली कुछ टैरिफ छूट चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी। कई उत्पादों को आयात कोटा के तहत अनुमति दी जा सकती है, जैसा कि भारत ने हाल में यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ किए गए समझौतों में किया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उम्मीद जताई है कि पिछले साल अमेरिकी टैरिफ के कारण प्रभावित हुए भारतीय निर्यात में अब तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों ने नए बाजारों में अपनी जगह बनाई है और अमेरिकी बाजार में दोबारा पहुंच से निर्यात को और मजबूती मिलेगी।
फिलहाल दोनों देशों के अधिकारी संयुक्त बयान को अंतिम रूप देने में जुटे हैं और यह व्यापार समझौता आने वाले हफ्तों में पूरी तरह लागू होने की संभावना है।



