वो नेता जो शायद ही कभी सत्ता से बाहर हुआ: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का दबदबा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार उन चुनिंदा नेताओं में रहे हैं, जिनकी मौजूदगी सत्ता के केंद्र में लगभग लगातार बनी रही। उपमुख्यमंत्री पद पर कई बार रिकॉर्ड बनाने वाले अजित पवार को राज्य के सबसे प्रभावशाली और रणनीतिक राजनेताओं में गिना जाता है।

बारामती से उनका राजनीतिक रिश्ता केवल चुनावी नहीं, बल्कि पहचान का हिस्सा रहा है। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से अपने भतीजे युगेंद्र पवार को हराकर जीत दर्ज की थी। इससे पहले भी वे लगातार कई बार इस सीट से विधायक चुने जाते रहे।

राजनीति विरासत में, पकड़ मेहनत से

22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार ने कम उम्र में ही राजनीति की राह पकड़ ली थी। महज 23 साल की उम्र में वे एक कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में पहुंचे। इसके बाद 1991 में पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और करीब 16 वर्षों तक इस पद पर रहे।

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1991 में वे पहली बार बारामती से सांसद चुने गए। 1995 में विधानसभा चुनाव लड़कर उन्होंने राज्य की सक्रिय राजनीति में एंट्री की और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2024 तक वे लगातार सात बार विधायक चुने जा चुके थे।

मुख्यमंत्री की कुर्सी दूर रही

हालांकि अजित पवार कई बार उपमुख्यमंत्री बने और सत्ता के केंद्र में रहे, लेकिन मुख्यमंत्री पद उन्हें कभी नहीं मिल सका। इसके बावजूद उनकी प्रशासनिक पकड़ और राजनीतिक प्रभाव को लेकर यह धारणा बनी रही कि वे शायद ही कभी सत्ता से बाहर होते हैं।

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