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आज का राशिफल 20 अप्रैल 2026: शुक्र-चंद्रमा के शुभ संयोग से धन लाभ के योग, प्रेम संबंधों में आएगी मजबूती

20 अप्रैल 2026 का दिन ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण काफी शुभ संकेत दे रहा है। सूर्य मेष राशि में उच्च के होकर स्थित हैं, जिससे ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। वहीं, शुक्र अपनी ही राशि में चंद्रमा के साथ विराजमान हैं और चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में होने से यह योग बेहद शुभ माना जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव विशेष रूप से प्रेम, दाम्पत्य और भौतिक सुख-सुविधाओं पर पड़ेगा।

गुरु मिथुन राशि में शुभ स्थिति में हैं, जबकि राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में स्थित हैं। हालांकि बुध, मंगल और शनि का मीन राशि में संयोग थोड़ा चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बाकी ग्रहों की मजबूत स्थिति के कारण कुल मिलाकर दिन लाभकारी रहने वाला है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का हाल:

मेष राशि

ऊर्जा में बढ़ोतरी होगी और आप पूरे उत्साह के साथ काम करेंगे। धन आगमन के योग हैं और करियर में प्रगति मिलेगी। परिवार में भी सकारात्मक माहौल रहेगा। स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार सभी पक्ष मजबूत रहेंगे।

वृषभ राशि

आपका आकर्षण बढ़ेगा और लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे। आवश्यक संसाधन आसानी से मिलेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य और व्यापार दोनों अच्छे रहेंगे।

मिथुन राशि

खर्चों में बढ़ोतरी से मन थोड़ा परेशान रह सकता है। प्रेम और संतान से दूरी महसूस हो सकती है, लेकिन व्यापारिक स्थिति संतोषजनक रहेगी।

कर्क राशि

आय के नए स्रोत बनेंगे और पुराने निवेश से भी लाभ मिलेगा। यात्रा से फायदा होगा। जीवन के सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

सिंह राशि

कानूनी मामलों में सफलता मिल सकती है। करियर और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा है। पिता का सहयोग मिलेगा और व्यापार में उन्नति होगी।

कन्या राशि

भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और यात्रा लाभकारी साबित होगी। जीवन में संतुलन और खुशी बनी रहेगी।

तुला राशि

थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। चोट या विवाद की संभावना हो सकती है। हालांकि प्रेम और व्यापार में स्थिति सामान्य से अच्छी रहेगी।

वृश्चिक राशि

प्रेम संबंध मजबूत होंगे और विवाह के योग बन सकते हैं। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। व्यापार में भी अच्छे अवसर मिलेंगे।

धनु राशि

स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। रिश्तों में थोड़ी अनबन हो सकती है। है। विपरीत लिंगी संबंधों में थोड़ी सी कहासुनी या थोड़ा ऑकवर्ड सिचुएशन (अजीब स्थिति) हो सकती है। प्रेम-संतान बहुत अच्छा नहीं है। व्यापार अच्छा है, स्वास्थ्य मध्यम है।

मकर राशि

विद्यार्थियों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए समय बेहद अनुकूल है। प्रेम और पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी।

कुंभ राशि

भूमि, भवन या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और परिवार में सुख-शांति रहेगी। स्वास्थ्य अच्छा, प्रेम-संतान अच्छा और व्यापार भी अच्छा रहेगा।

मीन राशि

आपके प्रयास सफल होंगे और व्यापार में लाभ मिलेगा। अपनों का सहयोग मिलेगा, हालांकि स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।

यूपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट जल्द, छात्रों का इंतजार खत्म होने वाला- यहां से मार्कशीट कर सकेंगे डाउनलोड

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) के 10वीं और 12वीं के छात्रों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम जल्द घोषित किए जा सकते हैं। इस साल करीब 52 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट 25 अप्रैल के आसपास जारी होने की संभावना है। हालांकि, बोर्ड की ओर से अभी तक आधिकारिक तारीख और समय की पुष्टि नहीं की गई है।

छात्र अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट्स जैसे

  • upresults.nic.in
  • upmsp.edu.in
  • results.upmsp.edu.in
    पर जाकर रोल नंबर के जरिए आसानी से चेक कर सकेंगे।

डिजिलॉकर पर मिलेगी डिजिटल मार्कशीट

रिजल्ट जारी होने के साथ ही छात्रों की डिजिटल मार्कशीट भी DigiLocker पर उपलब्ध कराई जाएगी। यह मार्कशीट पूरी तरह वेरीफाइड और डिजिटल सिग्नेचर के साथ होगी, जिसमें क्यूआर कोड भी शामिल रहेगा। ऑफलाइन मार्कशीट और सर्टिफिकेट बाद में संबंधित स्कूलों के माध्यम से छात्रों को दिए जाएंगे।

कॉपी जांच का काम पूरा

यूपी बोर्ड की ओर से उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। फिलहाल बोर्ड रिजल्ट को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। जैसे ही शासन से अनुमति मिलेगी, नतीजों की घोषणा कर दी जाएगी।

आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, महिला आरक्षण पर हो सकती है बड़ी बात

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रधानमंत्री Narendra Modi आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। यह संबोधन ऐसे समय हो रहा है जब लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में महिला आरक्षण और संसद में हुई हालिया घटनाओं पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं।
शुक्रवार को लोकसभा में ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ को आवश्यक समर्थन नहीं मिल पाया। इस विधेयक के तहत परिसीमन प्रक्रिया के बाद 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था। साथ ही लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की भी योजना शामिल थी।
विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, लेकिन मतदान के दौरान 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। कुल 528 वोटों में से विधेयक को पास कराने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी, जो पूरी नहीं हो सकी।
इस बीच कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि महिला आरक्षण को लेकर उसका रुख हमेशा स्पष्ट रहा है। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर बार-बार अपना रुख बदल रही है।
कांग्रेस का कहना है कि उसने अपने 2024 के चुनावी घोषणापत्र में महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने का वादा किया था और परिसीमन से इसे जोड़ने का विरोध किया था।
प्रधानमंत्री का आज का संबोधन इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच काफी अहम माना जा रहा है, जिसमें महिला आरक्षण, परिसीमन और संसद की कार्यवाही जैसे मुद्दों पर सरकार का पक्ष सामने आ सकता है।

अक्षय तृतीया से पहले सोने-चांदी में जबरदस्त उछाल, 10 साल में गोल्ड 400% महंगा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- अक्षय तृतीया 2026 से पहले सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने निवेशकों को बड़ा फायदा दिया है। पिछले 10 सालों में गोल्ड और सिल्वर दोनों की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली है।

Indian Bullion and Jewellers Association के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में अक्षय तृतीया के समय 10 ग्राम सोने का भाव करीब 30,100 रुपये था, जो अब बढ़कर 1,51,358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। इस तरह एक दशक में सोने की कीमत में करीब 400% का उछाल दर्ज किया गया है।

अगर किसी निवेशक ने 2016 में 10,000 रुपये का निवेश किया होता, तो उसकी वैल्यू आज लगभग 45,000 रुपये तक पहुंच जाती।

चांदी ने भी दिया जोरदार रिटर्न

चांदी की कीमतों में भी पिछले 10 सालों में भारी बढ़ोतरी हुई है। 2016 में जहां 1 किलो चांदी का रेट 41,200 रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 2,47,930 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। यानी चांदी में करीब 2,06,730 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है।

एक साल में 50% तक उछला सोना

सिर्फ लंबी अवधि ही नहीं, बल्कि पिछले एक साल में भी सोने ने शानदार रिटर्न दिया है। 2025 की अक्षय तृतीया पर जहां गोल्ड का भाव 95,500 रुपये प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह 1.51 लाख रुपये के आसपास पहुंच चुका है। यानी एक साल में 50% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली है।

आज का गोल्ड रेट (प्रति 10 ग्राम)

  • 24 कैरेट: ₹1,51,358
  • 23 कैरेट: ₹1,50,752
  • 22 कैरेट: ₹1,38,644
  • 18 कैरेट: ₹1,13,519
  • 14 कैरेट: ₹88,544

हालांकि, हाल के दिनों में कीमतों में हल्की गिरावट भी आई है। 16 अप्रैल को सोने का भाव 1,53,305 रुपये था, जो अब करीब 2,000 रुपये घट चुका है।

रिकॉर्ड हाई से क्यों टूटा सोना?

इस साल एक समय सोने की कीमत 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चली गई थी, लेकिन वहां से गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर के मजबूत होने और निवेशकों की मुनाफावसूली की वजह से गोल्ड की कीमतों पर दबाव आया है।

निष्कर्ष:
अक्षय तृतीया जैसे शुभ मौके पर सोने-चांदी में निवेश परंपरा के साथ-साथ एक मजबूत निवेश विकल्प भी साबित हुआ है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने से निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

सोमवार को संसद बुलाकर पुराना बिल लाने की मांग, प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को दी चुनौती

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि सोमवार को संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए और वर्ष 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को दोबारा पेश किया जाए। उनका कहना है कि विपक्ष इस बिल का समर्थन करने के लिए तैयार है।

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है और पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु के मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को महिला विरोधी बताना पूरी तरह गलत है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल ही में पेश किया गया संविधान संशोधन विधेयक देश के संघीय ढांचे को प्रभावित करने की कोशिश था। उनके अनुसार, लोकसभा में इस विधेयक का पारित न हो पाना लोकतंत्र और संविधान की जीत है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah के बयानों से सरकार की मंशा साफ हो गई थी। उनका आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिए परिसीमन प्रक्रिया में मनमानी करना चाहती थी, ताकि जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज किया जा सके।

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि यह सिर्फ महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि इसके पीछे परिसीमन से जुड़ा बड़ा एजेंडा था। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की एकजुटता के कारण सरकार को झटका लगा है और यह लोकतंत्र के लिए जरूरी था।

भाजपा पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी खुद को महिलाओं का हितैषी साबित करना चाहती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने हाथरस, उन्नाव और महिला पहलवानों से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

ओबीसी आरक्षण की मांग को दोहराते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जिस तरह एससी और एसटी वर्ग को आरक्षण दिया गया है, उसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी उनकी संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

लोकसभा में क्या हुआ था:

शुक्रवार को लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। इसके साथ पेश किए गए परिसीमन विधेयक और अन्य संबंधित प्रस्तावों पर भी आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी।

इस मुद्दे को लेकर अब सियासत और तेज होने के आसार हैं।

राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता के खिलाफ FIR का अपना ही आदेश हाईकोर्ट ने रोका

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर नया मोड़ आ गया है। Allahabad High Court की लखनऊ बेंच ने अपने ही ओपन कोर्ट में दिए गए एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।
अदालत के शनिवार को अपलोड किए गए आदेश के अनुसार, सुनवाई के दौरान याची और केंद्र व राज्य सरकार के वकीलों से पूछा गया था कि क्या इस मामले में विपक्षी पक्ष (राहुल गांधी) को नोटिस जारी करना आवश्यक है। इस पर अधिवक्ताओं ने नोटिस की जरूरत नहीं बताई, जिसके बाद कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया।
हालांकि आदेश टाइप और हस्ताक्षरित होने से पहले न्यायमूर्ति Subhash Vidyarthi ने वर्ष 2014 के एक पूर्ण पीठ के फैसले का संज्ञान लिया। उस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि एफआईआर दर्ज कराने की मांग खारिज होने के बाद दायर पुनरीक्षण याचिका में प्रस्तावित आरोपी को नोटिस देना अनिवार्य है।
इसी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि बिना नोटिस दिए मामले का निस्तारण करना उचित नहीं होगा। इसलिए पूर्व आदेश पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 20 अप्रैल तय की गई है।
यह मामला कर्नाटक निवासी याची एस. विग्नेश शिशिर की याचिका से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी पर Bharatiya Nyaya Sanhita, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। याची ने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।
गौरतलब है कि यह शिकायत पहले रायबरेली की विशेष अदालत में दाखिल की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। बाद में मामला लखनऊ ट्रांसफर हुआ और विशेष अदालत ने जनवरी 2026 में याचिका खारिज कर दी। अब उसी के खिलाफ उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: भारतीय तेल टैंकर पर ईरानी फायरिंग, पीछे हटे दो जहाज…

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:– ओमान के उत्तरी समुद्री क्षेत्र में एक भारतीय तेल टैंकर पर ईरान की नौसेना द्वारा कथित फायरिंग की घटना सामने आई है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक, इस टैंकर में करीब 20 लाख बैरल इराकी कच्चा तेल लदा हुआ था। घटना से ठीक पहले दो भारतीय जहाजों को Strait of Hormuz से लौटने के लिए मजबूर किया गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना में ‘जग अर्णव’ और ‘सनमार हेराल्ड’ नाम के दो जहाज शामिल थे। शुरुआती जानकारी बताती है कि ‘जग अर्णव’ पर फायरिंग की गई, जबकि पास मौजूद ‘सनमार हेराल्ड’ को निशाना नहीं बनाया गया और वह सुरक्षित रहा। इस घटना ने समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
भारतीय नौसेना इस पूरे मामले की जांच में जुटी है। फिलहाल Strait of Hormuz में भारतीय नौसेना की सीधी मौजूदगी नहीं है, लेकिन Gulf of Oman में भारत के दो डेस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक टैंकर तैनात हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस फायरिंग को Islamic Revolutionary Guard Corps से जोड़कर देखा जा रहा है और भारत इस घटनाक्रम को गंभीरता से ले रहा है।
गौरतलब है कि Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। भारत भी इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।
मौजूदा हालात में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर इस क्षेत्र में साफ नजर आ रहा है। हालांकि, ईरान ने भारत को मित्र देशों की सूची में रखा है और भारतीय जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जा रही है, जबकि अन्य देशों के जहाजों को कथित तौर पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की चेतावनी दी जा रही है।

अखिलेश यादव के चाय पीने के बाद दुकान पर छापा? फतेहपुर में कार्रवाई से सियासत तेज, विभाग ने दी सफाई

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक चाय की दुकान पर हुई खाद्य विभाग की कार्रवाई ने सियासी रंग ले लिया है। मामला सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के चौकी चौराहे का है, जहां एक स्थानीय दुकानदार की दुकान पर निरीक्षण के बाद विवाद खड़ा हो गया।

बताया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 20 फरवरी को इस चाय की दुकान पर रुककर चाय पी थी। इसके बाद 15 अप्रैल को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने दुकान का निरीक्षण किया और चायपत्ती का नमूना जांच के लिए भेज दिया।

इस कार्रवाई के बाद आरोप लगने लगे कि यह कदम अखिलेश यादव को चाय पिलाने की वजह से उठाया गया है, जिससे राजनीतिक माहौल गर्मा गया।

विभाग ने क्या कहा?

खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त राजेश दीक्षित ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

उनका कहना है कि यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई थी, जो 1 अप्रैल को आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से दर्ज कराई गई थी। शिकायत में चाय पत्ती में मिलावट की आशंका जताई गई थी।

अधिकारी के अनुसार:

  • दुकान का वैध लाइसेंस 2028 तक मान्य है
  • विभाग के पास सीधे दुकान सीज करने का अधिकार नहीं है
  • उसी दिन अन्य दुकानों पर भी नियमित जांच अभियान चलाया गया

क्यों गरमाई सियासत?

कार्रवाई के समय और पृष्ठभूमि को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो सकती है।

हालांकि प्रशासन लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि जांच पूरी तरह नियमों के तहत और शिकायत के आधार पर की गई है।

महिला आरक्षण बिल पर सियासी घमासान, प्रियंका गांधी ने सरकार को दी पुराने कानून को लागू करने की चुनौती

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:– लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद महिला आरक्षण को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार गंभीर है, तो 2023 में पारित कानून को लागू करे।

प्रियंका गांधी ने कहा कि जिस महिला आरक्षण विधेयक को सभी दलों की सहमति से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, उसे दोबारा लागू करने के लिए सरकार संसद में पेश करे। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार सोमवार को सदन चलाए और पुराना विधेयक लाए, तो विपक्ष पूरा समर्थन देने को तैयार है।

क्या हुआ संसद में?

लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक (131वां संशोधन) 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया।

मतों के विभाजन में:

  • समर्थन में: 298 वोट
  • विरोध में: 230 वोट
  • कुल मतदान: 528

हालांकि, बिल पास होने के लिए आवश्यक संख्या पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हुआ।

सरकार vs विपक्ष: आरोप-प्रत्यारोप

विधेयक गिरने के बाद सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया। पार्टी का कहना है कि विपक्ष महिलाओं को 33% आरक्षण नहीं देना चाहता।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि इससे जुड़े अन्य विधेयकों को भी फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उन्हें राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

विपक्ष का क्या कहना है?

विपक्षी दलों ने सरकार पर बिना पर्याप्त चर्चा के बिल पेश करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहले ही सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक केवल चुनावी समीकरण बदलने के लिए लाया गया था।

वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर महिलाओं को 50% आरक्षण देने का प्रस्ताव लाया जाए, तो विपक्ष तुरंत समर्थन करेगा।

आरक्षण में आरक्षण पर विवाद

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव में पिछड़ी जातियों की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

उन्होंने चिंता जताई कि इससे ओबीसी और अन्य पिछड़े वर्ग की महिलाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा और इसका फायदा मुख्य रूप से सवर्ण वर्ग की महिलाओं को मिल सकता है।

महिला आरक्षण बिल भले गिरा, लेकिन 2029 में लागू होने की उम्मीद कायम; जानें आगे क्या विकल्प

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:– संसद में शुक्रवार को पेश किया गया 131वां संविधान संशोधन विधेयक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके चलते यह पारित नहीं हो पाया। हालांकि, इस असफलता का मतलब यह नहीं है कि महिला आरक्षण की प्रक्रिया खत्म हो गई है।

दरअसल, वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम अभी भी प्रभावी है और इसके तहत 2029 के आम चुनावों में महिला आरक्षण लागू होने की संभावना बनी हुई है।

सरकार का 131वां संशोधन बिल सीटों की संख्या बढ़ाकर आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से लाया गया था। इसमें 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। इसके गिरने से सिर्फ सीट विस्तार की योजना पर फिलहाल रोक लगी है, जबकि महिला आरक्षण का मूल प्रावधान सुरक्षित है।

2029 में कैसे लागू हो सकता है आरक्षण?

महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान में जोड़ा गया अनुच्छेद 334A दो प्रमुख शर्तें तय करता है—

  • नई जनगणना का आयोजन
  • जनगणना के आधार पर परिसीमन (Delimitation)

यदि ये दोनों प्रक्रियाएं 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरी हो जाती हैं, तो महिला आरक्षण लागू करने में कोई कानूनी अड़चन नहीं रहेगी।

सरकार के पास क्या हैं विकल्प?

सरकार के सामने अभी भी कुछ संवैधानिक रास्ते खुले हुए हैं—

  • अनुच्छेद 334A में संशोधन: परिसीमन की शर्त हटाकर मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू किया जा सकता है।
  • अनुच्छेद 82 का उपयोग: 2026 के बाद परिसीमन पर लगी रोक हट सकती है, जिससे सीटों का पुनर्गठन संभव होगा।

अभी भी खुला है राजनीतिक रास्ता

संसद में परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े अन्य विधेयक अभी लंबित हैं। सरकार ने इन्हें वापस नहीं लिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इन्हें मौजूदा लोकसभा कार्यकाल में फिर से पेश किया जा सकता है।

अगर ऐसा होता है, तो परिसीमन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है और आरक्षण लागू करने का रास्ता और साफ हो जाएगा।

क्या हैं चुनौतियां?

तकनीकी रूप से रास्ता खुला होने के बावजूद कई बड़ी चुनौतियां सामने हैं—

  • लोकसभा सीटों की सीमा बढ़ाने के लिए फिर से दो-तिहाई बहुमत जरूरी
  • जनसंख्या आधारित सीट पुनर्गठन पर राजनीतिक विवाद
  • उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद

हालांकि, अगर सरकार सीटों की संख्या बढ़ाए बिना केवल सीमांकन (delimitation) करती है, तो विपक्ष के साथ सहमति बनने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।