Saturday, April 18, 2026

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सोमवार को संसद बुलाकर पुराना बिल लाने की मांग, प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार को दी चुनौती

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि सोमवार को संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए और वर्ष 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को दोबारा पेश किया जाए। उनका कहना है कि विपक्ष इस बिल का समर्थन करने के लिए तैयार है।

प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है और पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु के मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को महिला विरोधी बताना पूरी तरह गलत है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि हाल ही में पेश किया गया संविधान संशोधन विधेयक देश के संघीय ढांचे को प्रभावित करने की कोशिश था। उनके अनुसार, लोकसभा में इस विधेयक का पारित न हो पाना लोकतंत्र और संविधान की जीत है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah के बयानों से सरकार की मंशा साफ हो गई थी। उनका आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिए परिसीमन प्रक्रिया में मनमानी करना चाहती थी, ताकि जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज किया जा सके।

प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि यह सिर्फ महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि इसके पीछे परिसीमन से जुड़ा बड़ा एजेंडा था। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की एकजुटता के कारण सरकार को झटका लगा है और यह लोकतंत्र के लिए जरूरी था।

भाजपा पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी खुद को महिलाओं का हितैषी साबित करना चाहती है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने हाथरस, उन्नाव और महिला पहलवानों से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

ओबीसी आरक्षण की मांग को दोहराते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जिस तरह एससी और एसटी वर्ग को आरक्षण दिया गया है, उसी तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी उनकी संख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

लोकसभा में क्या हुआ था:

शुक्रवार को लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित नहीं हो सका। मतदान के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। इसके साथ पेश किए गए परिसीमन विधेयक और अन्य संबंधित प्रस्तावों पर भी आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी।

इस मुद्दे को लेकर अब सियासत और तेज होने के आसार हैं।

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