Thursday, June 18, 2026

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राजस्थान के नागौर में 21 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक मायरा, भांजे की शादी में मामा बने चर्चा का विषय

नागौर राजस्थान)/सर्वोदय:-राजस्थान के नागौर जिले के झाडेली गांव में एक शादी समारोह ने पूरे राज्य और सोशल मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वजह है एक ऐतिहासिक मायरा, जिसमें दूल्हे के मामा—पोत्तलिया परिवार—ने 21.11 करोड़ रुपये के उपहार अपनी बहन के परिवार को दिए। यह नजारा पारंपरिक रस्म से कहीं आगे निकल गया और एक भव्य आयोजन में तब्दील हो गया।

क्या-क्या मिला मायरे में?

पोत्तलिया परिवार की ओर से दिए गए इस मायरे में शामिल थे:

  • 1 किलो सोना

  • 15 किलो चांदी

  • 210 बीघा जमीन

  • 1 पेट्रोल पंप

  • अजमेर में रिहायशी प्लॉट

  • 1.51 करोड़ रुपये नकद

  • कपड़े, गाड़ियां, और अन्य घरेलू उपहार

  • 500 परिवारों को चांदी के सिक्के

शाही अंदाज में पहुंचे 600 मेहमान

पोत्तलिया परिवार के 600 से अधिक सदस्य इस आयोजन में शामिल हुए। 100 कारों और 4 लग्ज़री बसों के काफिले के साथ पहुंची यह शोभायात्रा किसी राजघराने की झलक देती नजर आई। गांव की गलियों में बैंड-बाजे के साथ निकली यह यात्रा हर किसी के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

कौन हैं पोत्तलिया परिवार?

इस मायरा कार्यक्रम को भंवरलाल, रामचंद्र, सुरेश और डॉ. करण पोत्तलिया ने मिलकर अंजाम दिया, जो कि दूल्हे श्रेयांश के मामा हैं। श्रेयांश के पिता जगवीर छाबा, बीजेपी के पूर्व प्रदेश महासचिव रह चुके हैं। समारोह में भाजपा नेता डॉ. सतीश पूनिया और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। पोत्तलिया परिवार में वकील, बैंक मैनेजर, और कॉन्ट्रैक्टर जैसे पेशेवर शामिल हैं।

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नागौर की मायरा परंपरा

नागौर जिले में मायरा देने की परंपरा वर्षों पुरानी है, लेकिन हाल के वर्षों में यह रस्म भव्यता और खर्च के स्तर पर चर्चा में आ गई है। इसी साल अप्रैल में नाथूराम सांगवा ने अपनी बेटी की शादी में 3.21 करोड़ रुपये का मायरा दिया था। इससे पहले विभिन्न गांवों में 13.71 करोड़, 8 करोड़ और 1 करोड़ रुपये के मायरे भी दिए जा चुके हैं।

परंपरा या दिखावे की दौड़?

इस आयोजन को जहां कई लोग पारिवारिक स्नेह और सम्मान की मिसाल मान रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस भी तेज है। क्या ऐसे भव्य मायरे सामाजिक दबाव नहीं बढ़ाते? क्या यह केवल एक दिखावे की संस्कृति बनती जा रही है?

क्या होता है NOTAM? पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के बीच भारत करेगा बड़ा हवाई अभ्यास, मॉक ड्रिल भी होगी

नई दिल्ली/सर्वोदय:- पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव गहराता जा रहा है। इसी बीच भारत सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल और हवाई अभ्यास करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 7 मई को देश के लगभग 300 जिलों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। यह ड्रिल वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर की जा रही है।

भारत-पाक सीमा के पास होगा हवाई अभ्यास

भारतीय वायुसेना 7 मई से पाकिस्तान सीमा से सटे रेगिस्तानी क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में व्यापक हवाई अभ्यास करेगी। इस अभ्यास में वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान जैसे राफेल, मिराज-2000 और सुखोई-30 शामिल होंगे। इस अभ्यास के मद्देनज़र भारत की ओर से एक NOTAM (Notice to Airmen) भी जारी किया गया है।

क्या होता है NOTAM?

NOTAM का पूरा नाम है “Notice to Airmen”, जो कि उड़ान संचालन से जुड़े सभी कर्मियों को जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक सूचना पत्र होता है। इसके जरिए उड़ान भरने वाले पायलटों और अन्य विमानन कर्मियों को हवाई अड्डों, हवाई मार्गों, एयरस्पेस या अन्य नेविगेशन सुविधाओं में हुए किसी अस्थायी या स्थायी परिवर्तन की जानकारी दी जाती है।

NOTAM की प्रमुख बातें:

  • यह एक आधिकारिक सूचना है जो एयरस्पेस में होने वाले अस्थायी बदलाव, रनवे की मरम्मत, रडार या लाइटिंग सिस्टम में बदलाव, या विशेष सैन्य अभ्यास जैसी स्थितियों की जानकारी देता है।
  • इसके माध्यम से पायलट यह जान पाते हैं कि किसी विशेष क्षेत्र में उड़ान भरने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
  • NOTAM में सूचना का स्थान, प्रकार, समय अवधि और संबंधित चेतावनियों का उल्लेख होता है।
  • यह राष्ट्रीय हवाई क्षेत्र प्रणाली (NAS) का एक अहम हिस्सा है और असामान्य स्थितियों के दौरान तेजी से सूचना देने का माध्यम बनता है।

सुरक्षा तैयारियों की हो रही व्यापक समीक्षा

सरकार की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि 7 मई को होने वाली मॉक ड्रिल और सैन्य अभ्यास का मकसद देश की आपदा प्रबंधन और सुरक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता की जांच करना है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे देश में हाई अलर्ट पर हैं और विशेषकर भारत-पाकिस्तान सीमा पर निगरानी और अभ्यास तेज कर दिए गए हैं।

Met Gala 2025 में कियारा आडवाणी का इमोशनल डेब्यू, बेबी बंप और ‘Bravehearts’ गाउन ने बटोरे सुर्खियां

सर्वोदय/मनोरंजन:-  बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी ने Met Gala 2025 में अपने शानदार डेब्यू से ग्लोबल फैशन सर्कल में तहलका मचा दिया। लेकिन यह सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं था—कियारा का लुक उनकी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दौर, मातृत्व, को समर्पित था।
कियारा, जो अपने पहले बच्चे के आने की खुशी में हैं, ने रेड कार्पेट पर अपने खूबसूरत बेबी बंप के साथ शिरकत की। उनका आउटफिट मशहूर डिजाइनर गौरव गुप्ता द्वारा डिजाइन किया गया था और इसे नाम दिया गया था —‘Bravehearts’।
गाउन की सबसे खास बात थी इसमें उभरे दो दिलों की प्रतीकात्मक आकृति—एक मां का और एक उसके बच्चे का—जिन्हें आपस में जोड़ती थी एक गर्भनाल की डिटेल, जो मां-बच्चे के अटूट रिश्ते की गहराई को दर्शा रही थी। गाउन में गोल्ड प्लेटिंग, घुंघरू और क्रिस्टल्स का शानदार मिश्रण देखने को मिला, जिसने इसे एक यूनिक और भावनात्मक पहनावा बना दिया।
डिजाइनर गौरव गुप्ता के साथ बातचीत में कियारा ने बताया कि उन्होंने खुद यह आइडिया शेयर किया था:
“मैं चाहती थी कि मेरा डेब्यू केवल एक फैशन मूव न हो, बल्कि मेरे नए जीवन अध्याय की एक झलक भी हो। गर्भनाल की वह डिटेल मुझे बेहद इमोशनल कर गई।”

स्टाइलिस्ट अनीता श्रॉफ अदजानिया ने भी इस यादगार सफर को साझा करते हुए कहा, “मैं कियारा के घर एक फिल्म की ड्रेस फिटिंग के लिए गई थी, तभी उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—‘सबसे पहले तो मैं ये बताना चाहती हूं कि मैं प्रेग्नेंट हूं।’ फिर उन्होंने बताया कि वो मेट गाला में भी जा रही हैं—और यहीं से इस जादू की शुरुआत हुई।”
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कियारा मस्तीभरे मूड में नजर आ रही हैं, जहां वो पिज्जा खा रही हैं और अपने आने वाले बच्चे से मज़ाक में कहती हैं:
“दोस्त, तुम मेट गाला में थे! फैशन, इमोशन और मातृत्व का ये संगम Met Gala के इतिहास में एक खास जगह बना गया है। कियारा का यह डेब्यू न केवल एक स्टाइल स्टेटमेंट था, बल्कि एक दिल छू लेने वाला संदेश भी।

सिंगर पवनदीप राजन सड़क हादसे में घायल

अमरोहा/सर्वोदय:-  ‘इंडियन आइडल 12’ के विजेता और मशहूर सिंगर पवनदीप राजन रविवार देर रात उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के गजरौला क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा उस वक्त हुआ जब उनकी कार हाईवे किनारे खड़े एक कैंटर से टकरा गई।

मिली  जानकारी के अनुसार, पवनदीप अपने मित्र अजय मेहरा और ड्राइवर राहुल सिंह के साथ नोएडा जा रहे थे। रात करीब 2:30 बजे, गजरौला थाना क्षेत्र के चौपला चौराहा ओवरब्रिज से नीचे उतरते समय यह दुर्घटना हुई। हादसे में तीनों घायल हो गए। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि ड्राइवर राहुल सिंह को नींद आ जाने के कारण कार का संतुलन बिगड़ा और वह खड़े कैंटर से जा टकराई।

डॉक्टरों ने बताया गंभीर,

हादसे में पवनदीप राजन को सिर में चोटें आई हैं और दोनों पैरों में फ्रैक्चर बताया गया है। अजय मेहरा और राहुल सिंह को भी गंभीर चोटें आई हैं। तीनों को तत्काल गजरौला के पास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मुरादाबाद और फिर बेहतर इलाज के लिए नोएडा रेफर कर दिया गया।

परिवार पहुंचा अस्पताल, पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही पवनदीप के परिजन अस्पताल पहुंच गए। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त कैंटर और कार को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। सीओ श्वेताभ भास्कर ने बताया कि हादसे के कारणों की पुष्टि जांच के बाद की जाएगी।

पवनदीप उत्तराखंड के चंपावत जिले के रहने वाले हैं और ‘इंडियन आइडल 12’ में अपनी मधुर आवाज और हुनर से पूरे देश का दिल जीत चुके हैं। उनके फैंस और शुभचिंतक सोशल मीडिया पर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

लिपस्टिक नहीं टिकती? इन आसान ब्यूटी टिप्स से बनाएं उसे लॉन्ग-लास्टिंग

लाइफस्टाइल/सर्वोदय:- लिपस्टिक हर महिला के मेकअप किट का अहम हिस्सा होती है, लेकिन अक्सर यह जल्दी उतर जाती है या फैलने लगती है, जिससे पूरा लुक बिगड़ सकता है। अगर आपकी भी यही शिकायत है कि लिपस्टिक होंठों पर टिकती नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं। यहां हम आपको बता रहे हैं कुछ बेहद आसान और असरदार ब्यूटी टिप्स, जिनकी मदद से आप अपनी लिपस्टिक को लंबे समय तक टिकने वाला (Long Lasting Lipstick Tips) बना सकती हैं।

  1. होंठों को एक्सफोलिएट करें

लिपस्टिक तभी टिकती है जब होंठ साफ और मुलायम हों। इसके लिए हफ्ते में दो-तीन बार चीनी और शहद का हल्का स्क्रब करें। डेड स्किन हटने से लिपस्टिक बेहतर तरीके से सेट होगी।

  1. अच्छे से मॉइश्चराइज करें

सूखे और फटे होंठों पर लिपस्टिक जल्दी फटती है। इसलिए लिपस्टिक लगाने से पहले लिप बाम या नारियल तेल लगाएं और कुछ मिनट बाद टिश्यू से एक्स्ट्रा बाम हटा दें।

  1. लिप लाइनर का करें सही इस्तेमाल

लिप लाइनर से न सिर्फ आउटलाइन सेट होती है बल्कि यह लिपस्टिक को ब्लीड होने से बचाता है और उसे लंबे समय तक टिकाए रखता है। अपने लिपस्टिक शेड के अनुसार लाइनर चुनें।

  1. टिश्यू और पाउडर ट्रिक अपनाएं

लिपस्टिक लगाने के बाद होंठों पर टिश्यू रखें और उस पर से ब्रश से ट्रांसलूसेंट पाउडर लगाएं। इससे लिपस्टिक सेट हो जाती है और जल्दी नहीं उतरती। यह ट्रिक खासतौर पर मैट लिपस्टिक के लिए बेहद फायदेमंद है।

  1. लिक्विड लिपस्टिक या लिप टिंट चुनें

अगर आपको बार-बार लिपस्टिक टच-अप करना पसंद नहीं, तो लिक्विड लिपस्टिक या लिप टिंट बेस्ट ऑप्शन है। ये जल्दी सूखती हैं और लंबे समय तक रहती हैं।

  1. बेस और टॉप कोट से करें सील

लिपस्टिक लगाने से पहले कंसीलर या फाउंडेशन लगाकर बेस बनाएं। लिपस्टिक लगाने के बाद सेटिंग स्प्रे या पाउडर से टॉप कोट लगाएं ताकि यह ज्यादा देर तक टिकी रहे।

  1. ऑयली फूड से बनाएं दूरी

तेल या घी से भरपूर खाना लिपस्टिक को जल्दी फीका और धुंधला कर देता है। ऐसे में बेहतर होगा कि स्ट्रॉ से ड्रिंक लें और खाने के दौरान होंठों को ज्यादा न छुएं।

  1. टचअप करना भूलें

कोई भी लिपस्टिक पूरे दिन परफेक्ट नहीं रहती। ऐसे में अपनी लिपस्टिक, कॉटन बड्स और टिश्यू हमेशा पर्स में रखें ताकि जरूरत पड़ने पर फटाफट टच-अप कर सकें।

‘7 मई को सभी राज्यों में होगा सुरक्षा मॉक ड्रिल’, गृह मंत्रालय का बड़ा आदेश

नई दिल्ली/सर्वोदय:-  भारत-पाकिस्तान के बीच पहलगाम आतंकी हमले के बाद उपजा तनाव अब राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर तक पहुंच चुका है। ऐसे समय में गृह मंत्रालय ने देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 7 मई को व्यापक नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्देश दिया है। यह मॉक ड्रिल विशेष रूप से हवाई हमले और आपात स्थिति की तैयारियों को लेकर केंद्रित होगी।

क्या है गृह मंत्रालय का निर्देश?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों को अहम बिंदुओं पर मॉक ड्रिल आयोजित करने को कहा है:

1.हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरनों का परीक्षण और संचालन।

2.नागरिकों, छात्रों और सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स को आपात स्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग।

3.ब्लैकआउट उपायों का प्रदर्शन, जैसे—अंधेरे में लाइट्स बंद करना।

4.महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों को छिपाने या संरक्षित करने के प्रोटोकॉल।

5.निकासी (evacuation) योजनाओं को अपडेट करना और अभ्यास कराना।

क्या होता है मॉक ड्रिल?

मॉक ड्रिल एक पूर्व-निर्धारित अभ्यास होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी आपातकालीन या आतंकी स्थिति में नागरिकों, एजेंसियों और संसाधनों की प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी हो। इसका उद्देश्य होता है:

आपदा की स्थिति में रेस्पॉन्स की समीक्षा।

सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल का परीक्षण।

कमियों, जोखिमों और सुधार की जरूरतों की पहचान।

सामान्य नागरिकों को सशक्त बनाना कि वे कैसे खुद को सुरक्षित रखें।

क्यों खास है यह मॉक ड्रिल?

इस बार की मॉक ड्रिल सिर्फ सामान्य सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि हवाई हमले या सैन्य आपात स्थिति के परिदृश्य पर आधारित है। इसके पीछे हाल ही में पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों की आशंका को भी कारण माना जा रहा है।

पाकिस्तान से बढ़े तनाव के बीच सख्त कदम

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं। ऐसे में यह मॉक ड्रिल सुरक्षा एजेंसियों के लिए न केवल अभ्यास का मौका है, बल्कि यह दिखाता है कि भारत किसी भी आपात या युद्ध जैसी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है।

‘लाल किला हमारा है’ – सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा अनोखा दावा, CJI बोले: “फतेहपुर सीकरी क्यों नहीं?”

नई दिल्ली/सर्वोदय:- सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जिसमें एक महिला ने ऐतिहासिक लाल किले पर मालिकाना हक का दावा ठोक दिया। खुद को मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फर के परपोते की विधवा बताने वाली सुल्ताना बेगम ने कहा कि लाल किला उनकी पैतृक संपत्ति है और उन्हें इस पर अधिकार मिलना चाहिए।

क्या है मामला?

सुल्ताना बेगम फिलहाल कोलकाता के पास हावड़ा में रहती हैं। उन्होंने सबसे पहले 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया था क्योंकि याचिका में  देरी की थी।

अब जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका को सुनते हुए इसे “गलत और अव्यवहारिक” बताया। कोर्ट ने  कहा:“सिर्फ लाल किला ही क्यों? फतेहपुर सीकरी क्यों नहीं? उन्हें भी क्यों छोड़ दिया जाए?”

शाही वंश, लेकिन मुश्किल हालात

याचिका में सुल्ताना बेगम ने यह भी मांग की कि सरकार उन्हें आर्थिक मदद दे क्योंकि वह मुगल शाही वंश से हैं और कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रही हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतने वर्षों बाद इस प्रकार की याचिकाएं कानूनी रूप से स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश

कोर्ट ने यह फैसला देते हुए दो टूक कहा कि ऐतिहासिक धरोहरें अब सार्वजनिक संपत्ति हैं और इन पर निजी स्वामित्व का दावा कानून की नजर में टिक नहीं सकता।

ताजिकिस्तान में भारत का ‘अयनी एयरबेस’: पाकिस्तान के लिए क्यों बन गया रणनीतिक सिरदर्द?

देश-विदेश/सर्वोदय:-  पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना को पूरी ऑपरेशनल आज़ादी दे दी है, जिससे पाकिस्तान की चिंताएं और बढ़ गई हैं। ऐसे समय में भारत का एक ऐसा रणनीतिक ठिकाना, जो आमतौर पर चर्चा में नहीं रहता, पाकिस्तान के लिए गंभीर खतरा बनकर उभर रहा है—ताजिकिस्तान का अयनी एयरबेस(Ayni Airbase)।

क्या है अयनी एयरबेस और भारत की इसमें भूमिका?

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित अयनी एयरबेस पहले सोवियत सैन्य अड्डा था। 1991 में सोवियत संघ के टूटने के बाद यह ताजिकिस्तान के नियंत्रण में आ गया। गृहयुद्ध के कारण यह काफी समय तक निष्क्रिय रहा।

भारत ने 2002 के बाद इस एयरबेस को पुनर्जीवित करने में दिलचस्पी दिखाई। इसके आधुनिकीकरण पर लगभग 7 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश किया गया। 2003 से 2010 के बीच रनवे को 3200 मीटर तक विस्तारित किया गया और इसे Ilyushin-76 और Su-30MKI जैसे युद्धक विमानों के लायक बनाया गया।

हालांकि, ताजिकिस्तान इसे सार्वजनिक रूप से विदेशी सैन्य अड्डा नहीं मानता, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां भारतीय वायुसेना के टेक्नीशियन, इंजीनियर और सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं।

भारत को क्या लाभ देता है अयनी एयरबेस?

पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव:
अयनी एयरबेस पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा के नज़दीक स्थित है। यहां से भारत बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे संवेदनशील इलाकों में निगरानी और अभियानों को अंजाम दे सकता है। इससे पाकिस्तान को दो मोर्चों पर रणनीतिक चुनौती झेलनी पड़ सकती है—एक पूर्व में कश्मीर और दूसरा पश्चिम में।
चीन पर नजर:

ताजिकिस्तान की सीमाएं चीन के शिनजियांग प्रांत से लगती हैं। अयनी एयरबेस से भारत चीन की गतिविधियों पर निगरानी रख सकता है, खासकर गलवान संघर्ष के बाद यह पहलू और महत्वपूर्ण हो गया है।

अफगानिस्तान में बढ़ती गतिविधियों पर नियंत्रण:

तालिबान के पुनः सत्ता में आने और IS-K जैसे आतंकी संगठनों की मौजूदगी के बीच, भारत इस बेस के माध्यम से अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्सों पर निगरानी रख सकता है।

मध्य एशिया में भारत का प्रभाव:
अयनी एयरबेस भारत को मध्य एशिया में एक प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है। जहां रूस और चीन पहले से सक्रिय हैं, वहीं यह बेस भारत को जियोपॉलिटिकल बैलेंस बनाने में मदद करता है।

पाकिस्तान को क्यों है डर?

रणनीतिक घेराबंदी: भारत अगर इस एयरबेस से फाइटर जेट्स या ड्रोन ऑपरेशन शुरू करता है, तो पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से चारों तरफ से घिरा महसूस हो सकता है।

परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर खतरा: पाकिस्तान के कई परमाणु ठिकाने उसके पश्चिमी हिस्से में हैं। अयनी एयरबेस से इन पर निगरानी आसान हो सकती है।

CPEC की सुरक्षा को चुनौती: चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC), जो बलूचिस्तान से होकर गुजरता है, अब भारत की इस सामरिक मौजूदगी से दबाव में आ सकता है।

भविष्य में और बढ़ेगा महत्व

भारत ने अब तक अयनी एयरबेस को आधिकारिक रूप से ऑपरेशनल बेस घोषित नहीं किया है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से इसकी अहमियत आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी। यह न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन और अफगानिस्तान की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण का जरिया बन सकता है।

एक-एक गरीब पात्र को चिन्हित कर राशनकार्ड जारी कर रही योगी सरकार

लखनऊ/सर्वोदय:-  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के गरीबों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत योगी सरकार एक-एक पात्र गरीब को चिन्हित कर राशन कार्ड जारी कर रही है। प्रदेश में अंत्योदय कार्ड लाभार्थियों की संख्या 1.29 करोड़ से अधिक है। अब तक प्रदेश में 3.16 करोड़ से अधिक परिवारों के सामान्य राशन कार्ड और 40.73 लाख से अधिक परिवारों के अंत्योदय राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का लाभ मिल रहा है। सरकार का लक्ष्य हर जरूरतमंद तक राशन पहुंचाना है और इसके लिए अभियान चलाकर पात्रता की पहचान की जा रही है।

राशनकार्ड वितरण में प्रयागराज ने मारी बाजी

खाद्य एवं रसद विभाग से प्राप्त आंकड़े के अनुसार, राशन कार्ड वितरण में प्रयागराज जिला सबसे आगे है। इस जिले में 9,34,677 सामान्य राशन कार्ड और 40,29,226 लाभार्थी दर्ज किए गए हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर सीतापुर जिला है, जहां 7,74,576 राशन कार्ड और 31,60,253 लाभार्थी हैं। आगरा ने तीसरा स्थान हासिल किया है, यहां 7,38,939 राशन कार्ड बनाए, जिनसे 30,80,875 लाभार्थी जुड़े हैं। चौथे स्थान पर लखनऊ हैं जहां 7,01,070 राशन कार्ड के जरिए 29,08,145 लाभार्थी जुड़े हैं, जबकि जौनपुर पांचवें स्थान पर है, जहां 6,91,216 राशन कार्ड और 30,56,416 लाभार्थी हैं। छठे स्थान पर गोरखपुर हैं जहां 6,72,749 राशन कार्ड बनाए गए, जिनसे 26,79,692 लोग लाभान्वित हो रहे हैं। सातवें स्थान पर आजमगढ़ है जहां 6,70,679 राशन कार्ड और 30,86,602 लाभार्थी हैं। राशनकार्ड वितरण में बरेली आठवां स्थान हासिल किया है यहां 6,70,677 राशन कार्ड के जरिए 29,19,581 लाभार्थियों के मुफ्त राशन का लाभ मिल रह है। वहीं नौवें स्थान पर सिद्धार्थनगर है यहां 5,89,160 राशन कार्ड और 16,97,709 लाभार्थी हैं, जबकि 10वें स्थान पर लखीमपुर खीरी है जहां 5,86,592 राशन कार्ड और 23,95,374 लाभार्थी दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े योगी सरकार की इस योजना की सफलता को दर्शाते हैं।

अंत्योदय राशनकार्ड वितरण में प्रयागराज, गोरखपुर, लखनऊ, सीतापुर टॉप 10 जिलों में शामिल

अंत्योदय राशन कार्ड वितरण में भी कई जिले शीर्ष पर हैं। आंकड़े के अनुसार, गोरखपुर ने अत्यंत गरीबों को चिन्हित कर उनको राशन कार्ड जारी करने में बाजी मारी है। यहां 1,26,392 अंत्योदय राशन कार्ड बनाए, जिनसे 4,56,750 लाभार्थी जुड़े हैं। दूसरे स्थान पर सीतापुर है जहां 1,11,714 अंत्योदय राशन कार्ड और 3,09,470 लाभार्थी हैं। लखीमपुर खीरी ने तीसरा स्थान हालिल किया है जहां 1,09,395 अंत्योदय राशन कार्ड और 2,95,862 लाभार्थी दर्ज किए गए हैं। चौथे स्थान पर आजमगढ़ है यहां 1,05,782 अंत्योदय राशन कार्ड के जरिए 41,4,541 लाभार्थियों को राशन का लाभ मिल रहा है। पांचवें स्थान पर बरेली में 97,996 अंत्योदय राशन कार्ड और 2,97,077 लाभार्थी हैं। छठवें स्थान पर प्रयागराज है जहां 86,613 अंत्योदय राशन कार्ड और 2,61,220 लाभार्थी दर्ज किए गए हैं। सातवें स्थान पर सिद्धार्थनगर है जहां 82,334 अंत्योदय राशन कार्ड से 2,46,418 लाभार्थियों को राशन मिल रहा है। अभी तक के प्राप्त आंकड़े में जौनपुर ने आठवां स्थान हासिल किया है, जिसमें 1,25,472 अंत्योदय राशन कार्ड और 4,14,788 लाभार्थी हैं। नौवे स्थान पर लखनऊ है जहां 48,903 अंत्योदय राशन कार्ड और 1,48,216 लाभार्थी दर्ज हैं वहीं अबतक के आंकड़े के अनुसार, 10वें स्थान पर फिरोजाबाद है 32,231 अंत्योदय राशन कार्ड और 99,599 गरीब लाभार्थी राशन का लाभ रहे हैं। इन जिलों ने अंत्योदय योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया है। अभी राशनकार्ड बनाने की प्रक्रिया जारी है।

प्रदेश में अभियान चलाकर की जा रही पात्रता की पहचान

योगी सरकार ने पात्र गरीबों की पहचान के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। आधार-लिंक्ड सत्यापन और ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के जरिए यह प्रक्रिया पारदर्शी बनाई गई है। जिला प्रशासन को नियमित निगरानी और समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र परिवार राशन से वंचित न रहे। राशन दुकानों को डिजिटल करने और पीओएस मशीनों के उपयोग से वितरण प्रणाली को और मजबूत किया गया है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर महीने पात्र परिवारों को गेहूं, चावल, दाल और अन्य आवश्यक वस्तुएं मुफ्त में मिलें।

प्रदेश के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन

योगी सरकार की इस पहल से प्रदेश के करीब 15 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या 1.29 करोड़ से अधिक है, जो सबसे गरीब परिवारों को लक्षित करती है। सरकार का मकसद है कि कोई भी जरूरतमंद भूखा न रहे। इस योजना के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में राशन वितरण को प्रभावी बनाया गया है। योगी सरकार की यह कोशिश गरीबों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मिसाल पेश कर रही है।

खूबियों के नाते ही योगी सरकार मक्के की खेती को दे रही प्रोत्साहन

लखनऊ/सर्वोदय:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल में मक्के का उत्पादन 2027 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप चंद रोज पहले कृषि विभाग की ओर से लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय खरीफ गोष्ठी में प्रदेश के कृषि मंत्री ने किसानों से जिन फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की उसमें मक्का भी था। बाकी दो फसलें हैं अरहर (दलहनी) और सरसों (तिलहन)।

सरकार के प्रोत्साहन के नतीजे भी शानदार रहे। मसलन योगी के शासन के आठ वर्षों में दलहन और तिलहन का उत्पादन दोगुना हो चुका है। बहुउपयोगी मक्के की खेती भी किसानों को खूब रास आ रही है। फिलहाल 2021-2022 में मक्के का उत्पादन 14.67 लाख मीट्रिक टन था। तय अवधि में इसे बढ़ाकर 27.30 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है। इसके लिए रकबा बढ़ाने के के साथ प्रति हेक्टेयर प्रति कुंतल उत्पादन बढ़ाने पर भी बराबर का जोर है।

तीनों फसली सीजन एवं हर तरह की भूमि में संभव है मक्के की खेती

बात चाहे पोषक तत्वों की हो या उपयोगिता की। बेहतर उपज की करें या सहफसली खेती या औद्योगिक प्रयोग की। हर मौसम और हर तरह की भूमि में पैदा होने वाले मक्के का जवाब नहीं। बस जिस खेत में मक्का बोना है उसमें जल निकासी का बेहतर प्रबंधन जरूरी है।

इथेनॉल, पशु-कुक्कुट आहार एवं औषधीय रूप में उपयोगी है मक्का

मालूम हो कि मक्के का प्रयोग इथेनॉल उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाइयों, पशुओं एवं पोल्ट्री लिए पोषाहार, दवा, पेपर और एल्कोहल इंडस्ट्री में होता है। इसके अलावा भुट्टा, आटा, बेबीकार्न और पापकार्न के रूप में ये खाया जाता है। किसी न किसी रूप में ये हर सूप का अनिवार्य हिस्सा होता है। ये सभी क्षेत्र संभावनाओं वाले हैं।

बेहतर मांग से किसानों को मिलेंगे अच्छे दाम

बहुपयोगी होने की वजह से समय के साथ मक्के की मांग भी बढ़ेगी। इस बढ़ी मांग का अधिकतम लाभ प्रदेश के किसानों को हो इसके लिए सरकार मक्के को खेती के प्रति किसानों को लगातार जागरूक कर रही है। उनको खेती के उन्नत तौर तरीकों की जानकारी दे रही है। किसानों को अपनी उपज का वाजिब दाम मिले इसके लिए सरकार पहले ही इसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे में ला चुकी है।

पोषक तत्वों से भरपूर होने के नाले मक्के को बोलते हैं फसलों की रानी

मक्के में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व भी पाए जाते हैं इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल मिलते हैं। इन्हीं खूबियों के नाते इसे अनाजों की रानी कहा गया है।

उन्नत खेती के जरिये उपज बढ़ने की भरपूर संभावना

विशेषज्ञों की मानें तो उन्नत खेती के जरिये मक्के की प्रति हेक्टेयर उपज 100 क्विंटल तक भी संभव है। प्रति हेक्टेयर सर्वाधिक उत्पादन लेने वाले तमिलनाडु की औसत उपज 59.39 कुंतल है। देश के उपज का औसत 26 कुंतल एवं उत्तर प्रदेश के उपज का औसत 2021-22 में 21.63 कुंतल प्रति हेक्टेयर था। ऐसे में यहां मक्के की उपज बढ़ने की भरपूर संभावना है।

जून के दूसरे हफ्ते से लेकर जुलाई में बो सकते हैं खरीफ की फसल

कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार (गोरखपुर) प्रभारी डॉ. एसके तोमर के अनुसार खरीफ के फसल की बोआई के लिए 15 जून से 15 जुलाई तक का समय उपयुक्त होता है। अगर सिंचाई की सुविधा हो तो मई के दूसरे या तीसरे हफ्ते में भी इसकी बोआई की जा सकती है। इससे मानसून आने तक पौधे ऊपर आ जाएंगे और भारी बारिश से होने वाली क्षति नहीं होगी। प्रति एकड़ करीब 8 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। अच्छी उपज के लिए बोआई लाइन में करें। लाइन से लाइन की दूरी 60 सेमी एवं पौधे से पौधे की दूरी 20 सेमी रखें। उपलब्ध हो ती बेड प्लांटर का प्रयोग करें।