लाइफस्टाइल/सर्वोदय न्यूज़:- जहाँ तक वेटरनरी साइंस का सवाल है, आज का समय केवल सरकारी नौकरियों या पशुपालन विभागों तक सीमित नहीं रहा। प्राइवेट सेक्टर में भी अब पशु चिकित्सकों के लिए अपार संभावनाएँ खुल चुकी हैं। बदलती जीवनशैली, पालतू पशुओं की बढ़ती संख्या, डेयरी उद्योग और पॉल्ट्री फार्मिंग के विस्तार ने इस क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ाया है।
डॉ. हेमंत तिवारी के अनुसार, “आज का वेटरनरी प्रोफेशनल न केवल चिकित्सक है, बल्कि एक उद्यमी, तकनीकी सलाहकार, बायोटेक विशेषज्ञ, और जनस्वास्थ्य रक्षक भी है।” यह लेख इसी सोच को विस्तार देता है।
-
पेट केयर इंडस्ट्री में बढ़ती माँग
आज भारत जैसे देशों में पालतू पशुओं की संख्या में जबरदस्त इज़ाफा हुआ है। कुत्ते, बिल्ली, खरगोश जैसे पालतू पशु अब हर दूसरे घर में देखे जा सकते हैं। इन पशुओं के लिए लोगों की भावनात्मक जुड़ाव और उनकी सेहत की चिंता, प्राइवेट पेट क्लिनिक्स और हॉस्पिटल्स के लिए बड़ा बाज़ार बन गई है।
वेटरनरी डॉक्टर्स अब मेट्रो शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक अपना निजी क्लिनिक खोलकर अच्छी कमाई और प्रतिष्ठा दोनों पा रहे हैं। कई मल्टी-स्पेशलिटी पेट हॉस्पिटल भी खुल चुके हैं जहाँ सर्जरी, डेंटल केयर, एक्स-रे, वैक्सीनेशन जैसी सुविधाएँ दी जाती हैं।
-
पशुधन आधारित उद्योगों में करियर
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य उद्योग में पशु चिकित्सकों की बहुत आवश्यकता है। आजकल बड़े-बड़े प्राइवेट फार्म्स और डेयरी कंपनियाँ जैसे अमूल, मदर डेयरी, हेरिटेज, वेंकीज़, आदि पशु चिकित्सकों को बतौर लाइवस्टॉक मैनेजमेंट कंसल्टेंट नियुक्त कर रही हैं।
डॉ. हेमंत बताते हैं, “इन उद्योगों में पशुओं की सेहत, आहार, प्रजनन और बीमारियों की रोकथाम के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। एक प्रशिक्षित पशु चिकित्सक इन संस्थानों का कीमती स्तंभ बन सकता है।”
-
फार्मा और बायोटेक कंपनियों में भूमिका
जानवरों के लिए बनने वाली दवाइयाँ, टीके और पोषण संबंधी उत्पादों की रिसर्च और डेवलपमेंट में पशु चिकित्सकों की भूमिका बेहद अहम होती है। प्राइवेट फार्मास्युटिकल कंपनियाँ जैसे Zydus, Virbac, Intas, Himalaya, आदि में पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की माँग बढ़ रही है।
ये कंपनियाँ उन्हें प्रोडक्ट डेवेलपमेंट, फील्ड ट्रेनिंग, क्लिनिकल ट्रायल्स और सेल्स कंसल्टिंग जैसे पदों पर नियुक्त करती हैं।
-
एग्रीटेक और एनिमल टेक स्टार्टअप्स का बढ़ता दायरा
भारत में तेजी से उभरते हुए एग्रीटेक स्टार्टअप्स जैसे Stellapps, MoooFarm, DeHaat, आदि किसानों और पशुपालकों को तकनीकी सहायता दे रहे हैं। इन कंपनियों को ऐसे पशु चिकित्सकों की ज़रूरत होती है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दूरस्थ इलाज, सलाह और प्रशिक्षण दे सकें।
डॉ. तिवारी के अनुसार, “वेटरनरी डॉक्टर अब मोबाइल ऐप, ऑनलाइन वीडियो कॉल और क्लाउड आधारित मेडिकल डेटा के ज़रिए भी सेवा दे सकता है। यह एक नया युग है।”
-
पशु खाद्य उद्योग (Pet & Livestock Feed Industry)
पशुओं के पोषण से संबंधित फीड कंपनियाँ अब वेटरनरी न्यूट्रिशनिस्ट की सेवाएँ ले रही हैं। पालतू पशु आहार, डेयरी पशुओं के लिए संतुलित चारा, और पोल्ट्री फीड तैयार करने वाली कंपनियाँ डॉक्टर्स को फॉर्मुलेशन एक्सपर्ट और क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर की तरह नियुक्त करती हैं।
-
पशु बीमा कंपनियाँ और CSR प्रोजेक्ट्स
बड़े स्तर पर काम करने वाली बीमा कंपनियाँ और कॉर्पोरेट सेक्टर के CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) प्रोजेक्ट्स में भी पशु चिकित्सकों की भारी माँग है। ये प्रोजेक्ट्स विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य शिविर, जनजागरूकता, और बीमारी नियंत्रण जैसे अभियानों में पशु चिकित्सकों की सेवाएँ लेते हैं।
-
निजी उद्यमिता (Veterinary Entrepreneurship)
आज कई युवा पशु चिकित्सक अपने स्टार्टअप की शुरुआत कर रहे हैं जैसे:
- ऑनलाइन पेट मेडिसिन डिलीवरी
- मोबाइल वेटरनरी क्लिनिक
- पालतू पशुओं के लिए हॉलिडे बोर्डिंग / डे केयर
- वेटरनरी लैब्स और डायग्नोस्टिक सेंटर
- एक्वाकल्चर क्लिनिक (मछलियों की बीमारियों के लिए)
डॉ. तिवारी के अनुसार, “जिस तरह MBBS डॉक्टर क्लिनिक खोलकर सफल होते हैं, उसी तरह BVSc डॉक्टर भी आधुनिक तकनीक और सेवा भावना से बड़ा व्यवसाय खड़ा कर सकते हैं।”
-
शिक्षा, प्रशिक्षण और रिसर्च
प्राइवेट वेटरनरी कॉलेज, ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट और NGOs में भी डॉक्टरों को बतौर शिक्षक, गेस्ट लेक्चरर और ट्रेनर रखा जा रहा है। साथ ही, वन्यजीव अनुसंधान संस्थान, बायोटेक लैब्स, और नेचर कंज़र्वेशन प्रोजेक्ट्स में भी वेटरनरी बैकग्राउंड वालों को प्राथमिकता दी जा रही है।



