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‘रागिनी MMS 3’ में बड़ा बदलाव: नोरा फतेही की जगह लीड रोल में नजर आ सकती हैं तमन्ना भाटिया

मनोरंजन/सर्वोदय न्यूज़:- हॉरर जॉनर की पॉपुलर फ्रेंचाइजी ‘रागिनी MMS’ एक बार फिर सुर्खियों में है। पहले दो पार्ट्स की सफलता के बाद अब तीसरे इंस्टॉलमेंट की तैयारी जोरों पर है। वहीं, फिल्म की कास्टिंग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।

फिल्मफेयर की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘रागिनी MMS 3’ में पहले नोरा फतेही को लीड रोल के लिए फाइनल किया गया था। लेकिन अब खबरें हैं कि उनके बिजी शेड्यूल के चलते मेकर्स को उन्हें रिप्लेस करना पड़ा है। बताया जा रहा है कि नोरा इन दिनों लॉस एंजेलिस में एक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट की शूटिंग में व्यस्त हैं, जिस वजह से वह इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकीं।

अब मेकर्स ने तमन्ना भाटिया को फिल्म के लीड रोल के लिए अप्रोच किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बालाजी टेलीफिल्म्स इस नए कास्टिंग चेंज को लेकर काफी आश्वस्त है और तमन्ना की एंट्री से फिल्म को नया डायमेंशन मिलने की उम्मीद की जा रही है।

तमन्ना का अब तक का सबसे बोल्ड रोल हो सकता है

तमन्ना भाटिया ने हाल के वर्षों में साउथ और हिंदी सिनेमा में अपनी एक्टिंग रेंज से काफी सराहना हासिल की है। अगर ‘रागिनी MMS 3’ में उनकी एंट्री फाइनल होती है, तो यह उनके करियर का सबसे बोल्ड और एक्सपेरिमेंटल रोल माना जा सकता है।

नोरा और एकता कपूर के रिश्तों में कोई खटास नहीं

दिलचस्प बात यह है कि भले ही नोरा फतेही इस प्रोजेक्ट से अलग हो गई हों, लेकिन उनके और प्रोड्यूसर एकता कपूर के बीच रिश्तों में कोई तनाव नहीं है। इंडस्ट्री से आ रही खबरों के मुताबिक, दोनों जल्द ही किसी बड़े और हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट में साथ काम कर सकते हैं।

RRB Vacancy 2025: रेलवे में सेक्शन कंट्रोलर के 368 पदों पर भर्ती, 15 सितंबर से करें आवेदन

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने सेक्शन कंट्रोलर के 368 पदों पर भर्ती हेतु शॉर्ट नोटिफिकेशन (CEN 04/2025) जारी किया है। यह भर्ती 15 सितंबर 2025 से शुरू होगी और 14 अक्टूबर 2025 तक आवेदन की प्रक्रिया चलेगी।

महत्वपूर्ण तिथियाँ:

आरआरबी ने फिलहाल इस भर्ती का शॉर्ट नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके मुताबिक इसके ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 15 सितंबर 2025 से शुरू होगी। ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 अक्टूबर 2025 तय की गई है। इस भर्ती के लिए 20 वर्ष से 33 वर्ष तक के युवा आवेदन कर सकेंगे। एससी व एसटी वर्ग को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष और ओबीसी वर्ग को तीन वर्ष की छूट दी जाएगी। यह पे लेवल -6 का पद है। शुरुआती वेतन 35400 तय किया गया है। इस भर्ती के लिए एल2 का मेडिकल स्टैंडर्ड मांगा गया है।

  • ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ: 15 सितंबर 2025
  • आवेदन की अंतिम तिथि: 14 अक्टूबर 2025 (रात 11:59 बजे तक

पद विवरण और योग्यता:

  • कुल पद: 368
  • योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री
  • आयु सीमा (01.01.2026 기준): 20 से 33 वर्ष तक
  • SC/ST को 5 वर्ष, OBC को 3 वर्ष की छूट

वेतन और अन्य लाभ:

  • पे लेवल: लेवल‑6 (7वीं CPC)
  • बेसिक पे: ₹35,400 प्रति माह
  • कुल सैलरी: ₹50,000–₹60,000 (Dearness, HRA, TA सहित)। इन‑हैंड सैलरी लगभग ₹50,000–₹55,000।
  • मेडिकल स्टैंडर्ड: A‑2

चयन प्रक्रिया:

  1. Computer Based Test (CBT)
  2. यदि आवश्यक हो तो कौशल परीक्षा
  3. दस्तावेज सत्यापन

मेडिकल परीक्षा (A‑2 मानक)

आवेदन शुल्क:

  • General / OBC / EWS: ₹500 (CBT देने पर ₹400 रिफंड)
  • SC / ST / PwBD / महिला / EWS / Ex‑Servicemen: ₹250 (पूर्ण रिफंड संभव)

आधार डिटेल सत्यापन का सुझाव:

RRB ने उम्मीदवारों से सलाह दी है कि वे आवेदन के दौरान आधार का उपयोग कर अपने नाम व जन्मतिथि को दसवीं प्रमाणपत्र से मेल करवाएँ और आधार में नवीनतम फोटो व बायोमेट्रिक्स अपडेट करें ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी या असुविधा न हो

सारांश तालिका:

विशेषता विवरण
भर्ती पद सेक्शन कंट्रोलर – 368 पद
आवेदन अवधि 15 सितंबर – 14 अक्टूबर 2025
योग्यता स्नातक (किसी विषय में)
आयु सीमा 20–33 वर्ष (राहत सहित)
पे स्केल लेवल‑6 (₹35,400 + भत्ते)
चयन प्रक्रिया CBT → कौशल → दस्तावेज → मेडिकल
आवेदन शुल्क सामान्य: ₹500, आरक्षित वर्ग: ₹250
आधार सत्यापन जरूरी—नाम/जन्मतिथि मेल, बायोमेट्रिक्स अपडेट

 

रेबीज़ फ्री राजस्थान: चुनौतियाँ और समाधान

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज:- रेबीज़ एक घातक वायरस जनित रोग है, जो मनुष्यों और जानवरों दोनों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर वर्ष लगभग 59,000 लोग रेबीज़ के कारण अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से 40% पीड़ित 15 वर्ष से कम आयु के होते हैं। भारत में यह संख्या 20,000 मौतों प्रति वर्ष तक पहुंचती है। डॉ. हेमंत कुमार (पशु शल्य चिकित्सक), डॉ. मंगीलाल(पशु चिकित्सक), डॉ. वीरेंद्र कुमार (पशु चिकित्सक) एवं डॉ. जयदीप भदौरिया (पशु चिकित्सा अधिकारी) के अनुसार

राजस्थान में वर्तमान स्थिति (2025 तक)

  • डॉग बाइट्स के मामले: बीते एक वर्ष में 4.22 लाख से अधिक मामले दर्ज, यानी प्रतिदिन औसतन 1,100 से अधिक।
  • वैक्सीन की मांग:86,965 से अधिक एंटी-रेबीज़ टीकों की मांग राज्यभर में दर्ज हुई।

सरकारी नीति और पहल

राजस्थान सरकार ने अक्टूबर 2023 में राज्य कार्य योजना (State Action Plan) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य है 2030 तक राज्य को रेबीज़ मुक्त बनाना

अगस्त 2025 में लागू की गई नीतियाँ:

  • ABC (Animal Birth Control) नियमावली 2023 के तहत राज्यभर में पशु नियंत्रण, टीकाकरण और फीडिंग पॉइंट्स का वैज्ञानिक प्रबंधन।
  • CCTV निगरानी, स्थानीय समितियाँ, और प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा मानवीय ढंग से कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था।
  • स्टेरिलाइजेशन और टैगिंग के बाद कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र में ही छोड़ा जाता है।

प्रमुख चुनौतियाँ

क्रम चुनौती विवरण
1. तेज़ी से बढ़ते डॉग-बाइट केस विशेषकर शहरी क्षेत्रों में असंतुलित जनसंख्या
2. विभागीय जिम्मेदारी का असंतुलन स्वास्थ्य विभाग केवल इलाज तक सीमित, रोकथाम की ज़िम्मेदारी नगर निगम व पशुपालन विभाग पर
3. संसाधनों की कमी पर्याप्त ट्रेन्ड स्टाफ, वैक्सीनेशन सेंटर और रिकॉर्डिंग सिस्टम का अभाव
4. जागरूकता की कमी ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से बचाव और उपचार संबंधी जानकारी का अभाव
5. मानव-पशु संघर्ष असुरक्षा की भावना से समाज में आक्रोश और हिंसा की स्थिति

समाधान और रणनीतिक सुझाव

1. ABC + टीकाकरण नीति का कड़ाई से पालन
  • फीडिंग पॉइंट्स, स्टेरिलाइजेशन केंद्र और मानवीय ढंग से पकड़ने की प्रक्रिया को प्राथमिकता।
  • हर पकड़े गए कुत्ते का टैगिंग, इलाज और उसी क्षेत्र में पुनःस्थापन।
2. जन-जागरूकता और IEC अभियान
  • नवंबर से जून तक डॉग-बाइट की उच्चतम प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए वार्ड, स्कूल और पंचायत स्तर पर सूचना अभियान।
  • स्थानीय भाषा में पोस्टर, रेडियो और सोशल मीडिया का इस्तेमाल।
3. डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता
  • पशु चिकित्सालयों और वैक्सीनेशन क्लिनिक को ऑनलाइन रिपोर्टिंग से जोड़ना।
  • जिला स्तर पर मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित करना।
4. प्रशासनिक जवाबदेही और भागीदारी
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
  • NGO व स्थानीय संगठनों को निगरानी समितियों में शामिल किया जाए।
5. मानव–पशु सह-अस्तित्व को बढ़ावा
  • नरसंहार नहीं, टीकाकरण + स्टेरिलाइजेशन + पुनर्स्थापन ही समाधान।
  • समाज में करुणा और विज्ञान आधारित नीति के प्रति विश्वास जाग्रत करना।

बिहार को जल्द मिलेगी पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, पटना से दिल्ली का सफर होगा अब और आरामदायक

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:-भारतीय रेलवे यात्रियों को दीवाली से पहले बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अब पटरी पर दौड़ने के लिए तैयार है और इसकी पहली सेवा बिहार की राजधानी पटना से शुरू होने की उम्मीद है। यह देश की पहली वंदे भारत ट्रेन होगी, जिसमें यात्री लेटकर यानी स्लीपर क्लास में सफर कर सकेंगे।

कब से शुरू हो सकती है वंदे भारत स्लीपर ट्रेन?

रेलवे सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ट्रेन दीवाली 2025 से पहले शुरू हो सकती है। हालांकि, अभी तक रेल मंत्रालय की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

रूट और टाइमिंग क्या होगी?

  • रूट: पटना से नई दिल्ली
  • पटना से प्रस्थान: सुबह 8:00 बजे
  • नई दिल्ली आगमन: अगले दिन सुबह 7:30 बजे
  • कुल यात्रा समय: लगभग 11.5 घंटे
  • पहले यह यात्रा 12–17 घंटे में होती थी, अब समय में बड़ी कटौती की गई है।

किराया कितना हो सकता है?

कयास लगाए जा रहे हैं कि इस ट्रेन का किराया राजधानी एक्सप्रेस से 10–15% अधिक हो सकता है। हालांकि, इसके बदले में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और तेज सफर मिलेगा।

क्लास और यात्री क्षमता

रेल मंत्रालय के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 डिब्बे होंगे, जिनमें तीन क्लास शामिल हैं:

  • AC प्रथम श्रेणी (1st AC)
  • AC टू टियर (2nd AC)
  • AC थ्री टियर (3rd AC)

कुल यात्री क्षमता: 1128 यात्री

फीचर्स जो बनाएंगे सफर आरामदायक

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में पहले से ज्यादा आधुनिक और सुरक्षित सुविधाएं दी गई हैं:

  • सीसीटीवी कैमरा निगरानी
  • मनोरंजन के लिए LED स्क्रीन
  • ऑटोमेटिक दरवाजे और स्लाइडिंग गेट्स
  • इंटरनल अनाउंसमेंट सिस्टम
  • फायर-रेसिस्टेंट वॉल्स
  • ऑनबोर्ड फ्री वाई-फाई
  • क्रैश बफर टेक्नोलॉजी से लैस

त्योहार के मौसम में मिलेगा बड़ा फायदा

त्योहारी सीजन में पटना-दिल्ली रूट सबसे अधिक व्यस्त रहता है। ऐसे में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन:

  • बिहार और यूपी के यात्रियों को देगा तेज और आरामदायक सफर
  • अन्य ट्रेनों पर पड़ने वाला भार होगा कम
  • ट्रैफिक मैनेजमेंट में मदद मिलेगी

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत अवध प्रांत की त्रैमासिक बैठक लखनऊ में संपन्न

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत अवध प्रांत की त्रैमासिक बैठक का सफल आयोजन लखनऊ महानगर स्थित शुभम गेस्ट हाउस में किया गया। बैठक में संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व पर्यावरण आयाम प्रमुख डॉ. प्रमोद पांडेय एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष यशपाल सिंह एवं संचालन प्रांतीय सचिव आशुतोष मिश्र ने किया।

ग्राहक पंचायत का 51 वर्षों का गौरवशाली इतिहास

डॉ. प्रमोद पांडेय ने बताया कि अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत 1974 से उपभोक्ता जागरूकता और अधिकार संरक्षण का कार्य कर रही है। उन्होंने संगठन की स्थापना का इतिहास साझा करते हुए कहा कि यह संगठन संघ के वरिष्ठ प्रचारक बिंदु माधव जोशी जी के प्रयासों से शुरू हुआ था।

उन्होंने यह भी कहा कि: आज समाज में प्रलोभन और भ्रामक विज्ञापन उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रहे हैं। गैर-सीजनल खाद्य पदार्थों के बढ़ते प्रयोग से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। उपभोक्ता को संयम और विवेकपूर्ण निर्णय लेकर खरीदारी करनी चाहिए। संगठन का उद्देश्य उपभोक्ता को जागरूक करना है, जिससे वह अपनी संस्कृति और स्वास्थ्य दोनों को संरक्षित रख सके।

संगठन के ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश

प्रांतीय संगठन मंत्री डॉ. रामप्रताप सिंह बिसेन ने बताया कि ग्राहक पंचायत के प्रयासों से भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम अस्तित्व में आया। हॉलमार्किंग, रेरा कानून, और FD गारंटी सीमा जैसे कई सुधारों में संगठन की भूमिका रही है। हाल ही में संगठन ने ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन, एमआरपी के साथ लागत मूल्य लिखने की मांग, और स्टंट की कीमतों में कमी जैसे जनहित के मुद्दों पर पहल की है।

ग्राहक अधिकारों पर जागरूकता ज़रूरी: ओंकार पांडेय

प्रांतीय उपाध्यक्ष ओंकार पांडेय ने कहा कि ग्राहक को अपने विधिक अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, जैसे:

  • सुरक्षा का अधिकार
  • जानकारी का अधिकार
  • चुनाव का अधिकार
  • निष्पक्ष व्यवहार का अधिकार
  • शिकायत निवारण का अधिकार

उन्होंने यह भी बताया कि यदि ग्राहक के अधिकारों का हनन होता है तो वह उपभोक्ता फोरम, CCPA व अन्य मंचों पर शिकायत कर सकते हैं।

संगठनात्मक गतिविधियां व विस्तार

प्रांतीय सचिव आशुतोष मिश्र ने अवगत कराया कि:मई में कार्यकारिणी की घोषणा हुई। जून में पर्यावरण संकल्प, वृक्षारोपण, एवं क्षेत्रीय बैठकें आयोजित की गईं। जुलाई व अगस्त में सदस्यता अभियान चलाया गया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में अधिक सदस्य बनाए गए। उन्नाव में नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक नागपुर में होनी है, जिसमें अवध प्रांत से पांच प्रतिनिधि भाग लेंगे।

पर्यावरण व संयमित जीवन की दिशा में कार्य

पर्यावरण आयाम प्रमुख प्रकाश चंद बरनवाल ने सुझाव दिया कि:निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक प्रयोग करें। सप्ताह में कम से कम एक दिन हॉर्न फ्री डे मनाया जाए। जल संचयन और पर्यावरण संरक्षण हेतु योजना बनाई जाए।

नई जिम्मेदारियों की घोषणा

प्रांतीय अध्यक्ष यशपाल सिंह ने निम्नलिखित जिम्मेदारियों की घोषणा की:

नाम दायित्व
अजय पांडेय प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य
आशुतोष पाठक गोंडा जिला सचिव
शिखा सिंह, उमा देवड़ा महानगर कार्यकारिणी सदस्य
रविंद्र शुक्ल लखनऊ महानगर प्रचार प्रमुख

अध्यक्षीय उद्बोधन

अपने अध्यक्षीय भाषण में यशपाल सिंह ने कहा “हम संगठन से जुड़े हैं तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सकारात्मक दृष्टिकोण से समाज के लिए कार्य करें। यदि कोई दायित्ववान कार्यकर्ता अनैतिक आचरण करता है, तो उसे संगठन से बाहर किया जाएगा।”

उन्होंने अगस्त माह में सदस्यता वृद्धि के लिए सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी और सितंबर माह में भी इसे और बेहतर करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत और समापन

कार्यक्रम का आरंभ संगठन मंत्र से हुआ, जिसका वाचन लक्ष्मीकांत जी ने किया। समापन कल्याण मंत्र से हुआ, जिसे प्रांतीय कोषाध्यक्ष रामशंकर अवस्थी द्वारा संपन्न कराया गया।

बैठक में वीरेंद्र कुमार सिंह गौतम, शेषनाथ तिवारी, प्रेम चंद्र वर्मा, प्रकाश चंद्र बरनवाल, डॉ. आशुतोष पाठक, उमेश कुमार, दिनेश वर्मा, शिवम श्रीवास्तव, जानवी दुबे, उर्मिला सिंह, शिखा सिंह, अनीता तिवारी, सुमित सैनी, अजय पांडेय, विश्वनाथ मिश्र, मीना माहेश्वरी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन पर बवाल: संसद तक घुसे प्रदर्शनकारी, अब तक 16 की मौत, कर्फ्यू और सेना तैनात

डिजिटल डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत कई शहर इन दिनों सोशल मीडिया बैन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए युवाओं के हिंसक विरोध की चपेट में हैं। सरकार द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब सहित 25 से अधिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन अब इतना व्यापक हो गया है कि इसकी आंच संसद परिसर तक पहुंच गई है।

सोशल मीडिया पर क्यों लगाया गया बैन?

नेपाल सरकार ने हाल ही में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और X (पूर्व में ट्विटर) सहित प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।

  • कारण: ये कंपनियां सरकार द्वारा तय की गई समयसीमा के भीतर सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पंजीकरण कराने में विफल रहीं।
  • नोटिस: कंपनियों को 28 अगस्त से 7 दिन का समय दिया गया था।

सरकार का दावा है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा और फेक न्यूज पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन नागरिकों और पत्रकारों का कहना है कि यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है।

कैसे भड़की आग?

  • रविवार: काठमांडू के मैतीघर मंडला में पत्रकारों और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन में ‘जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता’ जैसे नारे लगाए गए।
  • सोमवार: विरोध प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में प्रवेश की कोशिश की और पुलिस से झड़पें शुरू हो गईं। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस, रबर बुलेट्स और पानी की बौछारें करनी पड़ीं।

 कितनी मौतें, कितने घायल?

हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मरने वालों में 5 की मौत ट्रॉमा सेंटर, 2 की सिविल हॉस्पिटल, और 1 की काठमांडू मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई। 100 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें पत्रकार, प्रदर्शनकारी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। कई की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

कहां-कहां लगा कर्फ्यू?

प्रदर्शन के बढ़ते दायरे को देखते हुए प्रशासन ने कई क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया है:

क्षेत्र समय सीमा
बाणेश्वर दोपहर 12:30 बजे से रात 10 बजे तक
काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी दोपहर 1 बजे से रात 10 बजे तक
अन्य संवेदनशील क्षेत्र सिंह दरबार, नारायणहिति दरबार, महाराजगंज, लैनचौर आदि

इसके अलावा बुटवल, पोखरा, चितवन और बीरतनगर में भी विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं।

कौन हैं ‘जेनरेशन Z’ प्रदर्शनकारी?

इन प्रदर्शनों की अगुवाई ‘Gen Z’ (जेनरेशन Z) के युवा कर रहे हैं — यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा नागरिक।
इनकी मांगें: सोशल मीडिया बैन तत्काल हटाया जाए,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी दी जाए, डिजिटल सेंसरशिप को रोका जाए

कटिहार: सांसद तारिक अनवर कीचड़-पानी देख युवक के कंधे पर चढ़ गए कांग्रेस सांसद तारिक अनवर, बाढ़ का लिया जायजा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- – कटिहार लोकसभा सीट से सांसद तारिक अनवर ने रविवार को बरारी और मनिहारी विधानसभा क्षेत्रों के बाढ़ग्रस्त और कटाव प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने धुरियाही पंचायत के कई गांवों में बाढ़ और गंगा नदी के तेज कटाव से प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।

नाव और ट्रैक्टर से पहुंचे ग्रामीणों के बीच

सांसद तारिक अनवर अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नाव और ट्रैक्टर की मदद से प्रभावित इलाकों तक पहुंचे। उन्होंने शिवनगर और सोनाखाल गांवों का निरीक्षण किया, जहां गंगा के जलस्तर में गिरावट के बाद कटाव की स्थिति और भी गंभीर हो गई है।

कीचड़ भरे रास्ते में युवक के कंधे पर चढ़े सांसद, वीडियो वायरल

निरीक्षण के दौरान जब सांसद एक कटाव स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तब रास्ता अत्यधिक कीचड़ और पानी से भरा हुआ था। ऐसे में एक स्थानीय युवक के आग्रह पर सांसद उसके कंधे पर चढ़कर कटाव स्थल तक पहुंचे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें सांसद को कंधे पर बैठकर कीचड़ और पानी से भरे रास्ते से गुजरते देखा जा सकता है।

देखे विडियो..

सांसद ने दी सफाई: “स्थानीय लोगों के आग्रह को टाल नहीं सका”

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद तारिक अनवर ने कहा:“कटाव क्षेत्र का निरीक्षण करना जरूरी था। रास्ते में कीचड़ और पानी था। स्थानीय लोगों ने खुद कहा कि वे मुझे कंधे पर ले जाएंगे। मैंने उनकी भावना का सम्मान किया और उनके अनुरोध को ठुकराना उचित नहीं समझा।”

उन्होंने आगे कहा कि धुरियाही पंचायत में पहले भी कटाव हो चुका है और इस बार स्थिति और गंभीर है क्योंकि बाढ़ का पानी अभी पूरी तरह से नहीं निकला है, जिससे कटाव की रफ्तार और तेज हो गई है।

वीडियो बना चर्चा का विषय

सांसद तारिक अनवर का यह वीडियो जहां कुछ लोगों द्वारा जमीनी नेता के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं सोशल मीडिया पर इस पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। वीडियो में दिखाई देता है कि सांसद को कंधे पर बैठाकर ले जाया जा रहा है, साथ ही अन्य लोग उन्हें संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

Asia Cup 2025: संजू सैमसन को … सही फैसला नहीं? रवि शास्त्री ने टीम इंडिया को दी बड़ी सलाह

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स्पोर्ट्स डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- Asia Cup 2025: टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि सैमसन जब टॉप ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हैं, तभी वे सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं और भारत के लिए मैच जिता सकते हैं।

 एशिया कप से पहले सैमसन की प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर संशय

हालांकि, टी20 एशिया कप 2025 के लिए संजू सैमसन को स्क्वाड में शामिल किया गया है, लेकिन उनके प्लेइंग इलेवन में शामिल होने की संभावनाएं बेहद कम दिखाई दे रही हैं। इसकी वजह यह है कि ओपनिंग स्लॉट पहले से ही शुभमन गिल और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों से भरा हुआ है।

रवि शास्त्री ने दिया खुला समर्थन

रवि शास्त्री ने एक इंटरव्यू में कहा:“संजू सैमसन टॉप ऑर्डर में सबसे खतरनाक बल्लेबाज हैं। जब वे ऊपर बल्लेबाजी करते हैं तो अपनी पारी से अकेले दम पर मैच का रुख पलट सकते हैं। उन्हें ओपन करने देना ही बेहतर होगा।”

शास्त्री का यह बयान भारतीय टीम मैनेजमेंट के उस फैसले पर सवाल उठाता है, जिसमें सैमसन को ओपनिंग से हटाया गया है।

दमदार फॉर्म के बावजूद नहीं मिल रहा मौका

संजू सैमसन ने हाल ही में केरला क्रिकेट लीग (KCL) में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिर्फ 5 पारियों में 368 रन बनाए, जिनमें से अधिकांश रन उन्होंने ओपनर के तौर पर बनाए थे। इसके अलावा, पिछले 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में उन्होंने 3 शतक भी जड़े हैं।

सिलेक्शन कमेटी का रुख क्या है?

टीम के चयन के समय बीसीसीआई चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर और कप्तान सूर्यकुमार यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया था कि:”संजू सैमसन को सिर्फ तब ओपन कराया गया था जब शुभमन गिल उपलब्ध नहीं थे। अब जबकि गिल वापस हैं और टीम के उपकप्तान भी हैं, वे अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग करेंगे।”

इससे साफ संकेत मिलता है कि सैमसन को फिनिशर या मिडिल ऑर्डर में आजमाया जाएगा, जहां उनका रिकॉर्ड उतना प्रभावशाली नहीं रहा है।

Aaj ka Rashifal 08 Sep 2025: मिथुन राशि के जातकों को सतर्क रहने की सलाह, जानिए सभी 12 राशियों का हाल

Aaj ka Rashifal 08 Sep 2025:ग्रहों की चाल: आज गुरु मिथुन में, शुक्र कर्क में, सूर्य-बुध-केतु सिंह में, मंगल कन्या में, चंद्रमा-राहु कुंभ में और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। ग्रहों की यह स्थिति कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण तो कुछ के लिए शुभ संकेत लेकर आई है।

मेष (Aries):

आज आय में उतार-चढ़ाव रह सकता है। यात्रा से कष्ट संभव है। प्रेम व संतान पक्ष सामान्य रहेगा। व्यापार ठीक-ठाक चलेगा। उपाय: काली वस्तु का दान करें।

वृषभ (Taurus):

व्यापार में अस्थिरता रह सकती है। कोर्ट-कचहरी से जुड़ा मामला आपके पक्ष में नहीं रहेगा। खुद और पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। पैतृक संपत्ति से जुड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है। उपाय: हरी वस्तु अपने पास रखें।

 मिथुन (Gemini):

आज मान-सम्मान को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। अपमान की आशंका है, अतः सोच-समझकर बोलें। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। प्रेम व संतान पक्ष अच्छा है। व्यापार सामान्य रहेगा। उपाय: काली वस्तु का दान करें।

कर्क (Cancer):

दिन चुनौतीपूर्ण रह सकता है। चोट लगने या किसी परेशानी में फंसने की आशंका है। स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। हालांकि प्रेम और व्यापार में अनुकूलता बनी रहेगी। उपाय: काली वस्तु का दान करें।

 सिंह (Leo):

स्वास्थ्य संबंधी समस्या जीवनसाथी को हो सकती है। नौकरी में दबाव बढ़ सकता है। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में संतोषजनक स्थिति रहेगी। उपाय: पीली वस्तु पास रखें।

कन्या (Virgo):

शत्रु पक्ष पर हावी रहेंगे। ज्ञान और अनुभव में वृद्धि होगी। बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा, लेकिन मन में थोड़ी अशांति रह सकती है। प्रेम व व्यापार अनुकूल हैं। उपाय: लाल वस्तु का दान करें।

तुला (Libra):

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। प्रेम संबंधों में विवाद की आशंका है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय को फिलहाल टाल दें। मानसिक तनाव रह सकता है। उपाय: शनिदेव को प्रणाम करें।

 वृश्चिक (Scorpio):

घर में तनाव बढ़ सकता है। प्रॉपर्टी से जुड़ी कोई डील मुश्किल में पड़ सकती है। मां के स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें। प्रेम और व्यापार सामान्य रहेंगे। उपाय: पीली वस्तु अपने पास रखें।

धनु (Sagittarius):

नाक, कान और गले की समस्या हो सकती है। व्यापार में नकारात्मकता का प्रभाव दिख सकता है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। प्रेम-संतान ठीक-ठाक रहेंगे। उपाय: हरी वस्तु पास रखें।

मकर (Capricorn):

आर्थिक नुकसान की आशंका है। किसी भी प्रकार के निवेश से बचें और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। मुख रोग हो सकते हैं। प्रेम और व्यापार में अच्छी स्थिति रहेगी। उपाय: मां काली की आराधना करें।

कुंभ (Aquarius):

मानसिक बेचैनी और थकान हावी रह सकती है। हालांकि संतान और प्रेम का साथ मिलेगा। मन को शांत रखने के प्रयास करें। उपाय: काली वस्तु का दान करें।

मीन (Pisces):

सिर दर्द, आंखों में तकलीफ या अज्ञात भय आपको परेशान कर सकता है। मानसिक अशांति बनी रह सकती है। व्यापार सामान्य रहेगा, प्रेम-संतान पक्ष मध्यम। उपाय: काली वस्तु का दान करें।

राजस्थान में एग्रो टूरिज़्म: किसानों की आमदनी और ग्रामीण पर्यटन की नई दिशा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- भारत एक कृषि प्रधान देश है और ग्रामीण जीवन, खेती-बाड़ी तथा प्राकृतिक वातावरण हमेशा से लोगों को आकर्षित करता आया है। इसी आधार पर “एग्रो टूरिज़्म” (Agro Tourism) की अवधारणा विकसित हुई है। एग्रो टूरिज़्म का अर्थ है – ग्रामीण परिवेश, खेती, पशुपालन, पारंपरिक संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों को पर्यटन से जोड़कर लोगों को अनुभव कराना। यह न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम है बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और ग्रामीण संस्कृति को संरक्षित करने का एक सशक्त साधन भी है। डॉ. हेमंत कुमार एवं  डॉ. जयदीप भदौरिया के अनुसार

राजस्थान में एग्रो टूरिज़्म की वर्तमान स्थिति

राजस्थान पर्यटन की दृष्टि से भारत का सबसे प्रमुख राज्य है। यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरें, किले, महल, रेगिस्तानी संस्कृति और लोककला विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। लेकिन अब यहाँ ग्रामीण और कृषि पर्यटन की ओर भी ध्यान दिया जा रहा है।

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार, राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 करोड़ से अधिक देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। इनमें से अब एक बड़ा वर्ग ग्रामीण जीवन और खेती-बाड़ी के अनुभव की ओर आकर्षित हो रहा है।

जयपुर, अजमेर, उदयपुर, बाड़मेर, जोधपुर और बीकानेर के आसपास कुछ निजी फार्म हाउस और गांव एग्रो टूरिज़्म मॉडल के रूप में विकसित हुए हैं।

“पधारो म्हारे देस” अभियान के तहत ग्रामीण होम-स्टे, ऊँट सफारी, खेती का प्रत्यक्ष अनुभव, पशुपालन गतिविधियाँ और लोक-संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियाँ पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।

अभी राजस्थान में एग्रो टूरिज़्म संगठित स्तर पर शुरुआती दौर में है और इसका योगदान कुल राज्य पर्यटन में लगभग 3–5% ही माना जाता है।

एग्रो टूरिज़्म से मिलने वाले लाभ

  1. किसानों की आमदनी में वृद्धि – फसल और पशुपालन से होने वाली कमाई के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत।
  2. रोजगार सृजन – ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को गाइड, होम-स्टे प्रबंधन, लोकनृत्य, हस्तशिल्प व भोजन व्यवस्था में रोजगार।
  3. संस्कृति और परंपरा का संरक्षण – लोककला, लोकनृत्य, लोकसंगीत और ग्रामीण खानपान को बढ़ावा।
  4. शहरी लोगों को अनुभव – खेती, जैविक कृषि, दुग्ध उत्पादन और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर।
  5. पर्यावरण संरक्षण – प्राकृतिक और हरित पर्यटन के कारण पर्यावरण के प्रति जागरूकता।

जनपालिया का “भाखर एग्रो टूरिज़्म एवं नवाचार केंद्र”

राजस्थान में एग्रो टूरिज़्म के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय पहल बाड़मेर जिले के जनपालिया गाँव में देखने को मिलती है। यहाँ पशुचिकित्सक डॉ. रावताराम भाखर के मार्गदर्शन में उनके भाई श्री हरीश भाखर द्वारा “भाखर एग्रो टूरिज़्म एवं नवाचार केंद्र” विकसित किया गया है।

इस केंद्र का उद्देश्य है कि पर्यटक ग्रामीण जीवन, खेतों की सैर, फसलों की खेती, पशुपालन और पारंपरिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें।यहाँ वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर जैविक खेती के साथ अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त किया जा सकता है, इस पर भी नवाचार किए जाते हैं। केंद्र में स्थानीय बीजों का संरक्षण, बकरी और गौ-पालन, दुग्ध उत्पादन, जल-संरक्षण तकनीक और आधुनिक कृषि विधियाँ प्रदर्शित की जाती हैं। साथ ही यह युवा किसानों को वैज्ञानिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य करता है। यह मॉडल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा है कि कैसे कृषि और पर्यटन को जोड़कर किसानों की आय दोगुनी की जा सकती है।

राजस्थान में संभावनाएँ

राजस्थान में एग्रो टूरिज़्म की संभावनाएँ अत्यधिक व्यापक हैं क्योंकि: राज्य में ग्रामीण जनसंख्या 75% से अधिक है, जो पर्यटन का आधार बन सकती है। जैविक खेती (Organic Farming) और डेयरी उद्योग में राजस्थान देशभर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऊँट, घोड़ा और गाय पालन यहाँ की विशिष्ट पहचान है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। थार मरुस्थल और ग्रामीण जीवन विदेशी पर्यटकों के लिए अद्वितीय अनुभव प्रदान करते हैं। यदि सरकार एग्रो टूरिज़्म को राज्य पर्यटन नीति में मजबूत स्थान दे और किसानों को वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान करे तो आने वाले 5–10 वर्षों में इसका योगदान राज्य की पर्यटन आय में 10–15% तक हो सकता है।

चुनौतियाँ

पर्याप्त बुनियादी ढाँचे (सड़क, पानी, बिजली) की कमी।  किसानों और ग्रामीणों को प्रशिक्षण की आवश्यकता। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्वच्छता और सुरक्षा का अभाव।प्रचार-प्रसार और मार्केटिंग की कमी।