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T20 World Cup 2026: टीम से बाहर हुए शुभमन गिल, रोबिन उथप्पा बोले- भारतीय क्रिकेट अजीब दौर से गुजर रहा

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स्पोर्ट्स डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम के ऐलान के बाद क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। लंबे समय से टीम इंडिया का हिस्सा रहे शुभमन गिल और जितेश शर्मा को इस बार विश्व कप टीम में जगह नहीं मिली है। चयनकर्ताओं के इस फैसले ने कई पूर्व खिलाड़ियों को हैरान कर दिया है, जिनमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर रोबिन उथप्पा भी शामिल हैं।

शुभमन गिल का चयन लगभग तय माना जा रहा था, खासकर इसलिए क्योंकि उन्हें हाल ही में भारतीय टी20 टीम का उपकप्तान नियुक्त किया गया था। हालांकि, फॉर्म और टीम कॉम्बिनेशन को आधार बनाकर चयन समिति ने उन्हें बाहर रखने का फैसला लिया।

गिल के आंकड़े और हालिया प्रदर्शन

पिछले 15 टी20 मैचों में शुभमन गिल ने 24.25 की औसत से 291 रन बनाए, जबकि उनका स्ट्राइक रेट करीब 137 रहा। साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में तीन मुकाबलों में वे केवल 32 रन ही बना सके थे। सीरीज के आखिरी मैच में वे चोट के कारण नहीं खेल पाए।

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चयनकर्ताओं ने बैकअप ओपनर के तौर पर ईशान किशन को चुना है, जिन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया था। वहीं, विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा की जगह फिनिशर के रूप में रिंकू सिंह को टीम में शामिल किया गया है।

रोबिन उथप्पा ने जताई निराशा

अपने यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान रोबिन उथप्पा ने चयन को लेकर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट इस समय असमंजस के दौर से गुजर रहा है।

उथप्पा ने कहा,“भारतीय क्रिकेट इस वक्त एक अजीब स्थिति में है। टीम बहुत मजबूत है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन कुछ फैसले दिल तोड़ने वाले होते हैं। शुभमन और जितेश जैसे खिलाड़ियों के लिए यह आसान नहीं होता।”

“गिल टीम में होने चाहिए थे”

उथप्पा ने आगे कहा कि शुभमन गिल मौजूदा समय में टेस्ट और वनडे टीम के कप्तान हैं, ऐसे में उनका बाहर होना चौंकाने वाला है।
उन्होंने कहा,“सबसे खराब स्थिति में उनसे उपकप्तानी छीनी जा सकती थी, लेकिन उन्हें टीम में जरूर होना चाहिए था। भले ही प्लेइंग इलेवन में नहीं, लेकिन तीसरे ओपनर के तौर पर उनका चयन बनता था। जितेश ने भी अपने मौकों का सही इस्तेमाल किया है, उसने कोई गलती नहीं की।”

टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम चयन के बाद यह साफ है कि चयन समिति ने अनुभव से ज्यादा फॉर्म और भूमिका आधारित चयन को तरजीह दी है। हालांकि, शुभमन गिल जैसे बड़े नाम का बाहर होना आने वाले समय में चर्चा का विषय बना रहेगा।

मदरसा शिक्षकों के वेतन से जुड़ा विवादित विधेयक वापस, अब नियम उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:-मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़े लंबे समय से विवादित विधेयक को आखिरकार वापस ले लिया गया है। राज्य कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक वर्ष 2016 में समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान लाया गया था, लेकिन कभी लागू नहीं हो सका।

दरअसल, उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान) विधेयक, 2016 को उस समय विधानसभा और विधान परिषद दोनों से पारित किया गया था, लेकिन तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया था। राष्ट्रपति की मंजूरी न मिलने के कारण यह कानून लागू नहीं हो पाया।

क्या था विवाद की वजह?

सपा सरकार के कार्यकाल में मदरसा शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए ऐसे प्रावधान किए गए थे, जो अन्य शैक्षणिक विभागों से बिल्कुल अलग थे। इस विधेयक के तहत मदरसों के शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ न तो विभागीय जांच संभव थी और न ही पुलिस कोई कार्रवाई कर सकती थी।

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इसके अलावा, वेतन भुगतान में देरी होने पर अधिकारियों पर दंड का प्रावधान था, जबकि बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को ऐसी विशेष सुविधा नहीं दी गई थी। यही वजह रही कि इस विधेयक को लेकर संवैधानिक आपत्तियां उठीं।

अब क्या बदलेगा?

विधेयक के वापस लिए जाने के बाद अब मदरसा शिक्षक या कर्मचारी यदि किसी तरह की गड़बड़ी या नियम उल्लंघन करते हैं, तो उनके खिलाफ पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई संभव होगी। सरकार का मानना है कि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और कानून का समान रूप से पालन हो सकेगा।

मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बयान

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि यह विधेयक संविधान की भावना के विपरीत था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वर्ग के लिए अलग और विशेष कानून बनाना उचित नहीं है। अब सभी शिक्षकों और कर्मचारियों पर समान नियम लागू होंगे।

2026 में बदलेगा राज्यसभा का समीकरण, 75 सीटों पर चुनाव; कौन पड़ेगा भारी?

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- साल 2026 भारतीय राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने जा रहा है। एक ओर जहां कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे, वहीं संसद के उच्च सदन राज्यसभा में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वर्ष 2026 में राज्यसभा की करीब 75 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की रणनीति पर गहरा असर पड़ेगा।

राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल, जून और नवंबर 2026 में खाली होंगी। इसके बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि ऊपरी सदन में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच शक्ति संतुलन किस ओर झुकता है।

कई राज्यों में खाली होंगी अहम सीटें

आने वाले वर्ष में बिहार से 5 सीटें और उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सीटें खाली हो जाएंगी। इसके अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों की सीटों पर भी चुनाव होंगे।

नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश की सीटों पर चुनाव होने हैं, जबकि अप्रैल से जून के बीच बिहार, झारखंड और दक्षिण भारत के कई राज्यों में राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होगा। मध्य प्रदेश, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सीटें भी इसमें शामिल हैं।

इन दिग्गज नेताओं का खत्म होगा कार्यकाल

2026 के राज्यसभा चुनाव इसलिए भी खास माने जा रहे हैं क्योंकि कई बड़े राजनीतिक नेताओं का कार्यकाल इस दौरान समाप्त हो रहा है। इनमें शामिल हैं—कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार के साथ ही केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने नेताओं की राज्यसभा में वापसी होगी और कितने की जगह नए चेहरों को मौका मिलेगा।

बिहार और महाराष्ट्र पर रहेगी खास नजर

बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो जाएंगी। इनमें आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह, जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।

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बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की हालिया जीत के बाद संभावना जताई जा रही है कि भाजपा और जेडीयू को दो-दो सीटें मिल सकती हैं। वहीं कुछ पुराने चेहरों की दोबारा एंट्री भी संभव है।

महाराष्ट्र में भी अप्रैल 2026 में 7 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो सकते हैं। यहां शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

मौजूदा स्थिति में NDA आगे

फिलहाल राज्यसभा में एनडीए के पास 129 सीटें हैं, जबकि विपक्षी दलों के पास 78 सांसद हैं। 2026 के चुनाव इस समीकरण को बदल सकते हैं और संसद के भविष्य के विधायी एजेंडे पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा।

राज्यसभा के साथ-साथ होने वाले विधानसभा चुनाव भी राजनीतिक दलों की रणनीति को नई दिशा दे सकते हैं। ऐसे में 2026 को सत्ता संतुलन के लिहाज से बेहद निर्णायक साल माना जा रहा है।

Aaj Ka Rashifal 23 December 2025:मेष से मीन तक जानिए कैसा रहेगा आपका दिन

Aaj Ka Rashifal 23 December 2025: आज के दिन ग्रहों की चाल कई राशियों के लिए शुभ संकेत दे रही है, वहीं कुछ राशियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है। वर्तमान में गुरु मिथुन राशि में विराजमान हैं। केतु सिंह, बुध वृश्चिक, सूर्य-शुक्र-मंगल धनु, चंद्रमा मकर, राहु कुंभ और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। आइए जानते हैं 12 राशियों का आज का हाल—

मेष राशि:
आज कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में सफलता मिलने के योग हैं। पैतृक संपत्ति में इजाफा हो सकता है। व्यापार और राजनीति से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। सेहत, प्रेम और कारोबार तीनों ही क्षेत्रों में स्थिति बेहद मजबूत रहेगी। नीली वस्तु का दान शुभ रहेगा।

वृषभ राशि:
भाग्य आपका पूरा साथ देगा। यात्रा के योग बन रहे हैं और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। मान-सम्मान को लेकर थोड़ी सावधानी रखें। स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार संतोषजनक रहेंगे। नीली वस्तु अपने पास रखें।

मिथुन राशि:
आज चोट या किसी परेशानी में फंसने की आशंका है, इसलिए सतर्क रहें। परिस्थितियां थोड़ी प्रतिकूल रह सकती हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, जबकि प्रेम, संतान और व्यापार की स्थिति अच्छी बनी रहेगी। काली जी को प्रणाम करें और नीली वस्तु साथ रखें।

कर्क राशि:
नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन अनुकूल है। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और विवाहित लोगों को जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। कुल मिलाकर स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार शानदार रहेंगे। नीली वस्तु का दान करना लाभकारी होगा।

सिंह राशि:
दिन में थोड़ी अशांति रह सकती है। शत्रु सक्रिय रहेंगे, लेकिन अंततः जीत आपकी होगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा। प्रेम और संतान का सहयोग मिलेगा। व्यापार भी अच्छा चलेगा। नीली वस्तु का दान करें।

कन्या राशि:
भावनाओं में बहने से बचें और अध्ययन या लेखन जैसे कार्यों में समय लगाएं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। प्रेम और संतान पक्ष मध्यम रह सकता है। व्यापार में स्थिरता रहेगी। शनिदेव को प्रणाम करना शुभ रहेगा।

तुला राशि:
घर-परिवार में तनाव के संकेत हैं, लेकिन भौतिक सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी। स्वास्थ्य, प्रेम, संतान और व्यापार सभी क्षेत्रों में स्थिति अच्छी रहेगी। नीली वस्तु पास रखें।

वृश्चिक राशि:
आपका साहस और पराक्रम रंग लाएगा। रोजगार और व्यवसाय में उन्नति होगी। स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं। प्रेम, संतान और व्यापार सभी पक्ष मजबूत रहेंगे। पीली वस्तु का दान शुभ रहेगा।

धनु राशि:
परिवार में खुशहाली बढ़ेगी और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। जुआ, सट्टा या लॉटरी से दूरी बनाए रखें। स्वास्थ्य, प्रेम, संतान और व्यापार में सुधार रहेगा। नीली वस्तु का दान करें।

मकर राशि:
आपकी सौम्यता और आकर्षण लोगों को प्रभावित करेगा। जरूरत की चीजें आसानी से उपलब्ध होंगी। स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा। प्रेम और संतान से थोड़ी दूरी महसूस हो सकती है। व्यापार अच्छा रहेगा। काली जी को प्रणाम करें।

कुंभ राशि:
मन में चिंता बनी रह सकती है और खर्च बढ़ने की संभावना है। सिरदर्द या आंखों से जुड़ी परेशानी हो सकती है। प्रेम, संतान और व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। हरी वस्तु अपने पास रखें।

मीन राशि:
यात्रा के योग बन रहे हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और कोई शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार तीनों ही क्षेत्रों में दिन बेहद अनुकूल रहेगा। नीली वस्तु का दान करें।

योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: प्रयागराज-भदोही में नए पुल, डॉक्टर भर्ती बोर्ड समेत 25 प्रस्तावों को मंजूरी

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास से जुड़े 25 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में प्रयागराज और भदोही में नए पुलों के निर्माण, मदरसा शिक्षकों के वेतन भुगतान से जुड़े विधेयक को वापस लेने, भदोही में नए विश्वविद्यालय की स्थापना और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुपूरक बजट जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

भदोही में बनेगा काशी नरेश विश्वविद्यालय

कैबिनेट ने उच्च शिक्षा विभाग के दो बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। भदोही स्थित काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय को राज्य विश्वविद्यालय के रूप में उच्चीकृत किया जाएगा। इसके लिए राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 में संशोधन को स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावा शाहजहांपुर में मुमुक्षु आश्रम ट्रस्ट की इकाइयों को एकीकृत कर स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है।

गोरखपुर को मिलेगा प्रदेश का पहला वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय

कैबिनेट ने गोरखपुर में उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को भी मंजूरी दी। यह विश्वविद्यालय 50 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर स्थापित होगा, जिसकी अनुमानित लागत 621.26 करोड़ रुपये है। यहां बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

काशी-विंध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन

पूर्वांचल के सुनियोजित विकास के लिए काशी-विंध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी गई। इसमें वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र जिले शामिल होंगे।

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करीब 2 करोड़ की आबादी वाले इस क्षेत्र का कुल दायरा 23,815 वर्ग किलोमीटर होगा। इससे बुनियादी सुविधाओं का विस्तार और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए बनेगा अलग बोर्ड

प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल कॉलेजों के असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करने के लिए उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षा भर्ती बोर्ड के गठन को मंजूरी दी गई। अब इन भर्तियों के लिए राज्य लोक सेवा आयोग पर निर्भर नहीं रहना होगा।

विकास प्राधिकरणों की पुरानी संपत्तियां 25% सस्ती होंगी

कैबिनेट ने वर्षों से अनिस्तारित पड़ी 22,350 संपत्तियों को 25 प्रतिशत तक कम दर पर बेचने की अनुमति दे दी है।
नई नीति के तहत पार्क फेसिंग, कार्नर और चौड़ी सड़क वाली संपत्तियों पर अतिरिक्त चार्ज घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे आम लोगों को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध हो सकेगा।

कृषि विभाग के फार्म लीज पर देने को मंजूरी

पीलीभीत और बाराबंकी स्थित कृषि विभाग के फार्मों को लीज पर देने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। जिसमे बाराबंकी की भूमि भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड एवं पीलीभीत का कृषि प्रक्षेत्र एपीडा को 70 वर्षों के लिए दिया जाएगा

आजमगढ़ में नई आवासीय योजना के लिए 100 करोड़

मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत आजमगढ़ विकास प्राधिकरण को नई आवासीय योजना के लिए 100 करोड़ रुपये की सीड कैपिटल स्वीकृत की गई है।

43 जिलों में रेसिपी आधारित पुष्टाहार

प्रदेश के 43 जिलों में यूपीएसआरएलएम के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाएगा। शेष जिलों में अंतरिम व्यवस्था के तहत नैफेड आपूर्ति करेगा।

कामकाजी महिलाओं के लिए 8 नए हॉस्टल

लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद में आठ कामकाजी महिला हॉस्टल बनाए जाएंगे। इसके लिए विकास प्राधिकरण एक रुपये सालाना लीज पर जमीन उपलब्ध कराएंगे।

नोएडा में एक्सचेंज भूमि धारकों को बड़ी राहत

नोएडा में बदले के आधार पर भूमि पाने वालों को अब नक्शा पास कराने के लिए कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा। नई नियमावली के तहत नोएडा प्राधिकरण सीधे मानचित्र स्वीकृत करेगा।

कोडीन सिरप मामले में सीएम योगी का सपा पर तीखा हमला, विधानसभा में दिखाईं तस्वीरें

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। चर्चा के दौरान सीएम ने आरोप लगाया कि इस पूरे नेटवर्क के तार समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोपियों के नाम लेते हुए कहा कि बर्खास्त पुलिसकर्मी आलोक और अमित का सीधा संबंध सपा से है।

विधानसभा में हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि आरोपियों में शामिल अमित यादव की अखिलेश यादव के साथ तस्वीरें मौजूद हैं। यह कहते हुए उन्होंने सदन में फोटो दिखाकर विपक्ष को घेरा। सीएम ने कहा कि माफिया और अवैध कारोबार से किसके संबंध हैं, यह किसी से छिपा नहीं है।

मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि इस केस का मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल भी समाजवादी पार्टी से जुड़ा रहा है और वह सपा के पूर्व प्रत्याशी अमित यादव का कारोबारी साझेदार है। अमित यादव वाराणसी कैंट से सपा का प्रत्याशी रह चुका है। इस दौरान सपा विधायकों ने लगातार विरोध दर्ज कराया, लेकिन सीएम ने अपना बयान जारी रखा।

सीएम ने बताया कि इस नेटवर्क में मिलिंद यादव भी शामिल है, जो शुभम जायसवाल का करीबी बताया जा रहा है। मिलिंद यादव का मोबाइल नंबर शैली ट्रेडर्स के जीएसटी रजिस्ट्रेशन में दर्ज है, जिससे पूरे गिरोह की कड़ियां जुड़ती हैं।

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गौरतलब है कि विधानसभा में अनुपूरक बजट के साथ नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने नियम 56 के तहत कोडीन सिरप की अवैध तस्करी पर चर्चा की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो बुलडोजर की कार्रवाई भी होगी।

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश इस मामले में देश का पहला राज्य है, जहां इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि अब तक 332 दुकानों पर छापेमारी हुई है, जिनमें से 136 के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक 77 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और बाकी की तलाश जारी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन सिरप के दुरुपयोग से किसी की मौत नहीं हुई है, जबकि राज्य के बाहर ऐसे मामले सामने आए हैं। उन्होंने वाराणसी, सहारनपुर, गाजियाबाद, कानपुर और लखनऊ के कुछ थोक विक्रेताओं के नाम भी सदन में लिए और कहा कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है।

विपक्ष के शोरगुल के बीच सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोग इस सिरप का इस्तेमाल नशे और मनोरंजन के लिए कर रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और एक भी अपराधी कानून से नहीं बचेगा।

कफ सिरप केस में CM योगी का सपा पर कड़ा प्रहार, बोले– किसी को फातिहा पढ़ने लायक भी नहीं छोड़ेंगे

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- कफ सिरप से जुड़े अवैध कारोबार को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मुख्यमंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकार की कार्रवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई लोग फातिहा पढ़ने जाएंगे, लेकिन सरकार ऐसी सख्त कार्रवाई करेगी कि किसी को फातिहा पढ़ने लायक भी नहीं छोड़ा जाएगा।

सीएम योगी ने बताया कि इस मामले में अब तक 77 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और कोई भी अपराधी कानून से बच नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी लॉ एंड ऑर्डर की अध्यक्षता में एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है और जांच लगातार जारी है।

उत्तर प्रदेश में कफ सिरप से मौत का कोई मामला नहीं: CM

मुख्यमंत्री ने सपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कफ सिरप से संबंधित एक भी मौत उत्तर प्रदेश में दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई वर्तमान सरकार ने की है, जबकि लाइसेंस देने का काम पूर्ववर्ती सपा सरकार के दौरान हुआ था।

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सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि जिस कोडीन युक्त कफ सिरप की चर्चा हो रही है, उसका उत्पादन उत्तर प्रदेश में नहीं होता। इसका आवंटन सेंट्रल नारकोटिक्स ब्यूरो द्वारा किया जाता है। यूपी में केवल स्टॉकिस्ट और होलसेलर हैं, जिन्होंने सिरप का गैरकानूनी डायवर्जन राज्य से बाहर किया।

332 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी, 136 फर्मों पर NDPS एक्ट

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूपी में इस मामले में एफएसडीए विभाग पहले से कार्रवाई कर रहा था। अब तक 332 प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की जा चुकी है और 136 फर्मों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई हुई है। कुछ आरोपियों ने अदालत का रुख किया था, लेकिन कोर्ट ने यूपी सरकार की कार्रवाई को सही ठहराया।

उन्होंने कहा कि NDPS एक्ट के तहत आरोपियों को 10 से 20 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही प्रदेशभर में एक हजार से अधिक कफ सिरप के नमूने अलग-अलग स्थानों से लिए गए हैं।

माफिया से किसके संबंध हैं, सब जानते हैं: योगी

सीएम योगी ने कहा कि यह किसी से छिपा नहीं है कि माफिया से किसके संबंध रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश का बड़ा स्टॉकिस्ट शुभम अग्रवाल, अमित यादव का साझीदार रहा है और अमित यादव का संबंध समाजवादी पार्टी से है। मुख्यमंत्री ने सदन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ उसकी एक तस्वीर का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सपा इस मामले में आरोपियों का बचाव कर रही है।

हालांकि मुख्यमंत्री के आरोपों पर समाजवादी पार्टी के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और आरोपों को निराधार बताया। इस पर सीएम योगी ने कहा कि सच कड़वा होता है और आप लोग सच सुनने के आदी नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार को किसी से पूछकर कार्रवाई नहीं करनी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम जारी रहेंगे।

देश में दो नमूने, एक दिल्ली और एक लखनऊ में: CM योगी का तीखा हमला, सपा का हंगामा

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कोडीन कफ सिरप को लेकर सपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच कड़ा शब्दों का टकराव देखने को मिला। सीएम ने बिना किसी का नाम लिए समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि देश में राजनीति के दो नमूने हैं, एक दिल्ली में और दूसरा लखनऊ में। जब भी देश में किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा होती है, ये दोनों देश छोड़कर चले जाते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा ही आपके ‘बबुआ’ (अखिलेश यादव) के साथ भी होगा, जो इंग्लैंड की सैर पर निकल जाएंगे और सपा विधायक सदन में चिल्लाते रह जाएंगे।

सपा का हंगामा और सदन से वॉकआउट

सीएम की टिप्पणी के बाद सपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद ने कहा कि सीएम की भाषा पक्ष के अनुरूप नहीं है। हालांकि स्पीकर ने सदन में स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया है। इसके बावजूद सपा विधायक संतुष्ट नहीं हुए और सदन से वॉकआउट कर गए।

कोडीन कांड में सपा नेता का नाम सामने

योगी आदित्यनाथ ने कोडीन कफ सिरप मामले की परतें खोली। उन्होंने बताया कि इस अवैध कारोबार में लोहिया वाहिनी के एक बड़े नेता के खाते से करोड़ों रुपये के गैरकानूनी लेन-देन के प्रमाण मिले हैं।

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सीएम ने कहा कि एसटीएफ जांच में जुटी है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, समाजवादी पार्टी से जुड़े और भी चेहरे सामने आएंगे।

2016 में सपा सरकार ने दी थी लाइसेंस

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि जिस बड़े होलसेलर को एसटीएफ ने पकड़ा था, उसे 2016 में सपा सरकार ने लाइसेंस जारी किया था। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप का निर्माण नहीं होता, केवल स्टॉकिस्ट और होलसेलर हैं। मौत के मामलों में तमिलनाडु में बने सिरप के कारण अन्य राज्यों में मृत्यु हुई।

सपा के हंगामे पर चुटकी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा विधायक पढ़ाई-लिखाई से दूर हैं, इसलिए केवल चिल्लाते रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला नकली दवा का नहीं, बल्कि अवैध डायवर्जन का है। होलसेलर्स ने सिरप को उन क्षेत्रों में पहुंचाया जहाँ शराबबंदी है, ताकि नशे के आदी इसका गलत इस्तेमाल कर सकें।

सरकारी कार्रवाई और बुलडोजर चेतावनी

सीएम ने बताया कि अब तक 79 अभियोग दर्ज, 225 अभियुक्त नामजद, और 78 की गिरफ्तारी हो चुकी है। कुल 134 फर्मों पर छापेमारी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि कोडीन के अवैध कारोबार पर NDPS एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जाएगा और समय आने पर बुलडोजर कार्रवाई भी की जाएगी।

CM योगी का कड़ा संदेश: कफ सिरप मामले में अवैध कारोबार पर बुलडोजर कार्रवाई का ऐलान

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में कफ सिरप विवाद को लेकर हंगामा देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समय आने पर अवैध कारोबारियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई भी की जाएगी।

सपा के विधायक कफ सिरप से होने वाली मौतों और अवैध व्यापार को लेकर सवाल उठा रहे थे। इस पर CM योगी ने कहा कि पहले पूरी जानकारी लेकर सवाल उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोडीन कफ सिरप से प्रदेश में कोई मौत नहीं हुई है और जिन मामले सामने आए हैं, वे तमिलनाडु जैसे अन्य राज्यों के हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2016 में सबसे बड़े होलसेलर को सपा सरकार ने लाइसेंस दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कोडीन कफ सिरप का निर्माण नहीं होता, केवल स्टॉकिस्ट हैं। नकली और नशीली दवाओं के कारोबार को रोकने के लिए सरकार समय-समय पर छापेमारी और कार्रवाई करती रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अवैध कारोबारियों के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई जीतकर उन्हें रोकने का रास्ता साफ किया है। अब NDPS एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।

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योगी ने कहा कि जांच में कई मामलों में सपा से जुड़े नेताओं या उनके समर्थकों का नाम सामने आया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ ट्रांजेक्शन लोहिया वाहिनी नेता के खाते से हुई थी और एसटीएफ मामले की छानबीन कर रही है।

सीएम ने साफ किया कि सरकार नकली दवा माफियाओं और अवैध कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब बुलडोजर कार्रवाई होगी, तब चिल्लाने की जरूरत नहीं। योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि जनता की जान से खिलवाड़ करने वालों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।

पीएम मोदी की ओर से अजमेर दरगाह के लिए चादर भेजने पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- सुप्रीम कोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह को चादर भेजने के कदम के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच के समक्ष यह याचिका पेश हुई। याचिकाकर्ता ने तत्काल सुनवाई की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

याचिका में बताया गया है कि पीएम मोदी की ओर से ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाई जाएगी। यह 814वें सालाना उर्स के अवसर पर होना था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू इस चादर को पीएम मोदी की ओर से चढ़ाएंगे।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अजमेर दरगाह पर चादर चढ़ाना उचित नहीं है क्योंकि यह स्थान पहले भगवान शिव के मंदिर का हिस्सा था और इस मामले में अदालत में याचिकाएं लंबित हैं। इसलिए पीएम मोदी की ओर से भेजी गई चादर पर रोक लगाई जाए और इस पर तत्काल सुनवाई हो।

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस पर कहा कि आज इस मामले पर सुनवाई संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में भी विभिन्न प्रधानमंत्रियों द्वारा अजमेर दरगाह के लिए चादर भेजी जाती रही है और पीएम मोदी ने भी इस परंपरा को जारी रखा है। इसी तरह की याचिका अजमेर की स्थानीय अदालत में भी दाखिल की गई थी।

हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि विवादित स्थल पर चादर चढ़ाने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और फेयर ट्रायल का अधिकार बाधित हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अजमेर दरगाह को लेकर पुराने समय से विवाद रहे हैं और कुछ पक्षों ने ASI सर्वे की मांग भी की है।