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Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार का प्लेन क्रैश, लैंडिंग के समय हुआ हादसा

Ajit Pawar Plane Crash News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े एक विमान हादसे की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि बुधवार को बारामती में लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में कई लोगों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

घटनास्थल से सामने आई तस्वीरों में विमान एक खेत में गिरा हुआ दिखाई दे रहा है, जहां से धुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है। राहत और बचाव कार्य जारी बताया जा रहा है। हालांकि, अब तक अजित पवार की स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे बारामती

सूत्रों के अनुसार, डिप्टी सीएम अजित पवार किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बारामती पहुंचे थे। बारामती को पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। अजित पवार इसी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं।

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2025 विधानसभा चुनाव में दर्ज की थी जीत

गौरतलब है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में अजित पवार ने अपने भतीजे युगेंद्र पवार को हराकर जीत हासिल की थी। हादसे की खबर के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

फिलहाल प्रशासन या डिप्टी सीएम कार्यालय की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। घायलों की संख्या और हादसे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। अधिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

नोट: यह खबर शुरुआती सूचनाओं पर आधारित है। आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

चार धाम यात्रा पर स्थिति स्पष्ट, हिंदुओं के साथ सिख, बौद्ध और जैन श्रद्धालुओं को ही मिलेगा प्रवेश

Char Dham Yatra Update: उत्तराखंड के चार धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर अब स्थिति साफ हो गई है। गंगोत्री मंदिर समिति और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने स्पष्ट किया है कि चारधाम में केवल हिंदू धर्म के अनुयायी और सनातन परंपरा से जुड़े सिख, जैन व बौद्ध श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति होगी।

बीकेटीसी ने बताया निर्णय का आधार

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम किसी पर्यटन स्थल की तरह नहीं हैं, बल्कि ये सनातन संस्कृति के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार सिख, जैन और बौद्ध धर्म सनातन परंपरा का हिस्सा माने जाते हैं, जबकि अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपनी परंपराओं और पूजा-पद्धतियों की रक्षा का अधिकार देता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही धार्मिक मर्यादा, अनुशासन और पवित्रता को बनाए रखने के लिए लिया गया है। उत्तराखंड में पर्यटन के लिए कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन धामों की धार्मिक पहचान से समझौता नहीं किया जा सकता।

गंगोत्री मंदिर समिति का समर्थन

गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि हिंदू श्रद्धालुओं के साथ सिख समाज के लोग भी दर्शन कर सकते हैं। जो लोग हिंदू धर्म और उसकी मान्यताओं में आस्था रखते हैं और उसका सम्मान करते हैं, उन्हें दर्शन की अनुमति दी जाएगी।

धार्मिक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत

चारधाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के प्रस्ताव का कई धार्मिक संगठनों ने समर्थन किया है। श्री केदार सभा, श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत समेत अन्य सनातन संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। श्री गंगोत्री और श्री यमुनोत्री मंदिर समितियों ने भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर दिया है।

पुरानी परंपरा का औपचारिक ऐलान

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पहले से ही प्रतिबंधित रहा है। यह कोई नया नियम नहीं, बल्कि प्राचीन परंपरा का औपचारिक पालन है। उन्होंने कहा कि यह सवाल किसी के धर्म का नहीं, बल्कि आस्था का है।

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बतादेंकि जैसे मस्जिद और चर्च में धार्मिक अनुशासन होता है, वैसे ही मंदिरों की भी अपनी मर्यादा है। अदालतें भी स्पष्ट कर चुकी हैं कि मंदिर में प्रवेश सामान्य नागरिक अधिकार नहीं, बल्कि धार्मिक आचरण से जुड़ा विषय है।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने भी ठहराया सही

देहरादून में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस फैसले को उचित बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की देवी-देवताओं में आस्था नहीं है, उनका चारधाम आने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सख्त कदम उठाना समय की जरूरत है।

Aaj Ka Rashifal 28 January 2026: जानिए सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन

Aaj Ka Rashifal 28 January 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों और नक्षत्रों की चाल का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन पर पड़ता है। आज सोमवार, 28 जनवरी को चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित हैं। वहीं गुरु मिथुन, केतु सिंह, सूर्य-बुध-शुक्र-मंगल मकर, राहु कुंभ और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। आइए जानते हैं, मेष से लेकर मीन राशि तक आज का राशिफल—

मेष राशि

आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी, खासतौर पर लिक्विड फंड में बढ़ोतरी के योग हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। सेहत पहले से बेहतर रहेगी। प्रेम, संतान और व्यापार के लिहाज से दिन शुभ है। हालांकि, आज निवेश से बचना बेहतर होगा। काली माता को प्रणाम करना लाभकारी रहेगा।

वृषभ राशि

आज सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर दिन रहेगा। आप लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेंगे और सामाजिक स्तर पर प्रशंसा मिलेगी। स्वास्थ्य में सुधार होगा। प्रेम, संतान और व्यापार में अनुकूलता बनी रहेगी। काली माता की आराधना शुभ फल देगी।

मिथुन राशि

खर्चों में बढ़ोतरी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य, प्रेम, संतान, व्यापार और सरकारी मामलों में सतर्कता जरूरी है। पिता से जुड़े विषयों में भी सावधानी रखें। आज का दिन अनुकूल नहीं कहा जा सकता। सूर्य को जल अर्पित करना शुभ रहेगा।

कर्क राशि

आय के नए स्रोत बनेंगे और पुराने माध्यमों से भी धन लाभ होगा। यात्रा के योग हैं और कोई शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार अच्छा रहेगा। जीवनसाथी के साथ थोड़ी दूरी महसूस हो सकती है, जिसे संयम से सुलझाएं। लाल रंग की वस्तु साथ रखें।

सिंह राशि

शत्रुओं पर विजय मिलेगी, हालांकि विरोधी सक्रिय रहेंगे। व्यापार में मजबूती आएगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिल सकती है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। प्रेम और संतान का सहयोग मिलेगा। सूर्य को जल अर्पित करना लाभकारी रहेगा।

कन्या राशि

भाग्य का साथ मिलेगा और यात्रा के योग बनेंगे। प्रेम और संतान से जुड़े मामलों में थोड़ी सावधानी रखें। क्रोध और भावुकता पर नियंत्रण रखना जरूरी है। बाकी क्षेत्रों में स्थिति संतोषजनक रहेगी। शनिदेव को प्रणाम करना शुभ होगा।

तुला राशि

आज परिस्थितियां कुछ प्रतिकूल रह सकती हैं। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और वाहन सावधानी से चलाएं। घरेलू सुख में कमी महसूस हो सकती है। मां के स्वास्थ्य और भूमि-भवन से जुड़े मामलों में सतर्कता जरूरी है। काली माता की पूजा लाभ देगी।

वृश्चिक राशि

आज आपका पराक्रम रंग लाएगा। नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग हैं। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी। दिन आनंददायक रहेगा। सफेद वस्तु का दान करना शुभ होगा।

धनु राशि

शत्रुओं पर नियंत्रण बना रहेगा, लेकिन स्वास्थ्य और कार्यक्षेत्र को लेकर थोड़ी परेशानी हो सकती है। प्रेम, संतान और व्यापार की स्थिति अच्छी रहेगी। लाल रंग की वस्तु पास रखें।

मकर राशि

क्रोध पर नियंत्रण रखना आज बेहद जरूरी है। प्रेम, संतान और व्यापार के लिए दिन बेहद अनुकूल है। विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा है। भावनाओं में बहने से बचें। काली माता को प्रणाम करना शुभ रहेगा।

कुंभ राशि

आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। प्रेम और संतान से दूरी महसूस हो सकती है। सरकारी कामों और साझेदारी में अड़चन आ सकती है। सिर दर्द, आंखों की समस्या और कर्ज से तनाव संभव है। हालांकि भूमि-भवन या वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं। गणेश जी की पूजा करें।

मीन राशि

आय के लिहाज से समय बेहद अनुकूल है। नए और अलग-अलग स्रोतों से धन लाभ होगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। प्रेम, संतान और व्यापार में सफलता मिलेगी। पराक्रम से व्यावसायिक क्षेत्र में नई उपलब्धि मिल सकती है। काली माता को प्रणाम करना शुभ रहेगा।

कौन हैं इस्तीफा देने वाले अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह, राजनीति से प्रशासन तक का सफर:

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- शंकराचार्य विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में इस्तीफा देकर सुर्खियों में आए अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं रहे हैं, बल्कि उनका राजनीतिक और सामाजिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उनके इस्तीफे ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचाई, बल्कि उनके गांव और परिवार को भी चौंका दिया है।

प्रशांत कुमार सिंह मूल रूप से मऊ जिले के सरायलखंसी क्षेत्र स्थित सरवां गांव के निवासी हैं। उनके इस्तीफे की खबर जब गांव पहुंची, तो लोग हैरान रह गए। खुद उनके पिता त्रिपुरारी सिंह भी इस फैसले से स्तब्ध हैं। उन्होंने बताया कि बेटे ने कभी इस तरह के कदम का संकेत नहीं दिया था।

राजनीति से जुड़ाव और शुरुआती सफर

बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रशांत कुमार सिंह प्रशासनिक सेवा में आने से पहले राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। वर्ष 2011 में वह वरिष्ठ नेता अमर सिंह की पार्टी लोकमंच से जुड़े और मऊ जिले के जिलाध्यक्ष बनाए गए। करीब एक वर्ष से अधिक समय तक उन्होंने यह जिम्मेदारी निभाई। इससे पहले वह पीस पार्टी से भी जुड़े रहे और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थे।

हालांकि राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद प्रशांत का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे और अंततः PCS परीक्षा में सफलता हासिल की।

शिक्षा और संघर्ष की कहानी

प्रशांत कुमार सिंह की शुरुआती शिक्षा आंबेडकर नगर के टांडा में हुई। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई उन्होंने वहीं से की। उस समय उनके पिता त्रिपुरारी सिंह NTPC में कार्यरत थे। बाद में पिता ने मऊ जिले में बिजली विभाग में लिपिक के पद पर कई वर्षों तक सेवा दी।

प्रशांत ने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से पूरी की। पढ़ाई के बाद वह मऊ लौट आए और यहां कोचिंग संस्थान चलाने लगे। वह छात्रों को पढ़ाते थे और साथ ही परिवार के लिए घर पर खटाल यानी दूध के कारोबार में भी हाथ बंटाते थे। इन जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने कभी अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी नहीं छोड़ी।

वर्ष 2014-15 में उन्होंने PCS परीक्षा दी, जिसमें उनका चयन वाणिज्य कर (Commercial Tax) विभाग में अधिकारी के पद पर हुआ। बाद में GST लागू होने के बाद वह डिप्टी कमिश्नर के पद तक पहुंचे और वर्तमान में अयोध्या में तैनात थे।

परिवार की मजबूत शैक्षणिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि

प्रशांत कुमार सिंह का परिवार शिक्षा और सेवा क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह लखनऊ में चिकित्सक हैं और वहां अपना निजी क्लीनिक संचालित करते हैं। उनकी बहन जया सिंह कुशीनगर जिले के हाटा तहसील में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं।

प्रशांत की शादी गाजीपुर जिले में हुई है। उनकी पत्नी का नाम बीना सिंह है और उन्हें दो बेटियां हैं। उनके मित्र और बरपुर निवासी अधिवक्ता अनोखे श्रीवास्तव के अनुसार, प्रशांत हमेशा से सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं।

इस्तीफे से गांव में हलचल

शंकराचार्य विवाद में योगी और मोदी के समर्थन में दिया गया उनका इस्तीफा गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस फैसले को उनके वैचारिक दृढ़ता से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल उनका इस्तीफा स्वीकार होना बाकी है, लेकिन उनके इस कदम ने उन्हें एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

यूपी में मंत्री के बेटे की कार ने बाइक सवारों को रौंदा, एक की मौत; भीड़ पर पिस्टल तानने का आरोप

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जाखलौन थाना क्षेत्र के ग्राम बरखेरा के पास सोमवार देर रात एक तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार तीन ग्रामीणों को कुचल दिया। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोप है कि कार राज्य मंत्री मनोहरलाल पंथ के पुत्र नरेश पंथ चला रहे थे। हादसे के बाद मौके पर जुटी भीड़ को धमकाने के लिए पिस्टल तानने का भी आरोप लगाया गया है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बरखेरा निवासी 21 वर्षीय शिवेंद्र यादव, 50 वर्षीय शंकर यादव और 19 वर्षीय अनुज यादव गांव के ही एक मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। सोमवार देर रात तीनों युवक बाइक से घर लौटने की तैयारी कर रहे थे और बाइक स्टार्ट कर रहे थे, तभी देवगढ़ से ललितपुर की ओर जा रही एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार इतनी तेज थी कि बाइक के साथ तीनों युवक सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। कार पर “विधायक” लिखा हुआ था, जिससे मौके पर मौजूद ग्रामीणों में आक्रोश और भय दोनों फैल गया। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग घटनास्थल पर जमा हो गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने कार सवार लोगों को रोकने का प्रयास किया तो आरोपितों ने पिस्टल निकालकर भीड़ की ओर तान दी। ग्रामीणों का कहना है कि असलहा लहराते हुए जान से मारने की धमकी दी गई, जिसके बाद कार सवार मौके से फरार हो गए। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिसके चलते शीशा तोड़कर अंदर बैठे लोग बाहर निकले और भाग निकले।

घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों की मदद से तीनों घायलों को जिला चिकित्सालय ललितपुर ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने 21 वर्षीय शिवेंद्र यादव को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल शंकर यादव और अनुज यादव को प्राथमिक उपचार के बाद झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह ने बताया कि जिस कार से दुर्घटना हुई है, वह राज्य मंत्री मनोहरलाल पंथ की पत्नी के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस ने वाहन को कब्जे में ले लिया है और मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

मृतक शिवेंद्र के चाचा राजपाल यादव की तहरीर पर पुलिस ने मंत्री के बेटे नरेश पंथ के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में तनाव का माहौल है। बड़ी संख्या में ग्रामीण थाने पहुंचे और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।

फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि दुर्घटना के समय वाहन कौन चला रहा था और पिस्टल तानने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और राजनीतिक हलकों में भी इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

UGC वापस हो या इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए, अयोध्या के परमहंस आचार्य ने PM मोदी को लिखा पत्र

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो चुके हैं और अब यह मुद्दा साधु-संत समाज तक पहुंच गया है। इसी कड़ी में विश्व हिंदू सिख महापरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

अपने पत्र में परमहंस आचार्य ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े नए नियमों और प्रस्तावों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। उनके इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक, धार्मिक और शैक्षणिक हलकों में हलचल मच गई है।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पत्र में UGC की नई नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से देश की शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने लिखा कि नए नियमों के जरिए शिक्षा प्रणाली को कमजोर किया जा रहा है और युवाओं को वैचारिक रूप से भ्रमित करने का प्रयास हो रहा है।

पत्र में परमहंस आचार्य ने कहा है कि UGC की नीतियां भारत की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चेतना के खिलाफ हैं। उनका दावा है कि इन नियमों से राष्ट्रविरोधी सोच को बढ़ावा मिल रहा है और समाज के पारंपरिक मूल्यों पर चोट पहुंच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंच रहा है, जिसका असर आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है।

अपने पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी अपील करते हुए लिखा है कि या तो UGC के नए नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रहित में की जा रही है।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस विषय पर कोई ठोस और स्पष्ट निर्णय नहीं लेती है, तो उनका विरोध और अधिक तीव्र होगा। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं और इसे लेकर पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।

UGC नियमों को लेकर पहले से ही प्रदेश और देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और कुछ धार्मिक संगठनों ने इन नियमों को लेकर आपत्ति जताई है। अयोध्या से सामने आया यह पत्र विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

फिलहाल केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों और मांगों से UGC नियमों पर चल रही राष्ट्रीय बहस और तेज हो सकती है।

‘योगी विरोधी खुशफहमी न पालें’, शंकराचार्य विवाद पर उमा भारती की सफाई, दो पोस्ट में किया रुख स्पष्ट

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच जारी टकराव के बीच अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर भी अलग-अलग स्वर सुनाई देने लगे हैं। इस विवाद पर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने खुलकर अपनी राय रखी है। हालांकि, उनके बयान के बाद पैदा हुई राजनीतिक अटकलों को शांतड्ढते हुए उमा भारती ने साफ किया है कि उनका कथन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नहीं है।

मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर उमा भारती ने करीब सात घंटे के अंतराल में दो पोस्ट साझा कीं। पहली पोस्ट में उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि दूसरी पोस्ट में उन्होंने “योगी विरोधी खुशफहमी न पालें” लिखते हुए अपनी स्थिति को स्पष्ट किया।

उमा भारती ने अपनी पहली पोस्ट में लिखा कि उन्हें विश्वास है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान जरूर निकलेगा। हालांकि, उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किसी व्यक्ति से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगने को मर्यादा और अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि किसी को शंकराचार्य मानने या न मानने का अधिकार केवल शंकराचार्य परिषद या विद्वत परिषद को है, न कि प्रशासन को।

उमा भारती ने लिखा, “मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा, किंतु प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, यह अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन है। यह अधिकार केवल शंकराचार्यों एवं विद्वत परिषद का है।”

इस पोस्ट के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं और इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बयान के तौर पर देखा जाने लगा। इसी को लेकर उमा भारती ने करीब सात घंटे बाद दूसरी पोस्ट कर सफाई दी।

दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “योगी विरोधी खुशफहमी न पालें। मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है। मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं। किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे, लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। यह कार्य केवल शंकराचार्य या विद्वत परिषद ही कर सकते हैं।”

गौरतलब है कि यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन तब शुरू हुआ था, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे और प्रशासन ने उन्हें रोक दिया था। इसके बाद से मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इस समय माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। उनकी मांग है कि प्रशासन मौनी अमावस्या के दिन की गई कार्रवाई के लिए माफी मांगे और उन्हें ससम्मान संगम स्नान की अनुमति दी जाए।

वहीं मेला प्रशासन की ओर से उन्हें दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन नोटिसों में उनसे यह पूछा गया है कि वह स्वयं को शंकराचार्य किस आधार पर कह रहे हैं। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो माघ मेले में शिविर के लिए दी गई भूमि वापस ली जा सकती है और उन्हें भविष्य में प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच उमा भारती का बयान भाजपा के अंदर संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने शंकराचार्य की मर्यादा का समर्थन भी किया और मुख्यमंत्री योगी के प्रति अपना सम्मान भी स्पष्ट कर दिया।

ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निकाला गया बाहर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बयान बना वजह

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- किन्नर अखाड़े से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। अभिनेत्री से साध्वी बनीं ममता कुलकर्णी उर्फ यमाई ममता गिरि को किन्नर अखाड़े से बाहर कर दिया गया है। यह कार्रवाई शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए गए उनके कथित विवादित बयान के बाद की गई है। इस फैसले की पुष्टि खुद किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने की है।

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने साफ शब्दों में कहा कि अब यमाई ममता गिरि का किन्नर अखाड़े से किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा किसी भी तरह के विवाद या विवादास्पद बयानों से खुद को दूर रखना चाहता है। अखाड़े की परंपराएं, अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि हैं और कोई भी सदस्य इन सीमाओं का उल्लंघन करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाती है।

आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा,“किन्नर अखाड़ा किसी भी प्रकार के विवाद को बढ़ावा नहीं देता। हमारे यहां अनुशासन और मर्यादा का पालन अनिवार्य है। ममता कुलकर्णी के बयान से धार्मिक और सामाजिक स्तर पर विवाद पैदा हुआ, जो अखाड़े की परंपराओं के खिलाफ है। इसलिए यह निर्णय लिया गया।”

बताया जा रहा है कि ममता कुलकर्णी द्वारा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया और धार्मिक हलकों में तेजी से वायरल हुआ था। इसके बाद अखाड़े पर भी सवाल उठने लगे थे। विवाद बढ़ने के साथ ही किन्नर अखाड़े की छवि और उसकी परंपराओं पर असर पड़ने लगा, जिसके बाद अखाड़ा नेतृत्व ने यह कठोर फैसला लिया।

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहला मौका नहीं है जब ममता कुलकर्णी के बयान विवाद का कारण बने हों। इससे पहले भी उनके कुछ वक्तव्यों को लेकर अखाड़े को आलोचनाओं और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। लगातार विवादों में नाम आने से अखाड़े की धार्मिक गरिमा प्रभावित हो रही थी।

उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा किसी एक व्यक्ति से बड़ा है और उसकी पहचान उसकी परंपराओं, साधना और सामाजिक भूमिका से है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तिगत विचार या बयान अखाड़े की सामूहिक छवि को नुकसान नहीं पहुंचा सकते।

गौरतलब है कि ममता कुलकर्णी, जो कभी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्री रही हैं, बाद में अध्यात्म की राह पर चली गईं और साध्वी के रूप में पहचानी जाने लगीं। किन्नर अखाड़े से जुड़ने के बाद वह धार्मिक कार्यक्रमों और आयोजनों में सक्रिय रूप से दिखाई देती थीं। हालांकि उनके कुछ बयानों को लेकर समय-समय पर विवाद भी सामने आते रहे हैं।

फिलहाल ममता कुलकर्णी की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं किन्नर अखाड़े ने साफ कर दिया है कि भविष्य में भी अनुशासन और मर्यादा से जुड़े मामलों में किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

इस फैसले के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे अखाड़े की सख्त अनुशासन नीति का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे हालिया धार्मिक विवादों से जोड़कर देख रहे हैं।

‘चित भी इनका और पट भी इनका’, UGC रूल्स 2026 को लेकर कांग्रेस नेता ने BJP पर जताया शक

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- UGC रूल्स 2026 को लेकर देशभर में मचे सियासी और सामाजिक घमासान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तर पश्चिम दिल्ली से पूर्व सांसद उदित राज ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ा आरोप लगाया है। उदित राज का कहना है कि इन नए नियमों से भाजपा को “डबल फायदा” हो सकता है और इसके पीछे एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति काम कर रही है।

उदित राज ने सवर्ण समाज की ओर से हो रहे विरोध को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इस विरोध में शामिल अधिकतर लोग भाजपा और आरएसएस के समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि विरोध के बावजूद सवर्ण समाज अंततः भाजपा को ही वोट देगा, जबकि दूसरी ओर दलित, ओबीसी और आदिवासी समुदाय इन नियमों से खुद को लाभान्वित मानते हुए भाजपा से संतुष्ट होंगे।

उन्होंने कहा, “UGC के नए नियम के पीछे कोई बड़ी राजनीतिक साजिश लगती है। जनरल कैटेगरी के छात्र और सवर्ण जाति के लोग इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन ये अधिकतर भाजपा और आरएसएस के समर्थक हैं। विरोध के बावजूद ये भाजपा को ही वोट देंगे। दूसरी तरफ दलित, ओबीसी और आदिवासी खुश हो जाएंगे। मतलब साफ है—‘चित भी इनका और पट भी इनका।’”

कांग्रेस नेता ने UGC रूल्स के खिलाफ उठ रही आवाजों को भी भाजपा की ही रणनीति करार दिया। उन्होंने वाराणसी में मंदिरों को तोड़े जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बड़े स्तर पर कोई विरोध नहीं हुआ। उदित राज ने सवाल किया कि यदि गैर-भाजपा सरकार होती, तो क्या ऐसा ही सन्नाटा देखने को मिलता?

उन्होंने कहा, “लगता है भाजपा ही अंदर से विरोध करवा रही है। वाराणसी में कितने मंदिर तोड़े गए, लेकिन क्या उसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ? अगर गैर-भाजपा सरकार होती तो शायद देशभर में आंदोलन होता। क्या अब दलित, ओबीसी और आदिवासी हिंदू नहीं रहे?”

इस बीच UGC रूल्स 2026 को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों ने इन नियमों को अपने खिलाफ बताते हुए दिल्ली, लखनऊ सहित कई शहरों में प्रदर्शन किए हैं। सोशल मीडिया पर भी नियमों के समर्थन और विरोध में तीखी बहस चल रही है।

मामला अब न्यायिक दायरे में भी पहुंच गया है। UGC के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को असंतुलित तरीके से परिभाषित किया गया है और कुछ वर्गों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है।

गौरतलब है कि UGC ने महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के उद्देश्य से 13 जनवरी को इन नए नियमों को अधिसूचित किया था। इन नियमों के तहत ओबीसी को भी जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में शामिल किया गया है। साथ ही, झूठी शिकायतों से जुड़े प्रावधान को हटा दिया गया है।

नियमों में ‘भेदभाव’ की परिभाषा को विस्तारित करते हुए कहा गया है कि धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता या इनमें से किसी भी आधार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किया गया अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार भेदभाव माना जाएगा। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों को जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर अलग शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित करने से भी रोका गया है।

UGC रूल्स 2026 को लेकर जहां एक ओर सामाजिक असंतोष दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बताया जा रहा है। ऐसे में उदित राज का यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है।

UGC रूल्स 2026 को लेकर बढ़ते बवाल पर पहली बार बोली मोदी सरकार, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया भरोसा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- UGC रूल्स 2026 को लेकर देशभर में मचे विरोध के बीच अब केंद्र सरकार की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस विवाद पर बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि इन नियमों का न तो किसी के खिलाफ दुरुपयोग होने दिया जाएगा और न ही किसी प्रकार का भेदभाव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रक्रियाएं संविधान के दायरे में रहें।

देश के कई हिस्सों में UGC नियमों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। खासतौर पर सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों ने इन नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई है और आरोप लगाया है कि इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है। इस बीच शिक्षा मंत्री का यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा का एक बड़ा वोट बैंक सवर्ण समाज से जुड़ा रहा है और इस मुद्दे को लेकर पार्टी की मुश्किलें बढ़ने की चर्चा हो रही है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “मैं बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। कोई भेदभाव नहीं होगा। UGC, भारत सरकार और राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी होगी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। मैं साफ कहना चाहता हूं कि किसी के साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा।”

उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि भेदभाव के नाम पर किसी को भी कानून का गलत या बेजा इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने दो टूक कहा कि हर निर्णय संविधान के दायरे में ही लिया जाएगा और किसी को भी नियमों का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं होगा।

UGC रूल्स 2026 का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। विरोध का असर अब सियासी और प्रशासनिक स्तर पर भी दिखने लगा है। भाजपा के ही कई नेताओं ने रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। लखनऊ और दिल्ली में इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं और आगे भी आंदोलन तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

इसी कड़ी में बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे शंकराचार्य के अपमान और UGC रूल्स को प्रमुख कारण बताया है। प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इस तरह का कदम उठाए जाने से मामला और संवेदनशील हो गया है।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने UGC रूल्स को वापस लेने या उसमें संशोधन करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन नियमों से सामाजिक तनाव बढ़ रहा है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।

वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने UGC रूल्स का समर्थन किया है और कहा है कि नियमों को पूरे संदर्भ में समझा जाना चाहिए। उन्होंने विरोध को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट या आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा जारी है।

फिलहाल केंद्र सरकार के इस बयान के बाद यह देखना अहम होगा कि UGC रूल्स 2026 में कोई संशोधन होता है या नहीं और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस पूरे विवाद का क्या समाधान निकलता है।