Home Blog Page 126

बरेली में अलंकार अग्निहोत्री को ले गई पुलिस, समर्थकों की पुलिस से झड़प, लगे नारे

बरेली/सर्वोदय न्यूज़:- ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुकों के साथ कथित मारपीट और यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को पुलिस उनके सरकारी आवास से किसी अन्य स्थान पर ले गई। इस दौरान बड़ी संख्या में जुटे समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही पुलिस की गाड़ियां अलंकार अग्निहोत्री को लेकर निकलने लगीं, समर्थक वाहनों के सामने खड़े हो गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हालात को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों की ओर से यह बताया गया कि अलंकार अग्निहोत्री को सुरक्षा कारणों से उनके पैतृक आवास भेजा जा रहा है। समर्थक तब तक मौके पर डटे रहे, जब तक पुलिस की गाड़ियां वहां से रवाना नहीं हो गईं।

इससे पहले मंगलवार देर रात अलंकार अग्निहोत्री ने खुद को ‘हाउस अरेस्ट’ में होने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि एडीएम कंपाउंड को मिनी जेल में तब्दील कर दिया गया है और उन्हें बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बुनियादी अधिकारों का हनन किया जा रहा है और संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है।

एडीएम कंपाउंड की सुरक्षा कड़ी
प्रशासन की ओर से मंगलवार रात एडीएम कंपाउंड की सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई थी। मुख्य गेट पर आवाजाही सीमित कर दी गई, जबकि पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई। निगरानी के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। एक गेट पूरी तरह बंद रखा गया और दूसरे गेट से केवल पहचान व पूछताछ के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही थी।

दो दिन पहले दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री ने दो दिन पहले बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद से उनके समर्थन में लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। मंगलवार से समर्थकों को एडीएम कंपाउंड में प्रवेश नहीं दिया जा रहा था।

यह भी पढ़े:- गरीबों के लिए 4 करोड़ घर…,राष्ट्रपति मुर्मू ने अभिभाषण में क्या-क्या बताया

वहीं प्रशासन ने अलंकार अग्निहोत्री द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें लगातार समझाने का प्रयास किया गया। सूत्रों के अनुसार यह भी जांच की जा रही है कि कहीं उन्होंने किसी दबाव या बहकावे में आकर इस्तीफा तो नहीं दिया।

गरीबों के लिए 4 करोड़ घर…,राष्ट्रपति मुर्मू ने अभिभाषण में क्या-क्या बताया

नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- संसद के बजट सत्र की शुरुआत में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की उपलब्धियों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए चार करोड़ पक्के मकान बनाए हैं, जबकि बीते एक वर्ष में ही 32 लाख नए घर जरूरतमंदों को मिले हैं।

राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में बताया कि जल जीवन मिशन के तहत पिछले पांच वर्षों में साढ़े 12 करोड़ परिवारों तक नल से जल पहुंचाया गया है। वहीं, पिछले एक साल में करीब एक करोड़ नए परिवार इस सुविधा से जुड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से अब तक 10 करोड़ से अधिक परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 20 लाख से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण और बैंकिंग सहायता दी जा रही है। इसके अलावा पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत रेहड़ी-पटरी और फुटपाथ पर काम करने वाले 72 लाख लोगों को अब तक 16 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी गई है।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान पूरी दुनिया ने भारतीय सेना का शौर्य और पराक्रम देखा। भारत ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकियों के अड्डों को ध्वस्त कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि देश पर किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक होगा। उन्होंने बताया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के तहत सिंधु जल समझौते को स्थगित किया गया है और देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर भी काम चल रहा है।

सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा
अपने चौथे अभिभाषण में राष्ट्रपति ने कहा कि पारदर्शिता और ईमानदारी से व्यवस्थाएं मजबूत हुई हैं और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से करीब पौने सात लाख करोड़ रुपये सीधे लोगों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है और इसी का परिणाम है कि एक दशक में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

यह भी पढ़े:- प्रतीक यादव ने तलाक की अटकलों पर लगाया विराम, अपर्णा यादव संग तस्वीर शेयर 

राष्ट्रपति ने बताया कि वर्ष 2014 तक केवल 25 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता था, जबकि आज 95 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा का कवच मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के कारण देश के विकास में हर एक पाई का सही उपयोग हो रहा है।

विपक्षी हंगामे पर भाजपा का हमला
राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा किए गए हंगामे को लेकर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष ने संसदीय मर्यादा को तार-तार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राष्ट्रपति वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन कर रही थीं, उसी दौरान कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी।

नड्डा ने कहा कि यह राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और स्वतंत्रता संग्राम की परंपरा का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस और विपक्ष को वंदे मातरम् से इतनी नफरत क्यों है और इस पूरे घटनाक्रम के लिए उन्हें संसद और देश से माफी मांगनी चाहिए।

प्रतीक यादव ने तलाक की अटकलों पर लगाया विराम, अपर्णा यादव संग तस्वीर शेयर कर लिखा– ‘ऑल इज गुड’

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी और भाजपा नेत्री अपर्णा यादव से तलाक की चर्चाओं पर विराम लगा दिया है। हालिया दिनों में सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तलाक की अटकलें तेज थीं, लेकिन अब प्रतीक यादव के एक इंस्टाग्राम पोस्ट ने साफ कर दिया है कि दोनों के रिश्ते में सब कुछ सामान्य है।

प्रतीक यादव ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपर्णा यादव के साथ एक तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, “ऑल इज गुड”, साथ ही यह भी जोड़ा कि “हम चैंपियनों का परिवार हैं।” पोस्ट सामने आते ही दोनों के अलगाव की चर्चाओं पर ब्रेक लग गया।

यह भी पढ़े:- ‘रास्ते में घर मत बनवाना, नहीं तो बुलडोजर चलवा दूंगा’, बच्चे ने उतारी सीएम योगी की

राजनीतिक जानकार इस पोस्ट को पति-पत्नी के बीच आई कथित खटास खत्म होने के संकेत के रूप में देख रहे हैं। तस्वीर में दोनों साथ नजर आ रहे हैं और माहौल पूरी तरह सकारात्मक दिखाई दे रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रतीक यादव और अपर्णा यादव के तलाक को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। इन चर्चाओं को इसलिए भी हवा मिली क्योंकि दोनों अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। जहां अपर्णा यादव भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता हैं, वहीं प्रतीक यादव समाजवादी परिवार से ताल्लुक रखते हैं।

हालांकि, अब प्रतीक यादव की ताजा सोशल मीडिया पोस्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि दंपती के बीच तलाक जैसी कोई स्थिति नहीं है और रिश्ते सामान्य हैं।

‘रास्ते में घर मत बनवाना, नहीं तो बुलडोजर चलवा दूंगा’, बच्चे ने उतारी सीएम योगी की हूबहू नकल

गोरखपुर/सर्वोदय न्यूज़:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर दौरे के दौरान एक मासूम बच्चे ने ऐसा दृश्य रचा कि पूरा कार्यक्रम मुस्कान से भर गया। 96.50 करोड़ रुपये की लागत से बने खजांची चौराहा फ्लाईओवर और 152.19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बरगदवा–नकहा रेल ओवरब्रिज के लोकार्पण कार्यक्रम में एक छोटा बच्चा आकर्षण का केंद्र बन गया।

योगी आदित्यनाथ की वेशभूषा में मंच पर पहुंचे इस बच्चे ने माइक संभालते ही मुख्यमंत्री के अंदाज में भाषण देना शुरू कर दिया। उसने कहा, “नमस्कार, मैं योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बोल रहा हूं। रास्ते में घर मत बनवाना, नहीं तो बुलडोजर चलवा दूंगा। जय श्रीराम, भारत माता की जय, वंदे मातरम।”

यह भी पढ़े:- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला बीच में छोड़ा, बिना संगम स्नान काशी के लिए रवाना

बच्चे की आवाज और अंदाज सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद लोग चौंक गए और मंच की ओर देखने लगे। प्ले-वे में पढ़ने वाला यह बच्चा हूबहू मुख्यमंत्री की नकल कर रहा था। जब सीएम योगी मंच पर पहुंचे तो उन्होंने मुस्कराते हुए बच्चे से बातचीत की और पूछा कि वह किस कक्षा में पढ़ता है। योगी ने हंसते हुए कहा कि तुमने मेरी जैसी ड्रेस पहन रखी है, जिस पर बच्चे ने मासूमियत से जवाब दिया—“यह मेरी है।” मुख्यमंत्री ने उसे चॉकलेट देकर दुलार किया।

देखे विडियो:- 

यह बच्चा अश्वनी त्रिपाठी है, जो भगवती महाविद्यालय में अंग्रेजी की शिक्षिका सीमा त्रिपाठी का बेटा है।

पहले भी वायरल हो चुका है योगी-बच्चे का वीडियो
इससे पहले मकर संक्रांति के अवसर पर भी मुख्यमंत्री योगी और एक बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस दौरान योगी ने बच्चे से पूछा था कि उसे क्या चाहिए। बच्चे ने उनके कान में धीरे से चिप्स की मांग रखी थी, जिसे सुनकर मुख्यमंत्री और वहां मौजूद लोग हंस पड़े थे। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने तुरंत बच्चे के लिए चिप्स मंगवाए थे।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला बीच में छोड़ा, बिना संगम स्नान काशी के लिए रवाना

प्रयागराज/सर्वोदय न्यूज़:- माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को मेला बीच में ही छोड़ दिया और काशी की तरफ रवाना हो गए। मौनी अमावस्या पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से हुए विवाद के कारण उन्होंने संगम में स्नान भी नहीं किया था। इसके बाद से वे अपने शिविर में भी नहीं लौटे थे और मंगलवार रात समर्थकों से विचार-विमर्श के बाद बुधवार को माघ मेला छोड़ने का निर्णय लिया।

शंकराचार्य ने माघ मेले को छोड़ते हुए कहा कि उन्होंने अन्याय का विरोध किया और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रयाग की भूमि पर लोग आध्यात्मिक शांति के लिए आते हैं, लेकिन हाल की घटनाओं ने उनके मन को गहराई से झकझोर दिया। उनका कहना था कि संगम में स्नान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की संतुष्टि का मार्ग है।

शंकराचार्य ने अपने वक्तव्य में कहा, “आज मन इतना व्यथित है कि संकल्प अधूरा छोड़कर हम विदा ले रहे हैं। सत्य की गूंज और अनुत्तरित प्रश्न हमारे पीछे रहेंगे।”

यह भी पढ़े:- योगी के सम्मान में इस्तीफा या नौकरी बचाने का ड्रामा? GST अधिकारी प्रशांत सिंह पर भाई ने

उन्होंने अपने विरोध के दसवें दिन मंगलवार को भी कहा था कि वे मेला नहीं छोड़ेंगे और सनातनियों के सम्मान, संतों के साथ हुए अन्याय और अत्याचार के खिलाफ विरोध जारी रखेंगे। शंकराचार्य ने प्रशासन की नाकामी पर भी सवाल उठाए और आशंका जताई कि यहां उनकी हत्या की साजिश हो सकती है।

उनका कहना था, “यदि हमारी हत्या हुई तो भी हमें दोषी ठहराया जाएगा। पिछले महाकुम्भ में हुए हत्याओं में भी जिम्मेदारी तय नहीं हुई। हम भयभीत होकर गोरक्षा की आवाज़ नहीं बंद करेंगे।”

यह पहला मौका है जब माघ मेले में आने के बाद शंकराचार्य बिना संगम स्नान किए लौटे हैं।

योगी के सम्मान में इस्तीफा या नौकरी बचाने का ड्रामा? GST अधिकारी प्रशांत सिंह पर भाई ने लगाए गंभीर आरोप

अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर (GST) प्रशांत कुमार सिंह इस्तीफे के बाद विवादों में आ गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ‘औरंगजेब’ टिप्पणी के विरोध में उन्होंने मंगलवार को इस्तीफा दिया। प्रशांत ने कहा था कि जिस प्रदेश का वे नमक खाते हैं, उसके मुखिया का अपमान वह बर्दाश्त नहीं कर सकते।

हालाँकि, अब उनके ही भाई, डॉ. विश्वजीत सिंह ने उनका इस्तीफा ‘नैतिक कदम’ नहीं बल्कि एक योजना बताई है। विश्वजीत का आरोप है कि प्रशांत सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र (Disability Certificate) के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की थी। उन्होंने कहा कि इस्तीफा इसलिए दिया गया ताकि उनके फर्जीवाड़े की जांच और अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी से बचा जा सके।

शिकायत 2021 से लंबित
विश्वजीत सिंह के अनुसार, उन्होंने यह फर्जीवाड़ा 2021 में ही उजागर करने की कोशिश की थी। अगस्त 2021 में मंडलीय चिकित्सा परिषद ने प्रशांत को मेडिकल बोर्ड में परीक्षण के लिए बुलाया था, लेकिन वे दो बार गैरहाजिर रहे। भाई ने दावा किया कि जिस आंख की बीमारी के आधार पर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया गया, वह 50 साल से कम उम्र वाले व्यक्ति में होना विज्ञान के हिसाब से असंभव है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी मऊ ने शुरू की जांच
इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) मऊ डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने जांच शुरू कर दी है। उनके मुताबिक, प्रशांत सिंह के खिलाफ उनके ही भाई द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर 28 सितंबर और 7 अक्टूबर 2021 को नोटिस जारी किए गए थे। प्रशांत बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए। पूरी रिपोर्ट अयोध्या आयुक्त को भेजी जा चुकी है।

जांच में अगर प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाता है तो प्रशांत सिंह को कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ अब तक प्राप्त आर्थिक लाभ की वसूली का सामना करना पड़ेगा।

यूजीसी के इक्विटी कमेटी नियमों पर मायावती का बयान,मायावती ने इसे घिनौनी राजनीति भी बताया

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर हो रहे विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव समाप्त करने के उद्देश्य से बनाए गए इन प्रावधानों का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जिनकी सोच जातिवादी है।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि यूजीसी द्वारा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में ‘इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) गठित करने के निर्णय का विरोध सामान्य वर्ग के कुछ ऐसे लोग कर रहे हैं, जो इसे अपने खिलाफ साजिश और भेदभाव के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की सोच न तो उचित है और न ही समाजहित में।

हालांकि, बसपा प्रमुख ने यह भी माना कि यदि इन नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों से व्यापक संवाद किया जाता, तो बेहतर होता। इससे सामाजिक असंतोष और तनाव की स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थानों को इस पहलू पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी।

यह भी पढ़े:-  अजित पवार नहीं रहे, प्लेन क्रैश में निधन;…

मायावती ने दलितों और पिछड़े वर्गों को भी सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन वर्गों को अपने ही समुदाय के स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों के झांसे में नहीं आना चाहिए, जो ऐसे मुद्दों की आड़ में बार-बार घिनौनी राजनीति करते हैं।

क्या है यूजीसी का नया नियम

गौरतलब है कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी 2026 को नए नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र की स्थापना अनिवार्य की गई है, ताकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

इन्हीं प्रावधानों के विरोध में प्रदेश के कई हिस्सों में सवर्ण संगठनों द्वारा प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

वो नेता जो शायद ही कभी सत्ता से बाहर हुआ: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का दबदबा

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार उन चुनिंदा नेताओं में रहे हैं, जिनकी मौजूदगी सत्ता के केंद्र में लगभग लगातार बनी रही। उपमुख्यमंत्री पद पर कई बार रिकॉर्ड बनाने वाले अजित पवार को राज्य के सबसे प्रभावशाली और रणनीतिक राजनेताओं में गिना जाता है।

बारामती से उनका राजनीतिक रिश्ता केवल चुनावी नहीं, बल्कि पहचान का हिस्सा रहा है। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से अपने भतीजे युगेंद्र पवार को हराकर जीत दर्ज की थी। इससे पहले भी वे लगातार कई बार इस सीट से विधायक चुने जाते रहे।

राजनीति विरासत में, पकड़ मेहनत से

22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार ने कम उम्र में ही राजनीति की राह पकड़ ली थी। महज 23 साल की उम्र में वे एक कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में पहुंचे। इसके बाद 1991 में पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने और करीब 16 वर्षों तक इस पद पर रहे।

यह भी पढ़े:- Ajit Pawar Plane Crash Update: अजित पवार नहीं रहे, प्लेन क्रैश में निधन

1991 में वे पहली बार बारामती से सांसद चुने गए। 1995 में विधानसभा चुनाव लड़कर उन्होंने राज्य की सक्रिय राजनीति में एंट्री की और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2024 तक वे लगातार सात बार विधायक चुने जा चुके थे।

मुख्यमंत्री की कुर्सी दूर रही

हालांकि अजित पवार कई बार उपमुख्यमंत्री बने और सत्ता के केंद्र में रहे, लेकिन मुख्यमंत्री पद उन्हें कभी नहीं मिल सका। इसके बावजूद उनकी प्रशासनिक पकड़ और राजनीतिक प्रभाव को लेकर यह धारणा बनी रही कि वे शायद ही कभी सत्ता से बाहर होते हैं।

Ajit Pawar Plane Crash Update: अजित पवार नहीं रहे, प्लेन क्रैश में निधन; विमान में सवार कोई भी यात्री नहीं बचा

Ajit Pawar Plane Crash Update: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का बारामती में प्लेन क्रैश हो गया है। इस विमान में पवार समेत 6 लोगों के सवार होने की जानकारी मिली है| मिली जानकारी के अनुसार विमान में 6 लोग सवार थे |

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन हादसे का शिकार हो गया है। यह विमान लैंडिंग के दौरान ही क्रैश हो गया। आसपास बुरी तरह मलबा फैला हुआ दिख रहा है। यह हादसा इतना भीषण था कि कई लोगों के मारे जाने की आशंकाएं जताई जा रही हैं। इस विमान में अजित पवार समेत 6 लोग सवार थे।

यह भी पढ़े:- Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार का प्लेन क्रैश, लैंडिंग के समय हुआ हादसा

अजित पवार के साथ यह हादसा बारामती में ही हुआ। वह किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंच रहे थे और इसी दौरान प्लेन क्रैश हो गया है।

विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत हो गई है। इस हादसे में तीन और लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने दी है

उड्डयन निदेशालय ने प्लेन क्रैश में सभी लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। प्लेन में अजित पवार समेत कुल 5 लोग सवार थे। इनमें उनके एक पीएसओ, एक सहायक और दो क्रू मेंबर शामिल थे।

भारत-EU डील से खत्म होगी बांग्लादेश की ‘बादशाहत’? अरबों डॉलर के कारोबार पर क्यों बढ़ी पड़ोसी देश की चिंता

India-EU FTA Impact: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से अटका मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार 27 जनवरी को साइन हो गया। इस डील को भारत के वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारत का टेक्सटाइल निर्यात मौजूदा करीब 7 अरब डॉलर से बढ़कर 30 से 40 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

भारत को मिलेगा बराबरी का मैदान, बांग्लादेश को झटका

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि वर्षों से यह सवाल उठता रहा है कि कपड़ा निर्यात में बांग्लादेश भारत से आगे क्यों है। इसकी बड़ी वजह यह है कि बांग्लादेश ‘कम विकसित देश’ (LDC) की श्रेणी में आता है, जिसके चलते उसे यूरोपीय संघ के बाजार में शून्य शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलता रहा है।

इसी कारण बांग्लादेश ने EU के लगभग 250 अरब डॉलर के कपड़ा बाजार में 30 अरब डॉलर की हिस्सेदारी बना ली, जबकि भारत अब तक करीब 7 अरब डॉलर तक सीमित रहा। भारतीय उत्पादों पर 12% तक आयात शुल्क लगने से प्रतिस्पर्धा मुश्किल थी।
FTA लागू होते ही भारत भी ड्यूटी के मामले में बांग्लादेश के बराबर आ जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा मिलेगा।

वस्त्र उद्योग को मिलेगा बड़ा बूस्ट

पीयूष गोयल ने कहा कि वस्त्र उद्योग भारत में कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, जिसमें लगभग 4 करोड़ लोग कार्यरत हैं। FTA के बाद इस सेक्टर में 60 से 70 लाख नई नौकरियों के सृजन की संभावना है। शुल्क समाप्त होने से भारतीय परिधान और टेक्सटाइल उत्पाद यूरोपीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

‘पहले दिन से’ शुल्क-मुक्त पहुंच

इस समझौते के तहत भारत से EU को होने वाले लगभग 99% निर्यात और EU से भारत आने वाले 97% आयात को कवर किया गया है। कपड़ा, परिधान, होम टेक्सटाइल और फर्निशिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पहले ही दिन से ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा।

यह भी पढ़े:- Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार का प्लेन क्रैश, लैंडिंग के समय हुआ हादसा

वर्तमान में यूरोपीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी वस्तुओं में करीब 1.5% और सेवाओं में 2.5% है, जिसमें अब तेजी से बढ़ोतरी की उम्मीद है।

CBAM यानी कार्बन टैक्स पर भी बनी सहमति

इस समझौते में यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसी चुनौतियों पर भी समाधान की रूपरेखा तय की गई है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि CBAM एक वैश्विक नियम है, जो सभी व्यापारिक साझेदारों पर लागू होता है। इसके तहत भारत और EU के बीच एक तकनीकी संवाद तंत्र बनाया जाएगा।
भारतीय एजेंसियों को मान्यता दी जाएगी, ताकि वे यूरोपीय मानकों के अनुसार भारत में ही कार्बन उत्सर्जन का सत्यापन कर सकें।

क्यों बढ़ी बांग्लादेश की चिंता?

FTA के बाद भारत को वही टैरिफ लाभ मिलेगा, जो अब तक बांग्लादेश को हासिल था। इससे EU के अरबों डॉलर के कपड़ा कारोबार में भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है और बांग्लादेश के दबदबे को सीधी चुनौती मिलेगी।