न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन तेज हो चुके हैं और अब यह मुद्दा साधु-संत समाज तक पहुंच गया है। इसी कड़ी में विश्व हिंदू सिख महापरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
अपने पत्र में परमहंस आचार्य ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से जुड़े नए नियमों और प्रस्तावों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। उनके इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक, धार्मिक और शैक्षणिक हलकों में हलचल मच गई है।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पत्र में UGC की नई नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से देश की शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने लिखा कि नए नियमों के जरिए शिक्षा प्रणाली को कमजोर किया जा रहा है और युवाओं को वैचारिक रूप से भ्रमित करने का प्रयास हो रहा है।
पत्र में परमहंस आचार्य ने कहा है कि UGC की नीतियां भारत की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चेतना के खिलाफ हैं। उनका दावा है कि इन नियमों से राष्ट्रविरोधी सोच को बढ़ावा मिल रहा है और समाज के पारंपरिक मूल्यों पर चोट पहुंच रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंच रहा है, जिसका असर आने वाले समय में और गंभीर हो सकता है।
अपने पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी अपील करते हुए लिखा है कि या तो UGC के नए नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रहित में की जा रही है।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस विषय पर कोई ठोस और स्पष्ट निर्णय नहीं लेती है, तो उनका विरोध और अधिक तीव्र होगा। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं और इसे लेकर पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
UGC नियमों को लेकर पहले से ही प्रदेश और देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। छात्र संगठनों, सामाजिक समूहों और कुछ धार्मिक संगठनों ने इन नियमों को लेकर आपत्ति जताई है। अयोध्या से सामने आया यह पत्र विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।
फिलहाल केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों और मांगों से UGC नियमों पर चल रही राष्ट्रीय बहस और तेज हो सकती है।



