लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस), लखनऊ के कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा आयोजित विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 का समापन विशेषज्ञ व्याख्यान, पुरस्कार वितरण और वैलेडिक्टरी समारोह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ नियोनेटल नर्सेस (IANN) और संस्थान के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के सहयोग से किया गया।
इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सतत एवं स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान: जो प्रभावी है, उसे और सशक्त बनाएं” रही। कार्यक्रम का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था।
विशेषज्ञों ने बताए स्तनपान के फायदे
कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) दीप्ति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग, राम प्रकाश गुप्ता मेमोरियल मदर एंड चाइल्ड स्टेट रेफरल हॉस्पिटल तथा डॉ. अशोक कुमार, सहायक प्रोफेसर, बाल रोग विभाग ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
विशेषज्ञों ने बताया कि नवजात के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना, पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देना और दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस दौरान विद्यार्थियों के सवालों के जवाब भी दिए गए।

विजेताओं को मिला सम्मान
वैलेडिक्टरी सत्र में विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान आयोजित क्विज, जिंगल और रोल प्ले प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों के उत्साह और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ वक्ताओं प्रो. (डॉ.) दीप्ति अग्रवाल और डॉ. अशोक कुमार को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
बड़ी संख्या में रहे मौजूद
समारोह में कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) शिवकुमार मुद्गल और उप-प्राचार्य प्रो. निपिन कलाल सहित संकाय सदस्य, विद्यार्थी और अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन वर्षा द्विवेदी ने किया, जबकि अंत में लीना प्रविल जॉन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आयोजकों ने बताया कि सप्ताहभर चली विभिन्न शैक्षणिक और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्तनपान से जुड़े वैज्ञानिक ज्ञान, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल और जन-जागरूकता के प्रति जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया गया।



