नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़ :- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक बयान इन दिनों चर्चा में है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने गृह मंत्री बनने के बाद सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भाग्य में आंदोलनों और आतंकियों से निपटना लिखा है। उनके इस बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि केंद्र में उन्हें गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है और इस वजह से उनके सामने आंदोलनों तथा आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी रहती है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “केंद्र में मुझे गृह मंत्रालय ही मिला है… तो मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है। आतंकियों से भी निपटना है।”
शाह ने यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में कही, जिसके बाद उनके बयान की चर्चा तेज हो गई।
कोरोना काल का अनुभव भी साझा किया
अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान कोरोना महामारी के शुरुआती दौर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय देश में लॉकडाउन और कर्फ्यू लागू कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अहमदाबाद जैसे बड़े शहर में कर्फ्यू लागू कराने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस वाहनों पर लाउडस्पीकर लगाकर लोगों को घरों में रहने की जानकारी देनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि कोरोना के शुरुआती दिनों में पूरे देश में कर्फ्यू को प्रभावी तरीके से लागू करना आसान काम नहीं था।
शाह ने बताया कि जब कोरोना संक्रमण के शुरुआती मामलों की पुष्टि हुई, तब सरकार के सामने स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। उनके मुताबिक, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उन्होंने भी हालात को लेकर चिंता जताई थी।
जनता कर्फ्यू के फैसले को किया याद
गृह मंत्री ने कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई चर्चा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय प्रधानमंत्री ने चिंता करने के बजाय आगे की रणनीति बनाने पर जोर दिया और जनता कर्फ्यू लगाने का निर्णय लिया।
अमित शाह के मुताबिक, उन्हें शुरुआत में आशंका थी कि इतने बड़े स्तर पर की गई अपील के बावजूद लोग घरों से बाहर निकल सकते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री की घोषणा के अगले दिन सड़कों पर लोगों की आवाजाही बेहद कम दिखाई दी।
शाह ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया था कि देश इस चुनौती से बाहर निकलने में सफल होगा।
भारत की वैक्सीन क्षमता का भी किया जिक्र
अमित शाह ने कोरोना महामारी के बाद भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने वैक्सीन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से काम किया। उन्होंने दावा किया कि भारत दुनिया के उन शुरुआती देशों में शामिल रहा, जिन्होंने तेजी से वैक्सीन विकसित की।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने कई अन्य देशों तक वैक्सीन पहुंचाकर महामारी के खिलाफ लड़ाई में सहयोग किया। शाह ने अपने संबोधन में देश के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
“भारत को हीनभावना से बाहर निकलने की जरूरत”
अमित शाह ने कहा कि भारत को किसी भी तरह की हीनभावना से बाहर निकलना होगा। उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करने की जरूरत बताते हुए कहा कि देश के युवा किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।
उनके मुताबिक, देश के युवाओं को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि भारत कुछ भी कर सकता है और बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना करने की क्षमता रखता है।
अमित शाह के आंदोलन, आतंकवाद और कोरोना काल से जुड़े इस संबोधन का वीडियो सामने आने के बाद उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है।


