Gold Price News: भारत के घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर इस समय नीतिगत अनिश्चितता का असर दिखाई दे रहा है। 27 अगस्त को जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी के दाम मजबूत रहे, वहीं घरेलू बाजार में दोनों की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। बाजार में चर्चा है कि सरकार सोने और चांदी पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी कम करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा करीब 15 फीसदी आयात शुल्क को घटाकर लगभग 6 फीसदी करने का प्रस्ताव चर्चा में होने की बात कही जा रही है। इसी संभावना के चलते ज्वेलर्स और बड़े खरीदार फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। बाजार में नई खरीदारी को लेकर ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति बनी हुई है।
घरेलू बाजार में सोने पर दबाव
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घरेलू और वैश्विक गोल्ड मार्केट में इस समय विपरीत रुख देखने को मिल रहा है। MCX पर अक्टूबर वायदा सोना करीब 0.8 फीसदी गिरकर लगभग 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं सितंबर वायदा चांदी में भी करीब 0.2 फीसदी की कमजोरी रही और इसका भाव लगभग 2.38 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया।
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.8 फीसदी चढ़कर 4,630.09 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी करीब 0.7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। यानी वैश्विक बाजार में तेजी के बावजूद भारतीय बाजार में सोने पर दबाव बना हुआ है।
भारत में बढ़ा गोल्ड डिस्काउंट
घरेलू फिजिकल गोल्ड मार्केट में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। भारत में सोना पहले लैंडेड या इंपोर्ट-पैरिटी कीमत की तुलना में करीब 2 से 2.5 फीसदी डिस्काउंट पर कारोबार कर रहा था। अब इस डिस्काउंट में करीब 1 से 1.5 प्रतिशत अंक की अतिरिक्त बढ़ोतरी होने की बात सामने आई है।
बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, इसकी एक प्रमुख वजह इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती को लेकर बनी अनिश्चितता है। अगर सरकार अचानक आयात शुल्क कम कर देती है, तो विदेश से भारत आने वाले सोने की लागत भी घट सकती है।
ऐसे में आज ऊंची कीमत पर सोना खरीदकर स्टॉक रखने वाले कारोबारियों को बाद में कम कीमत पर बिक्री का दबाव झेलना पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण कई बड़े खरीदार फिलहाल खरीदारी को टाल रहे हैं।
ड्यूटी घटने पर क्या होगा?
अगर सरकार वास्तव में सोने और चांदी पर आयात शुल्क कम करने का ऐलान करती है, तो घरेलू बाजार में कीमतों की नई री-प्राइसिंग देखने को मिल सकती है। इससे सोने के दाम में अचानक बदलाव संभव है।
वहीं, यदि सरकार की ओर से ड्यूटी में कोई कटौती नहीं की जाती है, तो बाजार में मौजूदा डिस्काउंट धीरे-धीरे सामान्य स्तर यानी करीब 2 से 2.5 फीसदी तक वापस आ सकता है।
यही वजह है कि फिलहाल ज्वेलर्स और निवेशकों की नजर सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।
सोने और चांदी के लिए अहम स्तर
तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से सोने के लिए 1,60,725 से 1,64,060 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन माना जा रहा है। वहीं 1,53,737 रुपये के आसपास का स्तर शॉर्ट टर्म सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है।
चांदी में करीब 2,35,700 रुपये का स्तर सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 2,43,700 से 2,51,000 रुपये का क्षेत्र रेजिस्टेंस जोन है।
हालांकि, जब तक इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक घरेलू बुलियन मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। सोना खरीदने या निवेश करने वालों के लिए फिलहाल जल्दबाजी के बजाय बाजार और सरकारी फैसलों पर नजर रखना अहम रहेगा।


