नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़ : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों का विरोध बुधवार को और तेज हो गया। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से फैसलों पर दर्ज की गई आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने CEC को पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को रोकने जैसी मांगें उठाई हैं।
The Indian Express की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
पवन खेड़ा ने की महाभियोग की मांग
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
खेड़ा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान राजनीतिक आरोप हैं; इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से इस रिपोर्ट के समय कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। The Indian Express ने अपनी रिपोर्ट पर आयोग से सवाल पूछे थे, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिलने की बात कही है।
केजरीवाल ने की गिरफ्तारी की मांग
आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी CEC ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की मांग की। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की बैठकें नियमित रूप से नहीं हुईं और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने SIR प्रक्रिया को रद्द करने, इसके तहत किए गए बदलावों को वापस लेने और पुरानी मतदाता सूची बहाल करने की मांग की। साथ ही उन्होंने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की मांग भी रखी।
हालांकि, SIR से जुड़े आंकड़ों और प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के दावों को चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
उद्धव ठाकरे ने भी उठाई कार्रवाई की मांग
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और जेल भेजने की मांग की। उन्होंने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज आपत्तियों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए पिछले विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग भी की। उन्होंने इन चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान कराने की बात कही।
चुनाव आयोग के भीतर 14 बार दर्ज हुई आपत्ति
The Indian Express की जांच के मुताबिक, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण जैसे विषय शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठाए थे। फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। संधू ने कथित तौर पर बदलाव को ‘अनधिकृत’ और ‘गैरकानूनी’ बताते हुए इसे हटाने की बात कही थी।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। The Indian Express के अनुसार, बिहार से शुरू हुई प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नामों को लेकर बदलाव दर्ज हुए हैं। यह संख्या ड्राफ्ट रोल से हटाए या चिह्नित किए गए नामों से संबंधित है और इसे अंतिम रूप से मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की संख्या के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में भी SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को लेकर विवाद सामने आया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने दोबारा शामिल किए जाने के लिए अपील की है।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद क्यों महत्वपूर्ण हैं?
चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है। मौजूदा विवाद में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा अलग-अलग मौकों पर दर्ज की गई आपत्तियों ने आयोग के अंदर निर्णय लेने की प्रक्रिया और मतदाता डेटा के प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और आयोग के आईटी सिस्टम से जुड़े अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई थी।
फिलहाल विपक्षी दलों की ओर से CEC ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई, SIR में बदलाव और कुछ राज्यों में दोबारा चुनाव कराने जैसी मांगें उठाई जा रही हैं। दूसरी ओर, इन मांगों और आरोपों पर अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं से ही स्पष्ट होगी।


