RMLIMS में राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 2026 का आयोजन, दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर जागरूकता

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (डॉ. आर.एम.एल.आई.एम.एस.), लखनऊ में राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 2026 का आयोजन किया गया। संस्थान के फार्माकोलॉजी विभाग ने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के सहयोग से 17 से 23 सितंबर तक विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।

यह आयोजन भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत संचालित फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI) और इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) के तत्वावधान में हुआ। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “फार्माकोविजिलेंस के माध्यम से औषधियों के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की ओर एक कदम” रही।

अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में चलाया गया जागरूकता अभियान

फार्माकोविजिलेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से सप्ताहभर कई गतिविधियां आयोजित की गईं। संस्थान के विभिन्न ओपीडी क्षेत्रों में मरीजों और तीमारदारों को दवाओं के सुरक्षित एवं तर्कसंगत उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।

जागरूकता अभियान सुपर स्पेशियलिटी और ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों के अलावा आरपीजी हॉस्पिटल, शहीद पथ परिसर, एआरटी और डीओटीएस केंद्रों में भी चलाया गया। इसके साथ ही सामुदायिक चिकित्सा विभाग के अंतर्गत आने वाले शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में भी पर्चों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया।

दवाओं के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग पर जागरूकता सत्र

कार्यक्रम के तहत फार्माकोविजिलेंस और दवाओं के तर्कसंगत एवं सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इसमें जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के फार्माकोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. एस.पी. सिंह ने प्रतिभागियों को जानकारी दी।

कार्यक्रम में प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रिया (ADR) की समय पर रिपोर्टिंग के महत्व पर भी जोर दिया गया। संस्थान के विभिन्न विभागों को उनके द्वारा रिपोर्ट किए गए एडीआर की संख्या के आधार पर सम्मानित किया गया।

एडीआर रिपोर्टिंग में रेडियोडायग्नोसिस विभाग को प्रथम, मेडिसिन विभाग को द्वितीय और सर्जरी विभाग को तृतीय पुरस्कार दिया गया।

दवाओं के साइड इफेक्ट पर पॉडकास्ट भी जारी

फार्माकोविजिलेंस का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए फार्माकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अर्पिता सिंह ने दवाओं के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग से संबंधित एक पॉडकास्ट तैयार किया। इसे संस्थान के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी किया गया।

कार्यक्रम में प्रख्यात भारतीय फार्माकोलॉजिस्ट डॉ. गौतम पलित, कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्राचार्य, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, मुख्य नर्सिंग अधिकारी, नर्सिंग स्टाफ और छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।

संस्थान के अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन

राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह का आयोजन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह, डीन प्रो. (डॉ.) राजन भटनागर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विक्रम सिंह और कार्यकारी रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) सुब्रत चंद्रा के मार्गदर्शन में किया गया।

फार्माकोलॉजी विभाग की प्रो. (डॉ.) अर्पिता सिंह आयोजन अध्यक्ष रहीं, जबकि डॉ. हिमांशु शर्मा आयोजन सचिव रहे। आयोजन टीम में फार्माकोलॉजी विभाग के संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों और फार्माकोविजिलेंस एसोसिएट ने सहयोग किया।

ADR की समय पर रिपोर्टिंग पर जोर

कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश दिया गया कि फार्माकोविजिलेंस केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक दायित्व है। दवाओं से होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं यानी ADR की समय पर रिपोर्टिंग से मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने और दवाओं के तर्कसंगत इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।

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