न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया है। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले इस गुट ने विशेष बैठक आयोजित कर विधायक अरूप रॉय को नया पार्टी अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की है। साथ ही ममता बनर्जी के भतीजे और वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने का फैसला भी लिया गया है।
विशेष सत्र में हुआ नए नेतृत्व का चयन
बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में आयोजित विशेष सत्र में अरूप रॉय को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने जाने का दावा किया गया। बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि पार्टी संविधान के प्रावधानों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई गई है।
नए संगठनात्मक ढांचे के तहत पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास, विधायक फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां अंसारी को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी जानकारी
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह असली या नकली टीएमसी का सवाल नहीं है, बल्कि वही लोग पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिन्होंने विशेष सत्र में भाग लिया। उन्होंने कहा कि बैठक की पूरी कार्यवाही और निर्णयों की जानकारी निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।
बागी गुट का कहना है कि उसने पार्टी के संविधान के अनुरूप कार्रवाई की है और अब इस मामले में अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग करेगा।
ममता बनर्जी को दिया सलाहकार बनने का प्रस्ताव
हालांकि बागी नेताओं ने ममता बनर्जी के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख भी दिखाया। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो उन्हें मुख्य सलाहकार के रूप में भूमिका निभाने का अवसर दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव का लाभ पार्टी को मिल सकता है।
संगठन के पुनर्गठन की तैयारी
नए नेतृत्व ने संकेत दिया है कि जल्द ही जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके तहत नई जिला समितियों, प्रदेश इकाई और पार्टी प्रवक्ताओं के पैनल का गठन किया जाएगा।
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ा आंतरिक संकट
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद सामने आया है। बागी गुट का दावा है कि पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने पहले ही ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व का समर्थन किया था और अब उनकी संख्या बढ़कर 64 हो गई है।
इसके अलावा, हाल के दिनों में लोकसभा स्तर पर भी पार्टी को झटका लगा है। बागी नेताओं का दावा है कि टीएमसी के कई सांसद संसदीय दल से अलग हो गए हैं, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक संकट और गहरा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह घटनाक्रम आगे बढ़ता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।



