अयोध्या/सर्वोदय न्यूज़:- राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रही जांच और चर्चाओं के बीच मंगलवार को शेषावतार मंदिर के शिखर पर आयोजित ध्वजारोहण समारोह ने सामान्य गतिविधियों और संगठनात्मक एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पूर्व की तरह आयोजन का संचालन किया, जबकि ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर निर्माण समिति से जुड़े गोपाल राव ने संतों एवं अतिथियों का स्वागत किया।
समारोह के दौरान ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी पूरी सक्रियता के साथ मंच पर मौजूद रहे। आयोजन में चढ़ावे से जुड़े विवाद या जांच के मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई। हालांकि, बड़ी संख्या में मौजूद कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं की नजरें ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर टिकी रहीं।
चंपत राय ने अपने संबोधन में बताया कि ध्वजारोहण कार्यक्रम की तैयारी कई महीने पहले शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि आयोजन में प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भी शामिल होना था, लेकिन प्रशासनिक दायित्वों के कारण वे कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके।
उन्होंने बताया कि अंतिम समय में अयोध्या में मौजूद विभिन्न संतों को आमंत्रित किया गया, जिनके करकमलों से शेषावतार मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण संपन्न कराया गया।
चंपत राय ने कहा कि शेषावतार मंदिर की परिकल्पना वर्ष 1992 में की गई थी। उस समय एक अस्थायी संरचना बनाकर पूजा-अर्चना शुरू की गई थी। समय के साथ मंदिर निर्माण का संकल्प आगे बढ़ा और अब यह कार्य पूर्णता की ओर पहुंच चुका है।
कार्यक्रम की शुरुआत में मंदिर निर्माण से जुड़े गोपाल राव ने ध्वजारोहण समारोह की प्रस्तावना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि राम मंदिर परिसर में शेषावतार मंदिर ही ऐसा प्रमुख मंदिर था, जहां ध्वजारोहण शेष था और अब यह कार्य भी विधिवत संपन्न हो गया है।
इस अवसर पर गोपाल राव और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने मंच पर उपस्थित संतों का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
समारोह के लिए शेषावतार मंदिर के पश्चिमी हिस्से में विशेष मंच तैयार किया गया था। वहीं कुबेर नवरत्न टीला परिसर में अतिथियों और श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी। विभिन्न विकास खंडों और महानगर क्षेत्र से आए कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग ब्लॉक निर्धारित किए गए थे। जनप्रतिनिधियों के लिए भी विशेष बैठक व्यवस्था की गई थी।



