लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने एक बार फिर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कई सवाल उठाते हुए मामले की पारदर्शी जांच की मांग की और पूछा कि कथित गड़बड़ी में शामिल लोगों को आखिर कौन संरक्षण दे रहा है।
सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मामले को लेकर लगातार विरोधाभासी जानकारियां सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कथित हेराफेरी से जुड़े लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें प्रसारित हुईं, लेकिन बाद में पुलिस की ओर से उनका खंडन किया गया।
चढ़ावा चोरी कांड
– ट्रस्टी कहना क्या चाहते हैं किसी को समझ नहीं आ रहा है।
– हेराफेरी में संलिप्त लोगों को हिरासत में लेने की ख़बरें अख़बारों, टीवी चैनलों, मीडिया पोर्टल और यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की जा रही हैं।
– पहले पुलिस कुछ नहीं कहती लेकिन बाद में न जाने किसके दबाव…— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 9, 2026
सपा प्रमुख ने कहा कि इस पूरे मामले को लेकर कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं और श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार और संबंधित संस्थाओं की चुप्पी से भ्रम की स्थिति और बढ़ रही है।
अखिलेश यादव ने उठाए 11 बड़े सवाल
अपने बयान में अखिलेश यादव ने कई प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसके पीछे कौन लोग हैं, कथित दोषियों को संरक्षण कौन दे रहा है और मामले की सच्चाई सामने लाने में देरी क्यों हो रही है।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि चढ़ावे की गिनती जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में निजी संस्थाओं की भूमिका किस आधार पर तय की गई और मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने में क्या दिक्कत है। इसके अलावा उन्होंने “डबल इंजन सरकार” पर भी राजनीतिक टिप्पणी की।
भाजपा नेता ने भी की केंद्रीय जांच की मांग
दूसरी ओर भाजपा नेता Rajnish Singh ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर राम जन्मभूमि मंदिर को मिले दान में कथित अनियमितताओं की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है।
उन्होंने सुझाव दिया कि मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI), Enforcement Directorate (ED) या किसी अन्य सक्षम केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। साथ ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रह सके।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी जांच की मांग
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। विपक्ष जहां मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा भी निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने से इस मुद्दे ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
हालांकि, अब तक संबंधित ट्रस्ट या जांच एजेंसियों की ओर से इन आरोपों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



