न्यूज़ डेस्क /सर्वोदय न्यूज़ : अक्सर पालतू जानवरों के मालिक अपने डॉग या कैट को तभी पशु चिकित्सक के पास लेकर जाते हैं, जब उनमें बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं। लेकिन कई गंभीर बीमारियां ऐसी होती हैं, जो शुरुआती चरण में बिना किसी संकेत के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। ऐसे में समय पर कराई गई ब्लड टेस्टिंग न केवल बीमारी की पहचान कर सकती है, बल्कि कई मामलों में पालतू जानवर की जान भी बचा सकती है।
ऐसे में जानते है विशेषज्ञ हेमंत तिवारी एवं डॉ. प्रियांका तिवारी का क्या कहना है-
क्यों महत्वपूर्ण है ब्लड टेस्टिंग?
ब्लड टेस्ट शरीर के अंदर चल रही विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं की स्थिति को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। इसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि किडनी, लिवर और अन्य महत्वपूर्ण अंग सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। कई बार एक साधारण रक्त जांच उन बीमारियों का संकेत दे देती है, जिनके लक्षण अभी बाहर से दिखाई भी नहीं देते।
किन बीमारियों का समय रहते लगाया जा सकता है पता?
1. किडनी रोग
किडनी से जुड़ी समस्याएं अक्सर शुरुआती अवस्था में बिना किसी लक्षण के विकसित होती हैं। ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे पैरामीटर बढ़ने पर बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
2. लिवर संबंधी समस्याएं
लिवर की बीमारियां लंबे समय तक छिपी रह सकती हैं। नियमित ब्लड टेस्ट से लिवर एंजाइम्स में होने वाले बदलावों का पता लगाकर उपचार जल्दी शुरू किया जा सकता है।
3. टिक फीवर और ब्लड पैरासाइट्स
भारत में गर्मी और बरसात के मौसम में टिक फीवर के मामले तेजी से बढ़ते हैं। ब्लड टेस्टिंग के जरिए प्लेटलेट्स की संख्या और संक्रमण की पहचान शुरुआती चरण में संभव हो जाती है।
4. डायबिटीज
बार-बार प्यास लगना, वजन कम होना या कमजोरी महसूस होना डायबिटीज के संकेत हो सकते हैं। ब्लड ग्लूकोज जांच से इसकी पुष्टि की जा सकती है।
5. संक्रमण और एनीमिया
सीबीसी (Complete Blood Count) जांच शरीर में संक्रमण, सूजन और खून की कमी जैसी समस्याओं की जानकारी देती है, जिससे समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।
स्वस्थ दिखने वाले पालतू जानवरों को भी क्यों करानी चाहिए जांच?
विशेषज्ञों डॉ. हेमंत तिवारी एवं डॉ. प्रियांका तिवारी के अनुसार कई बार पालतू जानवर पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देते हैं, लेकिन उनके शरीर में बीमारी विकसित हो रही होती है। खासकर:
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7 वर्ष से अधिक उम्र के पालतू जानवर
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मोटापे से ग्रसित पेट्स
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लंबे समय से दवाएं ले रहे जानवर
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बार-बार संक्रमण का शिकार होने वाले पेट्स
इन सभी के लिए नियमित ब्लड स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सर्जरी से पहले क्यों जरूरी है ब्लड टेस्ट?
किसी भी सर्जरी या एनेस्थीसिया से पहले ब्लड टेस्ट कराना सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक माना जाता है। इससे डॉक्टर यह सुनिश्चित कर पाते हैं कि:
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लिवर और किडनी सामान्य रूप से कार्य कर रहे हैं।
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जानवर एनेस्थीसिया को सुरक्षित रूप से सहन कर सकेगा।
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शरीर में कोई छिपा हुआ संक्रमण या एनीमिया मौजूद नहीं है।
यह जांच सर्जरी के दौरान संभावित जोखिमों को काफी हद तक कम कर देती है।
इमरजेंसी स्थितियों में भी अहम भूमिका
कुछ गंभीर परिस्थितियों में ब्लड टेस्ट तुरंत उपचार शुरू करने में मदद करता है। इनमें शामिल हैं:
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जहर का सेवन (Poisoning)
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गंभीर डिहाइड्रेशन
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हीट स्ट्रोक
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दौरे पड़ना (Seizures)
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लगातार उल्टी और दस्त
ऐसे मामलों में रक्त जांच डॉक्टर को सही उपचार योजना बनाने में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती है।
कितनी बार करानी चाहिए ब्लड टेस्टिंग?
विशेषज्ञों डॉ. हेमंत तिवारी एवं डॉ. प्रियांका तिवारी की सलाह के अनुसार:
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युवा और स्वस्थ पालतू जानवरों की साल में एक बार जांच करानी चाहिए।
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7 वर्ष से अधिक उम्र वाले पेट्स की हर छह महीने में जांच कराना बेहतर माना जाता है।
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किसी पुरानी बीमारी से ग्रसित जानवरों की जांच डॉक्टर की सलाह के अनुसार करानी चाहिए।
क्या ब्लड टेस्ट दर्दनाक प्रक्रिया है?
ब्लड टेस्टिंग एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है। इसमें केवल थोड़ी मात्रा में रक्त लिया जाता है और अधिकांश पालतू जानवर इसे आसानी से सहन कर लेते हैं।



