न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- सनातन धर्म में मन्नत मांगने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। अक्सर लोग भगवान से किसी विशेष काम के पूरा होने के लिए मन में इच्छा व्यक्त करते हैं और मन्नत पूरी होने पर उनका आभार प्रकट करते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या भगवान से मन्नत मांगने का कोई सही तरीका है?
वृंदावन के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज ने इस पर स्पष्ट उत्तर दिया। एक शिष्य ने उनसे पूछा कि क्या यह सही है कि हम कहें—“भगवान, आप मेरी यह मनोकामना पूरी कर दो, तो मैं आपको ऐसा करूंगा।”
भगवान से हक से मांगें
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान से ऐसा कहना ठीक नहीं है। भगवान हमारे परम दाता हैं और हम उनके बच्चे। जैसे हम अपने पिता से बिना किसी शर्त के मदद मांगते हैं, वैसे ही भगवान से भी सीधे अपने हक और जरूरत के अनुसार मांग करनी चाहिए।
यह भी पढ़े:- कांग्रेस का नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी पर बड़ा ऐक्शन, पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित
महाराज ने कहा, “भगवान से सीधे कहें—‘हे प्रभु, यह हमारी समस्या है, इसका समाधान कीजिए।’ किसी शर्त के साथ नहीं, बिना किसी लालच या वचन के।”
भोग अर्पित करने का तरीका
महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि भोग या चढ़ावा भगवान को समर्पित करना हमेशा आभार और श्रद्धा से होना चाहिए, न कि किसी शर्त या मांग के लिए। उन्होंने कहा, “अज्ञानवश हम कहते हैं कि अगर भगवान मेरी मनोकामना पूरी करें तो 100 रुपये के लड्डू का भोग लगाऊंगा। ऐसा नहीं होना चाहिए। भोग हमेशा भगवान को समर्पित भाव से लगाएं, लेकिन मांग सीधे अपने हक और आवश्यकता के अनुसार करें।”
संदेश यह है कि भगवान से मन्नत पिता की तरह प्रेम और विश्वास के साथ मांगनी चाहिए, शर्तों और सौदों के साथ नहीं।



