न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पाकिस्तान में स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव रविवार को संपन्न हो गया। इस बार आयोजन में करीब 3 लाख हिंदू श्रद्धालुओं के पहुंचने की खबर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस धार्मिक आयोजन के दौरान भंडारे, चिकित्सा सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं का विशेष इंतजाम किया गया था। श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की कठिन यात्रा तय कर इस पवित्र स्थल तक पहुंचे।
पूरे पाकिस्तान से पहुंचे श्रद्धालु
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महीने ही लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन किए, जबकि पूरे वर्ष में यह संख्या करीब 10 लाख तक पहुंचती है।
श्रद्धालु थारपारकर, उमरकोट और संघार सहित सिंध प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों से लंबी यात्रा कर यहां पहुंचे। कई यात्रियों को यह तीर्थ पूरा करने में 15 से 20 दिन तक लग जाते हैं।
क्या है हिंगलाज मंदिर का इतिहास
हिंगलाज माता मंदिर को स्थानीय रूप से “नानी मंदिर” भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। मान्यता है कि यहां माता सती का सिर गिरा था।
यह मंदिर बलूचिस्तान के पहाड़ी क्षेत्र में हिंगोल नेशनल पार्क के भीतर, हिंगोल नदी के पास एक गुफा में स्थित है। यह कराची से लगभग 250 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है।
ऐसे होती है पूजा और आयोजन
हर वर्ष अप्रैल महीने में आयोजित इस उत्सव के दौरान तीसरे दिन विशेष पूजा होती है। पुजारी वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर देवी को भेंट अर्पित करते हैं।
श्रद्धालु परंपरा के अनुसार तीन नारियल चढ़ाते हैं। कुछ भक्त पूरे आयोजन (3–4 दिन) में शामिल होते हैं, जबकि कुछ दर्शन कर लौट जाते हैं।
कठिन लेकिन आस्था से भरी यात्रा
हिंगलाज यात्रा को काफी कठिन माना जाता है। पहले श्रद्धालुओं को लगभग 150 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। अब मकरान कोस्टल हाईवे बनने के बाद यात्रा अपेक्षाकृत आसान हो गई है।
फिर भी कई श्रद्धालु पैदल, साइकिल, बस और निजी वाहनों से लंबा सफर तय कर मंदिर तक पहुंचते हैं।
सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां
इस वर्ष के आयोजन के लिए बलूचिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे। सुरक्षा के लिहाज से पुलिस, फ्रंटियर कोर और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।



