न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विधानसभा कोटे की 9 रिक्त सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव के लिए सोमवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है। चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही संभावित उम्मीदवारों के बीच राजनीतिक समीकरणों और रणनीतियों का दौर भी तेज हो गया है।
8 जून तक दाखिल होंगे नामांकन, 18 जून को मतदान
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी, जबकि 11 जून तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे। विधानसभा कोटे की इन सीटों पर विधायकों के वोट निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
रोहिणी आचार्या ने चुनाव लड़ने की चर्चाओं को किया खारिज
विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से कई नामों की चर्चा हो रही थी। इसी बीच राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने चुनाव लड़ने की अटकलों को सिरे से नकार दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग उनके चुनाव लड़ने की झूठी खबरें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहों से उनकी छवि पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले उनके परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर भी इसी तरह की भ्रामक खबरें फैलाई जा चुकी हैं।
सभी सीटों पर जीत का दावा कर रहा एनडीए
दूसरी ओर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने चुनाव को लेकर पूरी तैयारी शुरू कर दी है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने दावा किया है कि एनडीए इस बार विधान परिषद की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज करेगा।
उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में गठबंधन ने सभी सीटों पर सफलता हासिल की थी और वही प्रदर्शन विधान परिषद चुनाव में भी दोहराया जाएगा। उम्मीदवारों के चयन को लेकर जेडीयू नेतृत्व लगातार मंथन कर रहा है। इसी कड़ी में रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक भी हुई, जिसमें संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की गई।
बढ़ी राजनीतिक हलचल
विधान परिषद चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। सभी दल अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन और संख्या बल के आधार पर रणनीति बनाने में जुट गए हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रमुख राजनीतिक दल किन चेहरों को मैदान में उतारते हैं और चुनावी मुकाबला कितना दिलचस्प होता है।



