अयोध्या में सेवा और संस्कार को समर्पित प्रेरक आयोजन, सुशील चतुर्वेदी ने मनाया अनोखा जन्मदिवस

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:– धर्मनगरी अयोध्या में समाजसेवी सुशील चतुर्वेदी ने अपना जन्मदिवस सेवा और संस्कार को समर्पित करते हुए एक प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर जरूरतमंद बच्चों को पुस्तकें, कॉपियां और वस्त्र वितरित किए गए। बच्चों की मुस्कान और अभिभावकों की भावुक प्रतिक्रियाओं ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुशील चतुर्वेदी ने कहा, “जन्मदिन तभी सार्थक है जब वह किसी के जीवन में खुशियां लेकर आए। शिक्षा और संस्कार ही समाज की असली ताकत हैं।” उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अच्छे संस्कार अपनाने और माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान करने का संदेश दिया।

मीडिया व अतिथियों का सम्मान

कार्यक्रम में उपस्थित मीडिया प्रतिनिधियों और अतिथियों को भगवान श्रीराम दरबार की पावन तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन भूमि है और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

गणमान्य लोगों की उपस्थिति

कार्यक्रम में अरविंद पाठक, संजय, राहुल यादव सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने सुशील चतुर्वेदी की पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

निरंतर सेवा का अभियान

सुशील चतुर्वेदी लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। उनके नेतृत्व में समय-समय पर जरूरतमंदों की सहायता, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन और युवाओं में राष्ट्रभावना जागरण जैसे अभियान संचालित होते रहे हैं।

उन्हें उत्कृष्ट सामाजिक योगदान के लिए “नेशनल समाजसेवी अवार्ड” से सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वे राष्ट्रीय रक्षा हिंदू परिषद के प्रदेश धर्म प्रचारक प्रभारी (उत्तर प्रदेश) तथा ब्रेन कुंडली संस्थान के प्रदेश मैनेजर (उत्तर प्रदेश) के रूप में दायित्व निभा रहे हैं।

समाज के नाम संदेश

अपने जन्मदिवस पर उन्होंने कहा, “मेरा जन्मदिन उत्सव नहीं, सेवा का संकल्प है। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति खुशहाल नहीं होगा, हमारा प्रयास जारी रहेगा।” उन्होंने युवाओं से राष्ट्र सेवा, नशामुक्ति, सामाजिक एकता और संस्कृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने उनके दीर्घायु और निरंतर समाजसेवा की कामना की। अयोध्या में आयोजित यह आयोजन सेवा, श्रद्धा और सामाजिक समर्पण का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया।

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