खेल और पढ़ाई साथ-साथ, नए स्पोर्ट्स कॉलेज में मिलेगा बेहतरीन प्रशिक्षण
लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने दो नए स्पोर्ट्स कॉलेजों को शुरू करने का फैसला लिया है। सहारनपुर और फतेहपुर में बने स्पोर्ट्स कॉलेज का शैक्षिक सत्र 2026-27 से संचालन शुरू हो जाएगा। योगी सरकार के इस फैसले से प्रदेश के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर खेल सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध हो सकेगा।
वर्षों से लंबित परियोजनाओं को मिली नई जिंदगी
दरअसल यह दोनों परियोजनाएं लंबे समय से लंबित थी। फतेहपुर स्पोर्ट्स कॉलेज को जनवरी 2011 में स्वीकृति मिली थी और नवंबर 2011 में निर्माण कार्य शुरू हो गया था। इसे जुलाई 2018 तक पूरा किया जाना था, लेकिन कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। इसी तरह सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य भी फरवरी 2011 में शुरू होना था और फरवरी 2013 तक पूरा कार्य पूरा करने की मूल तारीख थी, लेकिन विभिन्न कारणों से काम आगे नहीं बढ़ पाया था। योगी सरकार ने इन अधूरी परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए निर्माण कार्य को पूरा कराया है। साथ ही अब दोनों कॉलेजों को नए सत्र से शुरू करने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है।
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पांच स्पोर्ट्स कॉलेजों वाला राज्य बनेगा यूपी
इस तरह योगी सरकार खेल ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ अधूरी योजनाओं को भी जमीन पर उतारने पर जोर दे रही है। वहीं इन दो नए स्पोर्ट्स कॉलेजों के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में संचालित स्पोर्ट्स कॉलेजों की संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी। अभी तक लखनऊ स्थित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, गोरखपुर का वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज और इटावा (सैफई) का मेजर ध्यान चंद स्पोर्ट्स कॉलेज ही संचालित थे। इसके अलावा बलिया में एक और स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण कार्य जारी है।
कक्षा 9 से शुरू होगा एडमिशन
नए कॉलेजों के शुरू होने से प्रदेश के दूर-दराज इलाकों के खिलाड़ियों को अब राजधानी या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और अधिक संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी खेल शिक्षा से जुड़ सकेंगे। फतेहपुर और सहारनपुर दोनों स्पोर्ट्स कॉलेजों में कक्षा 9 से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। फतेहपुर में एथलेटिक्स, हॉकी, हैंडबॉल और कुश्ती जैसे खेल संचालित किए जाएंगे। यहां कुल 80 सीटों पर प्रवेश होगा। जिसमें एथलेटिक्स रनर बालक के लिए 12, एथलेटिक्स जम्पर बालक के लिए 2, थ्रोवर बालक के लिए 4, हॉकी खिलाड़ी बालक के लिए 26, गोलकीपर बालक के लिए 4, कुश्ती बालक के लिए 10 और हैंडबॉल बालक के लिए 22 सीटें निर्धारित की गई हैं।
खेलों की विविधता और सीटों का विस्तार
वहीं सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज में भी कुल 80 सीटों पर एडमिशन होंगे। यहां एथलेटिक्स रनर बालक के लिए 8, एथलेटिक्स जम्पर बालक के लिए 6, थ्रोवर बालक के लिए 6, हॉकी खिलाड़ी बालक के लिए 21, हॉकी गोलकीपर बालक के लिए 4, जूडो बालक के लिए 10, बॉक्सिंग बालक के लिए 15 और भारोत्तोलन बालक के लिए 10 सीटें तय की गई हैं। भारोत्तोलन अभी तक किसी भी स्पोर्ट्स कॉलेज में नहीं था। सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज से पहली बार शुरू हो रहा है। इन कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्र का उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है। चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्य खिलाड़ियों को प्रवेश दिया जाएगा, जिससे प्रतिभा के आधार पर खिलाड़ियों का चयन सुनिश्चित हो सके।
प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज और एक्सीलेंस सेंटर खोलने का लक्ष्यः खेल सचिव
उत्तर प्रदेश खेल विभाग के सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि मुख्यमंत्री जी का प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज और एक्सीलेंस सेंटर खोलने का लक्ष्य है। स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तरह जगह-जगह विभिन्न खेलो को लेकर वहां पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा। जिसमें बच्चों के रहने के साथ ही पढ़ाई की सुविधा भी रहेगी। प्रबंध समिति स्पोर्ट्स कॉलेज के सचिव व लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज के प्रधानाचार्य अतुल सिन्हा ने कहा कि कुशल संचालन के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही खिलाड़ियों को कोई व्यवधान ना उत्पन्न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम
स्पोर्ट्स कॉलेज ऐसे छात्रों के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं, जो खेल में अपना करियर बनाना चाहते हैं। यहां पढ़ाई और खेल दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जाता है। प्रोफेशनल कोचिंग, आधुनिक सुविधाएं और अनुशासित वातावरण खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने में मदद करता है। सहारनपुर और फतेहपुर में स्पोर्ट्स कॉलेजों की शुरुआत उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे न केवल प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में देश को बेहतर खिलाड़ी भी मिल सकेंगे।
चुनाव हारने के बाद भी CM पद न छोड़ें तो क्या होगा? ममता बनर्जी के बयान के बाद संविधान क्या कहता है
न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब निवर्तमान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने चुनाव नतीजों को साजिश करार देते हुए कहा कि यह जनता का असली जनादेश नहीं है। इस बयान के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—अगर कोई मुख्यमंत्री हार के बाद भी पद नहीं छोड़ता, तो आगे क्या होता है?
क्या कहता है संविधान?
भारतीय संविधान के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। Article 164 of the Indian Constitution के अनुसार, मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत बनाए रखना जरूरी होता है। यदि कोई मुख्यमंत्री बहुमत खो देता है, तो उसे पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होता।
गवर्नर के पास क्या विकल्प?
ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास कई संवैधानिक विकल्प होते हैं:
- सबसे पहले मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है
- अगर इस्तीफा नहीं दिया जाता, तो राज्यपाल उन्हें पद से हटा सकते हैं
- नई सरकार बनाने के लिए बहुमत वाले दल को आमंत्रित किया जा सकता है
संविधान विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बिना भी नई सरकार का गठन संभव है।
विधानसभा कार्यकाल खत्म होने का असर
मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। इसके बाद पुरानी विधानसभा स्वतः भंग मानी जाएगी। ऐसे में तकनीकी रूप से पुरानी सरकार का कार्यकाल भी समाप्त हो जाता है और नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाता है।
क्या राष्ट्रपति शासन लग सकता है?
अगर राज्य में राजनीतिक या कानून-व्यवस्था का संकट पैदा होता है, तो राज्यपाल Article 356 of the Indian Constitution के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। यह कदम तब उठाया जाता है जब राज्य में संवैधानिक व्यवस्था ठीक से काम नहीं कर रही हो।
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ममता बनर्जी के आरोप
Mamata Banerjee ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश को प्रभावित किया गया। उन्होंने Election Commission of India पर भी पक्षपात के आरोप लगाए और कहा कि उनकी पार्टी की लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी।
विपक्ष का समर्थन
ममता बनर्जी ने दावा किया कि INDIA Alliance के कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है। उन्होंने बताया कि Sonia Gandhi और Rahul Gandhi ने भी उनसे बातचीत की है।
पश्चिम बंगाल में कब होगा शपथ ग्रहण समारोह? CM पद की दौड़ में कई दावेदार, इस नेता का नाम सबसे आगे
न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। हालांकि पार्टी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को आयोजित किया जा सकता है, जो कि Rabindranath Tagore की जयंती का दिन भी है। हालांकि इस तारीख को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बंगाल का CM कौन होगा?
केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah पहले ही संकेत दे चुके हैं कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री बंगाली मूल का ही होगा। उन्होंने कहा था कि ऐसा व्यक्ति चुना जाएगा जिसने बंगाल में जन्म लिया हो, यहीं शिक्षा प्राप्त की हो और स्थानीय भाषा व संस्कृति को समझता हो। इसके अलावा, महिला मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना पर भी चर्चा जारी है।
CM रेस में ये बड़े नाम
फिलहाल चार प्रमुख नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं:
- Suvendu Adhikari
- Samik Bhattacharya
- Utpal Brahmachari Rao
- Swapan Dasgupta
इसके अलावा Dilip Ghosh का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में लिया जा रहा है।
सबसे आगे कौन?
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, Suvendu Adhikari इस दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह उनका मजबूत चुनावी प्रदर्शन है। बताया जा रहा है कि उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को उनके गढ़ में कड़ी चुनौती दी।
अन्य दावेदारों की स्थिति
Samik Bhattacharya को एक शिक्षित और संतुलित छवि वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
वहीं Utpal Brahmachari Rao को हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने में प्रभावी माना जा रहा है।
Swapan Dasgupta अपने अकादमिक बैकग्राउंड और बौद्धिक छवि के कारण चर्चा में हैं।
कब होगा नेता का चयन?
सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री Rajnath Singh जल्द ही कोलकाता पहुंच सकते हैं और भाजपा विधायकों के साथ बैठक कर नेता का चयन किया जा सकता है। हालांकि, उनकी यात्रा को लेकर भी पार्टी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
गौरतलब है कि हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 206 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि All India Trinamool Congress को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा।
Aaj ka Rashifal 5 May: वृश्चिक में चंद्रमा का प्रभाव, कर्क राशि वालों के लिए हल्की परेशानी, वृश्चिक को धन लाभ के संकेत
Aaj ka Rashifal 5 May: आज ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति में खास बदलाव देखने को मिल रहा है। सूर्य और बुध मेष राशि में स्थित हैं, जबकि शुक्र वृषभ और गुरु मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं। चंद्रमा वृश्चिक राशि में ज्येष्ठा नक्षत्र में संचार कर रहा है, जो शाम करीब 4 बजे तक इसी राशि में रहेगा, इसके बाद धनु राशि में प्रवेश करेगा। राहु कुंभ और केतु सिंह में हैं, वहीं मंगल और शनि मीन राशि में विराजमान हैं। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का आज का राशिफल।
मेष राशि
दिन की शुरुआत में थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहेंगी। हालांकि शाम के बाद हालात बेहतर हो जाएंगे। प्रेम, संतान और व्यापार की स्थिति अच्छी बनी हुई है। स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह है। लाल वस्तु अपने पास रखना शुभ रहेगा।
वृषभ राशि
महत्वपूर्ण कार्यों को शाम से पहले पूरा कर लेना बेहतर रहेगा, क्योंकि उसके बाद कुछ समय के लिए स्थिति कमजोर हो सकती है। प्रेम, संतान और व्यापार के मामलों में स्थिति सकारात्मक है। नौकरी में स्थिरता बनी रहेगी। लाल वस्तु का दान लाभकारी रहेगा।
मिथुन राशि
आज शत्रुओं पर आपका प्रभाव बना रहेगा। शाम के बाद दिन और भी सुखद हो जाएगा। करियर, व्यापार और स्वास्थ्य के लिहाज से दिन अनुकूल है। सरकारी कार्यों में सफलता और नए अवसर मिलने के संकेत हैं। लाल वस्तु का दान करना शुभ रहेगा।
कर्क राशि
आज का दिन थोड़ा मानसिक तनाव देने वाला हो सकता है। कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा, लेकिन मन अशांत रह सकता है। स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में थोड़ी सावधानी रखें। व्यापार सामान्य से बेहतर रहेगा। लाल वस्तु अपने पास रखना लाभकारी रहेगा।
सिंह राशि
भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, लेकिन प्रेम और संतान पक्ष में हल्की चिंता रह सकती है। व्यापारिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। पीली वस्तु अपने पास रखना शुभ होगा।
कन्या राशि
घर-परिवार में हल्की कहासुनी हो सकती है, लेकिन संपत्ति या वाहन खरीदने के योग भी बन रहे हैं। व्यापार में सफलता मिलेगी और प्रेम जीवन भी अच्छा रहेगा। लाल वस्तु का दान करना लाभदायक रहेगा।
तुला राशि
व्यापार में मजबूती आएगी और नए प्रयोग करने के अवसर मिल सकते हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रह सकता है, लेकिन प्रेम और संतान की स्थिति अच्छी है। मां काली की पूजा करना शुभ रहेगा।
वृश्चिक राशि
आज धन लाभ के प्रबल योग हैं। परिवार में खुशहाली का माहौल रहेगा और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी। व्यापार अच्छा चलेगा, हालांकि प्रेम और संतान पक्ष सामान्य रहेगा। मां काली का आशीर्वाद लेना लाभकारी होगा।
धनु राशि
जीवन में सकारात्मकता बनी रहेगी और आवश्यक संसाधन आसानी से उपलब्ध होंगे। प्रेम और संतान को लेकर थोड़ी चिंता रह सकती है, लेकिन व्यापार अच्छा रहेगा। लाल वस्तु पास रखना शुभ रहेगा।
मकर राशि
मन में चिंता और बेचैनी रह सकती है, खासकर शाम तक। हालांकि आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। प्रेम और पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। व्यापार में सफलता मिलेगी। सफेद वस्तु पास रखना लाभकारी रहेगा।
कुंभ राशि
आय के नए स्रोत बनेंगे और पुराने निवेश से भी लाभ मिलेगा। शुभ समाचार मिलने की संभावना है और यात्रा के योग भी बन रहे हैं। स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार सभी क्षेत्रों में स्थिति बेहतर रहेगी। हरी वस्तु पास रखना शुभ रहेगा।
मीन राशि
व्यापारिक स्थिति मजबूत रहेगी और कानूनी मामलों में सफलता मिल सकती है। स्वास्थ्य में सुधार होगा और प्रेम-संतान पक्ष भी मजबूत रहेगा। पीली वस्तु अपने पास रखना शुभ रहेगा।
बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, प्रीपेड स्मार्ट मीटर अब पोस्टपेड की तरह करेंगे काम
लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- उत्तर प्रदेश में विद्युत उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब सभी प्रीपेड मीटर पोस्टपेड स्मार्ट मीटर के रूप में कार्य करेंगे। पहले की तरह ही बिजली बिल में बिल जमा करने की तिथि उल्लिखित रहेगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को अपना बकाया भुगतान 10 किस्तों में करने की बड़ी राहत भी दी गई है।
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ए.के. शर्मा ने इस संबंध में बैठक के बाद विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिलिंग साइकिल वैसे ही रहेगा जैसे पहले पोस्टपेड मीटर में होता था। पूर्व की तरह 1 तारीख से माह के अन्त तक बिल की खपत का एक महीने का बिल एसएमएस और व्हाट्सएप पर दिया जायेगा। जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नम्बर बदला है, वे अपना नम्बर अपडेट करवा सकते हैं। इस फैसले से प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। बिलिंग प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी, भुगतान के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित होगा।
10 तारीख तक मिलेंगे बिल
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सभी स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को प्रत्येक माह की 10 तारीख तक बिल मिल जायेंगे। बिल मिलने की तिथि से भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया जायेगा। जिस उपभोक्ता को समय से बिल न प्राप्त हो वो व्हाट्सएप चैटबॉट्स पर संयोजन संख्या सूचित कर अपना बिल व बकाया बिल प्राप्त कर सकेंगे। यह बिल 1912 पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर भी प्राप्त किये जा सकेंगे।
10 किस्तों में जमा कर सकते हैं बकाया
उपभोक्ताओं को सुविधा देने के लिए यह बड़ा निर्णय लिया गया है कि 30 अप्रैल तक (मई के बिल से पूर्व) उपभोक्ता का जो भी बिल बकाया रहेगा, वह 10 किस्तों में जमा कर सकता है। यदि किसी उपभोक्ता को बिल सम्बन्धी कोई समस्या है तो खण्ड एवं उपखण्ड स्तर पर मई एवं जून माह में वृहद् कैम्प का आयोजन कर स्मार्ट मीटर बिल सम्बन्धित शिकायत निस्तारण की सुविधा दी जायेगी। उपभोक्ता अपनी शिकायत 1912 पोर्टल पर भी दर्ज कर सकता है।
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सिक्योरिटी राशि जमा करने में भी राहत
जिन उपभोक्ताओं के परिसर में पोस्टपेड से प्रीपेड मीटर लगाए गए थे और उनकी सिक्योरिटी वापस कर दी गई थी, अब पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने पर उनसे सिक्योरिटी एकमुश्त न लेकर 4 किस्तों में ली जाएगी।
बिजली आपूर्ति पर भी सख्त निर्देश
ऊर्जा मंत्री ने विद्युत आपूर्ति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी क्षेत्रों में निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब न हों और यदि कहीं खराब हों तो उन्हें तत्काल बदला जाए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बिल न मिलने पर यहां करें संपर्क
पूर्वांचल: +91 8010968292
मध्यांचल: +91 7669003409
पश्चिमांचल: +91 7859804803
दक्षिणांचल: +91 8010957826
केस्को (कानपुर): +91 8287835233
शक्ति भवन में आयोजित इस बैठक में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल सहित प्रबंध निदेशक नितीश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बंगाल-असम में भाजपा की लहर के बीच केरल में भी भाजपा का धमाल; कई बड़े रिकॉर्ड बने
न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रदर्शन कई जगहों पर सुर्खियों में है। पश्चिम बंगाल और असम में शानदार प्रदर्शन के बीच अब केरल में भी पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। पश्चिम बंगाल में भाजपा पहली बार सत्ता पाने वाली है। उसे विधानसभा चुनाव में अब तक 198 सीटों पर बढ़त मिल चुकी है। इसके अलावा असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आई है। यही नहीं भाजपा की इस लहर का मोमेंटम केरल तक में दिखा है। दक्षिण भारत के इस राज्य में भाजपा लंबे समय से अपनी पैठ जमाने की कोशिश करती रही है, लेकिन सफल नहीं हुई है। इस बार विधानसभा चुनाव में उसे कुछ उम्मीद दिख रही है और अब तक उसके दो कैंडिडेट जीत चुके हैं। इन कैंडिडेट्स में से एक वी. मुरलीधरण भी हैं, जो कजाकुट्टम सीट से सीपीएम के कैंडिडेट के. सुरेंद्रन से जीत गए। उन्होंने 18 राउंड तक चली काउंटिंग में 428 वोटों से जीत हासिल की है।
बंगाल में पहली बार सत्ता के करीब
भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार सरकार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
असम में तीसरी बार सरकार
वहीं असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटती दिख रही है। यह राज्य में पार्टी की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
केरल में भी खुला खाता, बढ़ी उम्मीद
लंबे समय से संघर्ष कर रही भाजपा को इस बार केरल में भी सफलता मिली है। वी. मुरलीधरन ने कजाकुट्टम सीट से जीत दर्ज की, जहां उन्होंने के. सुरेंद्रन को कड़े मुकाबले में हराया। इसके अलावा राजीव चंद्रशेखर ने नमोम सीट से जीत हासिल की।
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यह पहली बार है जब भाजपा को केरल में एक से अधिक सीटों पर सफलता मिली है, जिसे पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
केरल में अन्य रिकॉर्ड भी
इस चुनाव में केरल में कई अन्य रिकॉर्ड भी बने हैं। फातिमा थालिया राज्य की पहली मुस्लिम लीग महिला विधायक बनीं, जिन्होंने पेरंबरा सीट से जीत हासिल की।
वहीं Indian National Congress के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर नया रिकॉर्ड बनाया है।
कांग्रेस ने भी दिखाई ताकत
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस जीत का श्रेय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे को दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य में एंटी-इंकम्बेंसी का फायदा कांग्रेस को मिला।
खुद को सुपर चीफ जस्टिस समझ रहा है… ED को नोटिस का दिया निर्देश; क्यों भड़के CJI सूर्यकांत
न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- सुप्रीम कोर्ट में सोमवार 4 मई को सुनवाई के दौरान उस वक्त तीखी टिप्पणी देखने को मिली, जब देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत कोर्ट की रजिस्ट्री के कामकाज से नाराज़ हो गए। मामला आयुषी मित्तल बनाम राजस्थान राज्य से जुड़ा था। उन्होंने सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बहुत ही खराब तरीके से काम कर रही है। CJI सूर्यकांत सूर्यकांत इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “बहुत ही खराब रजिस्ट्री है। यहाँ बैठा हर व्यक्ति खुद को भारत का ‘सुपर चीफ जस्टिस’ समझता है।”
इसके बाद उन्होंने पूछा, “ED डायरेक्टर को नोटिस क्यों नहीं जारी किया गया?” उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या ऐसा कोई आदेश पारित नहीं हुआ था। उन्होंने कहा, “रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल इस बात की जाँच करें कि हमारे मार्च 2026 के आदेश का मतलब ED को नोटिस क्यों नहीं माना गया? प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Enforcement) को नोटिस तुरंत भेजा जाए।”
रजिस्ट्री के कामकाज पर कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बेहद खराब तरीके से काम कर रही है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यहां बैठे लोग खुद को “सुपर चीफ जस्टिस” समझने लगे हैं।
ED को नोटिस न भेजने पर नाराज़गी
CJI ने यह भी सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के डायरेक्टर को नोटिस क्यों नहीं जारी किया गया। उन्होंने पूछा कि क्या मार्च 2026 में दिए गए आदेश के बावजूद नोटिस नहीं भेजा गया।
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तुरंत जांच और कार्रवाई के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिए कि इस मामले की जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि आदेश के बावजूद ED को नोटिस क्यों नहीं भेजा गया। साथ ही उन्होंने तुरंत नोटिस जारी करने को कहा।
कोर्ट में सख्त रुख
CJI का यह रुख न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की लापरवाही पर उन्होंने नाराज़गी जाहिर की।
बंगाल, केरल से तमिलनाडु तक बने रिकॉर्ड, 5 राज्यों के चुनाव नतीजों ने बदला देश का राजनीतिक नक्शा,
न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। इन परिणामों ने न सिर्फ कई नए राजनीतिक रिकॉर्ड बनाए हैं, बल्कि भारत के सियासी समीकरणों को भी नया आकार दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक बढ़त और दक्षिण भारत में हुए बड़े उलटफेर को लेकर हो रही है।
बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को ऐतिहासिक माना जा रहा है। पहली बार पार्टी राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची है। यह वही राज्य है, जहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी का गहरा संबंध रहा और जिसे लंबे समय से भाजपा अपने वैचारिक विस्तार के लिए अहम मानती रही है।
लगातार 15 वर्षों से सत्ता में रही ममता बनर्जी की राजनीतिक पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है। इस जीत का असर आने वाले समय में राज्यसभा की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
केरल में ढहा वामपंथ का आखिरी किला
केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन की बढ़त ने वामपंथी राजनीति को बड़ा झटका दिया है। कभी बंगाल और केरल को वामपंथ का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन अब देश के राजनीतिक नक्शे पर लेफ्ट की पकड़ लगभग समाप्त होती दिख रही है।
तमिलनाडु में विजय की धमाकेदार एंट्री
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय ने अपनी पार्टी TVK के जरिए बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है।
उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्थापित दलों को कड़ी चुनौती दी है। इससे एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली राजनीति को बड़ा झटका लगा है।
असम में भाजपा ने कायम रखी पकड़
असम में भाजपा ने अपनी मजबूत स्थिति बरकरार रखी है। पूर्वोत्तर में यह प्रदर्शन पार्टी की पकड़ को और मजबूत करता है।
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21 राज्यों तक पहुंचा भाजपा-NDA का प्रभाव
इन चुनाव नतीजों के बाद भाजपा और उसके सहयोगियों का प्रभाव देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच गया है। उत्तर से पूर्व और पश्चिम तक पार्टी का राजनीतिक विस्तार तेजी से बढ़ा है।
पूरा हुआ मोदी का बड़ा लक्ष्य
नरेंद्र मोदी लंबे समय से पूर्वी भारत में पार्टी विस्तार की बात करते रहे हैं। ओडिशा में जीत के बाद अब बंगाल में सफलता ने इस लक्ष्य को और मजबूती दी है।
राजनीतिक नक्शे में क्या बदला?
इन चुनावों ने तीन बड़े बदलाव साफ किए हैं:
- भाजपा का पूर्वी भारत में बड़ा विस्तार
- वामपंथ की कमजोर होती पकड़
- दक्षिण भारत में नए क्षेत्रीय चेहरों का उभार
UP Politics: केशव मौर्य का अखिलेश यादव पर तीखा हमला; बंगाल की दीदी, तमिलनाडु वाले भैया हाशिए पर गए
न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के रुझानों के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। सोशल मीडिया पर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस बीच यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।
‘दीदी-भैया’ पर साधा निशाना
केशव मौर्य ने अपने बयान में विपक्षी गठबंधन के नेताओं को निशाने पर लेते हुए ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन का जिक्र किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन नेताओं के सहारे अखिलेश यादव अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें जनता ने अब किनारे कर दिया है।
राहुल और तेजस्वी पर भी टिप्पणी
मौर्य ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं का हाल देश देख चुका है और ऐसे में इनसे गठबंधन करना “डूबती नाव का सहारा” लेने जैसा है।
2027 चुनाव को लेकर सपा पर वार
डिप्टी सीएम ने कहा कि अखिलेश यादव को 2027 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के सपने देखना छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार के विकास कार्यों के सामने विपक्ष की राजनीति कमजोर पड़ रही है।
‘PDA’ रणनीति पर भी सवाल
सपा की ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति पर भी मौर्य ने सवाल उठाए और कहा कि जनता अब भाजपा के साथ है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में भाजपा विपक्ष के गठबंधन और उसकी रणनीति को मुद्दा बनाएगी।
सियासी हलचल तेज
मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों के चुनावी नतीजे सामने आ रहे हैं और राजनीतिक दल 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले समय में यूपी की सियासत को और गर्मा सकता है।



