Thursday, June 18, 2026

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लखनऊ: रेलवे बोर्ड के सदस्य हितेंद्र मल्होत्रा ने किया उतरेटिया-ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशनों का निरीक्षण, कार्यों में तेजी के निर्देश

लखनऊ(उत्तर रेलवे मंडल)/सर्वोदय न्यूज़:– रेलवे बोर्ड के सदस्य (ऑपरेशन एंड बिजनेस डेवलपमेंट) हितेंद्र मल्होत्रा ने शनिवार को लखनऊ मंडल के उतरेटिया से ट्रांसपोर्ट नगर रेलखंड का निरीक्षण किया। उनके साथ मंडल रेल प्रबंधक सुनील कुमार वर्मा सहित उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रेलवे बोर्ड के सदस्य हितेंद्र ने विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण के जरिए रेलखंड की संरक्षा और संचालन व्यवस्था का गहन परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उतरेटिया और ट्रांसपोर्ट नगर रेलवे स्टेशनों पर चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया।

अमृत भारत स्टेशन योजना” के तहत जारी उतरेटिया रेलवे स्टेशन आधुनिकीकरण कार्यों की रेलवे बोर्ड के मेंबर हितेंद्र मल्होत्रा ने ली जानकरी

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत कार्यों की समीक्षा

उतरेटिया रेलवे स्टेशन पर हितेंद्र मल्होत्रा ने “अमृत भारत स्टेशन योजना” के तहत जारी आधुनिकीकरण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि—

  • कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए।
  • निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
  • यात्री सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन पर तेज़ी लाने के निर्देश

इसके पश्चात वे ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन पहुंचे, जहाँ उन्होंने निर्माण गतिविधियों की प्रगति समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को—सभी कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण करने, और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उक्त जानकारी कुलदीप तिवारी,वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबन्धक, उत्तर रेलवे, लखनऊ द्वारा दी गई|

नवनियुक्त UP डीजीपी राजीव कृष्ण की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस – यूपी पुलिस को नई दिशा देने वाले 10 बड़े ऐलान

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:-  उत्तर प्रदेश के नव नियुक्त पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने सोमवार को राजधानी लखनऊ में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राज्य की पुलिस व्यवस्था को लेकर बड़ा विज़न पेश किया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते हुए कहा कि “दुनिया के सबसे बड़े पुलिस बल का नेतृत्व करना मेरे लिए सम्मान की बात है और मैं इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाऊंगा।”

राजीव कृष्ण ने साफ किया कि उनका फोकस सिर्फ कानून व्यवस्था पर नहीं, बल्कि आधुनिक पुलिसिंग, जनविश्वास, साइबर सुरक्षा और पुलिस कल्याण पर भी रहेगा। उन्होंने अपने रोडमैप में 10 प्रमुख बिंदुओं को स्पष्ट किया, जो आने वाले वर्षों में यूपी पुलिस की कार्यशैली को नया आकार देंगे।

1. अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

अपराध/अपराधियों के खिलाफ जीरो सहिष्णुता की नीति हम अपराध और अपराधियों के खिलाफ एक अडिग रुख बनाए रखेंगे, संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। यह नीति हमारी कानून प्रवर्तन (law enforcement) रणनीति की आधारशिला होगी, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाना है।

2. महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण

महिलाओं का सशक्तिकरण और संरक्षण- सभी रूपों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और समाधान पर विशेष जोर दिया जाएगा। हमारी पहल महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी सुरक्षा और संरक्षा की भावना को बढ़ाने की दिशा में होगी।

3. जन शिकायतों का संवेदनशील निवारण

जन शिकायत निवारण जन शिकायतों का सफल समाधान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। हम हर स्तर पर सभी शिकायतों से निपटने में बहुत सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएंगे, यह सुनिश्चित करते हुए कि नागरिकों की आवाज सुनी जाए और उसका तुरंत समाधान किया जाए।

4. कानून व्यवस्था में कोई समझौता नहीं

कानून और व्यवस्था बनाए रखना कानून और व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति बिल्कुल भी सहनशीलता नहीं बरती जाएगी। हम हर कीमत पर कानून के शासन को बनाए रखेंगे, राज्य के हर हिस्से में शांति व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

5. साइबर क्राइम पर आक्रामक रुख

साइबर अपराध का मुकाबला करना- हाल के वर्षों में विशेष कर कोविड के बाद से साइबर अपराध नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण खतरे के रूप में उभरा है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इसकी रोखथाम और पता लगाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करके जवाब दिया है। साइबर खतरों से आगे रहने के लिए उन्नत तकनीकों का लाभ उठाते हुए इसे समय के साथ और मजबूत किया जाएगा।

6. पुलिस सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार

बेहतर पुलिस सेवाएँ- उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दी जाने वाली पुलिस सेवाओं के दायरे और वितरण में और सुधार किया जाएगा। हम सुनिश्चित करें कि हमारी सेवाएँ नागरिकों की जरूरतों के हिसाब से सुलभकुशल और उत्तरदायी हो।

7. पुलिस कल्याण पर विशेष फोकस

पुलिस कल्याण पर ध्यान- दुनिया के सबसे बड़े पुलिस बल के रूप में, हमारे कर्मियों के काम को प्रभावित करने वाले प्रशासनिक और कल्याणकारी मुद्दों पर विशेष जोर दिया जाएगा। हम पुलिस कल्याण को प्राथमिकता देंगे, यह सुनिश्चित करते हुए कि हमारे कर्मी अपने कार्यों को सम्पादित करने में motivated रहे।

8. पुलिस प्रतिभाओं का सर्वोत्तम उपयोग

प्रतिभा और विशेषज्ञता का उपयोग पुलिसिंग के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त कई प्रतिभाशाली पुलिस अधिकारी व कर्मी है। उनके कौशल और ज्ञान की पहचान की जाएगी और उपरोक्त सभी लक्ष्यों को बेहतर बनाने के लिए उनका उपयोग किया जाएगा, जिससे बल के भीतर उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

 9. AI और टेक्नोलॉजी आधारित स्मार्ट पुलिसिंग

प्रौद्योगिकी और एआई का लाभ उठाना- हमारे संचालन की दक्षता (Efficiency) और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यापक उपयोग किया जाएगा। AI हमारे उद्देश्यों को लागू करने में एक गेम चेंजर साबित होगा, जिससे हम डेटा. संचालित उचित निर्णय लेने और अपने संसाधनों का optimized उपयोग करने में सक्षम होंगे।

10. सेवाकालीन प्रशिक्षण को मिलेगा सर्वोच्च स्थान

निरंतर प्रशिक्षण ही एकमात्र आधार है, जिस पर किसी भी संगठन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। दिन प्रतिदिन की चुनौतियों का सामना करने में, इस महत्वपूर्ण पहलू को अक्सर इसका उचित महत्व नहीं दिया जाता है। मेरा प्रयास होगा कि सेवाकालीन प्रशिक्षण को उच्च प्राथमिकता बाला क्षेत्र बनाया जाए ताकि नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकें।

उपरोक्त 10 बिंदु उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक प्रकाश स्तंभ के रूप में कार्य करेंगे, और मुझे विश्वास है कि बल के सभी सदस्य इनमें से प्रत्येक को प्राप्त करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।

डीजीपी राजीव कृष्ण का यह दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस आने वाले समय में न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने में बल्कि विश्वस्तरीय स्मार्ट पुलिसिंग की ओर बढ़ेगी।

“हम कानून के शासन को मजबूत करते हुए नागरिकों की सेवा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे। उत्तर प्रदेश पुलिस हर चुनौती के लिए तैयार है।” – डीजीपी राजीव कृष्ण

पिछले पांच माह से जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में जौनपुर टॉप फाइव में बना हुआ है

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़-  प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग का असर साफ नजर आ रहा है। सीएम योगी खुद हर माह जिलावार मामलों की समीक्षा भी करते रहते हैं। योगी सरकार की विशेष पहल के तहत तेजी से मामलों के निपटारे की रणनीति को अपनाया गया, जिससे राजस्व विवादों के मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भर में राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी देखी गयी है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) द्वारा मई माह की जारी रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक राजधानी में मामलों को निस्तारित किया गया है जबकि जनपद स्तरीय न्यायालय में राजस्व के मामले निपटाने में एक बार फिर जौनपुर ने बाजी मारी है।

राजधानी में सबसे अधिक कुल 15,137 मामले निस्तारित किये गये
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश है कि राजस्व विवादों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य न केवल जनता को त्वरित न्याय दिलाना है, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देना है। इसी के तहत प्रदेश के जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। राजस्व परिषद की आरसीसीएमएस की मई माह की रिपोर्ट के अनुसार मई में पूरे प्रदेश में कुल 3,20,719 राजस्व मामलों को निस्तारण किया गया। इसमें सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में 15,137 मामले निस्तारित किये गये, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है। इसके बाद जौनपुर कुल 9,945 मामलों को निस्तारित कर पूरे प्रदेश में दूसरे, प्रयागराज 9,525 मामलों को निस्तारित कर तीसरे स्थान पर है।

जनपद स्तरीय न्यायालयाें में जौनपुर ने मारी बाजी, सबसे अधिक 563 मामले किये निस्तारित
जौनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार राजस्व मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। बोर्ड ऑफ रेवन्यू की मई माह की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक निस्तारण से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के प्रति माह निस्तारण के मानक 250 के सापेक्ष 563 मामलों का निस्तारण किया है। इसका प्रतिशत 225.20 है। इसी के साथ जनपदीय न्यायायल में राजस्व मामलों के निस्तारण में प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है जबकि 549 मामलों को निस्तारण कर दूसरे स्थान पर सुल्तानपुर और 262 मामले निस्तारित कर तीसरे स्थान पर गाजीपुर है। इसी तरह मई में अयोध्या के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 69 मामलों का निस्तारण कर 230 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो की प्रदेश भर में सबसे अधिक है और अयोध्या प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। वहीं जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 66 मामले निस्तारित किये गये। वहीं मऊ के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 65 मामले निस्तारित किये गये। इसी तरह जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये मामलों में क्रमश: जौनपुर दूसरे और मऊ तीसरे स्थान पर है।

भू राजस्व संबंधित मामलों के निस्तारण में भी जौनपुर अव्वल
इसी प्रकार अपर जिलाधिकारी भू राजस्व जौनपुर निर्धारित मानक 50 के सापेक्ष कुल 208 वादों का निस्तारण कर प्रदेश में प्रथम स्थान पर हैं। वहीं अपर जिलाधिकारी भू एवं राजस्व गाजीपुर कुल 61 वादों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर हैं तथा अपर जिलाधिकारी भू एवं राजस्व मीरजापुर कुल 24 वादों का निस्तारण कर तीसरे स्थान पर हैं। इसके साथ ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ने 50 के मानक के मुकाबले 146 मामलों का निस्तारण कर 292 प्रतिशत हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि 138 मामले निस्तारित कर बाराबंकी दूसरे और 114 मामले निस्तारित कर तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा अतिरिक्त उपजिलाधिकारी प्रथम जौनपुर अपने मानक 60 के सापेक्ष कुल 80 राजस्व वादों निस्तारण कर सूची में 37वें स्थान पर है, जबकि अतिरिक्त उपजिलाधिकारी द्वितीय जौनपुर अपने मानक 60 के सापेक्ष कुल 63 राजस्व वादों का निस्तारण कर सूची में 37वें स्थान पर

पालतू जानवर पालने की सोच रहे हैं? जानिए नए पालतू माता-पिता के लिए ज़रूरी टिप्स और तैयारियाँ 

लाइफस्टाइल/सर्वोदय न्यूज़:- पालतू जानवर (Pets) सिर्फ एक साथी नहीं, बल्कि परिवार का अहम हिस्सा होते हैं। वे घर में खुशियाँ और पॉजिटिव एनर्जी लाते हैं, लेकिन साथ ही जिम्मेदारियाँ भी बढ़ाते हैं। अगर आप पहली बार पालतू पालने जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि क्या तैयारियाँ ज़रूरी हैं, तो यह गाइड आपके लिए है।

यहाँ हम डॉ. हेमंत तिवारी (Veterinary Expert) के अनुसार पालतू को घर लाने से पहले क्या-क्या सोच लेना चाहिए और कैसे उन्हें एक सुरक्षित, प्यार भरा वातावरण दिया जाए।

1. पालतू जानवर का चयन सोच-समझकर करें

हर इंसान की दिनचर्या और घर की जगह अलग होती है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी लाइफस्टाइल के अनुसार पालतू का चुनाव करें:

  • अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए: छोटे आकार के कुत्ते (Pug, Shih Tzu) या बिल्ली सही विकल्प हैं।
  • बड़े घर या बगीचे वाले लोगों के लिए: बड़े और एक्टिव डॉग्स (Labrador, German Shepherd) उपयुक्त हो सकते हैं।
  • व्यस्त जीवनशैली वाले लोगों के लिए: मछली, पक्षी या खरगोश जैसे कम देखभाल वाले पालतू उपयुक्त होते हैं।

2. समय और देखभाल की आवश्यकता को समझें

हर पालतू को समय और ध्यान चाहिए। उन्हें सिर्फ खाना देना काफी नहीं, बल्कि इंटरैक्शन और एक्सरसाइज भी ज़रूरी है।

  • कुत्ते: नियमित वॉक, ग्रूमिंग, ट्रेनिंग और खेलने का समय चाहिए
  • बिल्ली: कम रखरखाव वाली, लेकिन साफ-सफाई और मनोवैज्ञानिक संबल जरूरी
  • पक्षी/खरगोश: पिंजरे की सफाई, सामाजिक संपर्क और सही आहार

3. पालतू के लिए घर को तैयार करें

पालतू के आने से पहले ही घर को सुरक्षित और अनुकूल बनाएं:

  • बिजली की तारें, जहरीली चीजें या छोटे चबाने वाले आइटम हटा दें
  • खाने, सोने और खेलने का एक निर्धारित स्थान बनाएं
  • कुत्ते के लिए गेट या बाड़ लगवाएं

4. ज़रूरी सामान पहले से खरीदें

पालतू के आने से पहले इन चीजों का इंतजाम कर लें:

  • खाने-पीने के बर्तन
  • उम्र और नस्ल के अनुसार खाना
  • बिस्तर/मैट
  • लिटर बॉक्स या टॉयलेट ट्रेनिंग पैड
  • कॉलर, पट्टा, हार्नेस
  • खिलौने और ग्रूमिंग किट

5. भरोसेमंद पशु चिकित्सक से संपर्क करें

पालतू को लाने के तुरंत बाद वेटरिनेरियन से मिलना जरूरी है। इससे आपको मिलेगी:

  • प्राथमिक जांच और टीकाकरण
  • डवर्मिंग और नसबंदी की जानकारी
  • हेल्थ चेकअप शेड्यूल
  • इमरजेंसी में संपर्क करने का तरीका

6. समाजिकरण (Socialization) पर दें ध्यान

पालतू को शुरू से ही लोगों, बच्चों और दूसरे जानवरों के संपर्क में लाना ज़रूरी है। इससे वे ज्यादा संतुलित और खुशमिजाज बनते हैं।

  • डॉग्स के लिए खासतौर पर ये ज़रूरी है वरना उनमें डर या आक्रामकता आ सकती है
  • पार्क, पेट फ्रेंडली कैफे या ग्रुप एक्टिविटीज़ में ले जाएं

7. बेसिक ट्रेनिंग में करें शुरुआत

पालतू का व्यवहार सुधारने और आपकी बॉन्डिंग मजबूत करने के लिए ट्रेनिंग बेहद जरूरी है:

  • “बैठो”, “आओ”, “ना करो” जैसी बेसिक कमांड सिखाएं
  • पॉजिटिव रिवार्ड दें जैसे ट्रीट या प्यार
  • पेशेवर ट्रेनर की मदद लें अगर ज़रूरत हो
  • पालतू अपनाना भावनात्मक रूप से सुकून देने वाला निर्णय है, लेकिन इसकी ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। ऊपर बताए गए सुझावों को अपनाकर आप एक जिम्मेदार और खुशहाल पालतू माता-पिता (Responsible Pet Parent) बन सकते हैं।

सुबह खाली पेट खाएं ये 5 सुपरफूड्स, बिना दवा के कंट्रोल में रहेगा शुगर और ब्लड प्रेशर 

लाइफस्टाइल/सर्वोदय न्यूज़:- आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी और गलत लाइफस्टाइल की वजह से डायबिटीज (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर (High BP) आम हो चुके हैं। ये दोनों बीमारियाँ ‘साइलेंट किलर’ मानी जाती हैं, जो शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती हैं। लेकिन अच्छी खबर ये है कि कुछ आसान घरेलू उपायों से आप बिना दवा के भी इन्हें काबू में रख सकते हैं।

विशेषज्ञों की मानें तो सुबह खाली पेट कुछ प्राकृतिक चीजों का सेवन करके इन बीमारियों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। आइए जानते हैं वो 5 चमत्कारी चीजें जिन्हें आप रोज़ाना खाली पेट खाकर हेल्दी रह सकते हैं।

1. भीगे हुए मेथी दाने (Fenugreek Seeds)

ब्लड शुगर और बीपी कंट्रोल का आयुर्वेदिक उपाय

रातभर पानी में भिगोए गए मेथी दाने सुबह खाली पेट खाने से शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। यह ब्लड शुगर लेवल को नेचुरल तरीके से कंट्रोल करता है।
कैसे लें: 1 चम्मच मेथी दाना रात में भिगो दें, सुबह बीज चबाकर खाएं और पानी पी लें।

2. लहसुन की कच्ची कलियां (Raw Garlic Cloves)

ब्लड प्रेशर को नेचुरली घटाने वाला रामबाण नुस्खा

लहसुन में मौजूद एलिसिन तत्व हाई बीपी और शुगर दोनों के लिए लाभकारी है। ये रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स कर ब्लड फ्लो बेहतर बनाता है।
कैसे लें: 1-2 लहसुन की कली सुबह चबाकर खाएं और ऊपर से गुनगुना पानी पिएं।

3. आंवला (Amla)

इम्युनिटी बूस्टर और शुगर कंट्रोल एजेंट

विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर आंवला डायबिटीज कंट्रोल करने के साथ ही बीपी को भी बैलेंस करता है।
कैसे लें: रोज सुबह 1 ताज़ा आंवला खाएं या फिर उसका जूस पिएं।

4. भीगे बादाम (Soaked Almonds)

हार्ट हेल्थ और ब्लड शुगर के लिए सुपरफूड

बादाम में पाए जाने वाले हेल्दी फैट्स, फाइबर और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर और शुगर को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
कैसे लें: 4-5 बादाम रातभर पानी में भिगो दें, सुबह छिलका उतारकर खाएं।

5.अलसी के बीज (Flaxseeds)

ओमेगा-3 से भरपूर बीपी और डायबिटीज कंट्रोलर

अलसी में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और फाइबर न केवल दिल को मजबूत बनाते हैं, बल्कि शुगर और बीपी को भी नियंत्रित करते हैं।
कैसे लें: रोज सुबह एक चम्मच अलसी के बीज चबाकर खाएं या गुनगुने पानी के साथ लें।

हेल्थ टिप्स:
  • इन उपायों के साथ संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ज़रूरी है।
  • किसी भी गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

गजब! शराब के ठेके की लगी ₹98.6 करोड़ की बोली, जानिए कौन सा जोन बना राज्य का सबसे महंगा शराब जोन

हरियाणा/सर्वोदय:- हरियाणा के गुरुग्राम में शराब के कारोबार ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। गोल्फ कोर्स रोड स्थित ब्रिस्टल चौक जोन को ₹98.6 करोड़ की ऐतिहासिक बोली के साथ राज्य का अब तक का सबसे महंगा शराब जोन घोषित किया गया है। यह बोली नई शराब नीति 2025-27 के तहत आयोजित नीलामी में लगी, जिसने एक्साइज विभाग और व्यापार जगत को चौंका दिया है।

क्यों खास है ब्रिस्टल चौक जोन?

पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यही जोन ₹49.3 करोड़ में नीलाम हुआ था, लेकिन सरकार ने इस बार इसका रिजर्व प्राइस दोगुना कर ₹94.6 करोड़ रखा, जिसे G-Town Wines नामक कंपनी ने ₹98.6 करोड़ की एकल बोली में हासिल किया। गौर करने वाली बात यह है कि इस जोन में सिर्फ दो शराब दुकानें खोलने की अनुमति है।

क्या है नई शराब नीति का असर?

हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में मंजूर की गई नई एक्साइज पॉलिसी 2025-27 के तहत:

  • अब शराब लाइसेंस 12 महीनों की बजाय 22 महीनों (जून 2025 – मार्च 2027) के लिए मान्य होंगे।
  • नई नीति के चलते रिजर्व प्राइस और बोली दोनों में बड़ा उछाल देखने को मिला है।

गुरुग्राम: हरियाणा की एक्साइज कैपिटल

हरियाणा के एक्साइज विभाग के अनुसार, गुरुग्राम राज्य के कुल शराब राजस्व में 35% से 40% तक का योगदान देता है। इस बार की नीलामी से सिर्फ गुरुग्राम से ही ₹1,270 करोड़ की कमाई हुई है, जो ₹1,198 करोड़ के रिजर्व प्राइस से 6% अधिक है।

अन्य प्रमुख जोनों की बोली राशि:

जोन

बोली राशि

बढ़ोतरी (%)

DLF-3 ₹63 करोड़

+ ₹3 करोड़

शंकर चौक

₹62 करोड़

हॉराइजन प्लाजा

₹46.2 करोड़

मामूली बढ़त

नवादा

+30%
साउथ सिटी

+25%

अमेरिकन एक्सप्रेस (SPR)

+24.3%
बादशाहपुर

+20.9%

सिकोहपुर, कांकरोला

+20.5%

सोहना रोड

+16.9%

बन्नी स्क्वायर

+12%

आगे की नीलामी कब?

  • गुरुग्राम वेस्ट जोन की 21 शराब जोनों की नीलामी: 3 जून 2025
  • गुरुग्राम ईस्ट जोन की 29 शराब जोनों की नीलामी: 5 जून 2025
अधिकारियों का क्या कहना है?

हरियाणा के उप आबकारी एवं कर आयुक्त अमित भाटिया ने कहा: इस बार नीलामी को व्यापारियों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है, जो सरकार की नई नीति की सफलता को दर्शाता है।”

राजस्व लक्ष्य और नई गाइडलाइन्स

  • नई शराब नीति से सरकार ने ₹14,064 करोड़ राजस्व का लक्ष्य तय किया है।
  • पिछली बार (2024-25) ₹12,650 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹11,491 करोड़ की वसूली (करीब 90%) हुई थी।
  • शहरी क्षेत्रों में शराब की दुकानें अब निर्धारित समय पर ही बंद होंगी।
  • 500 से कम जनसंख्या वाले गांवों में शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई है।
  • आहातों (ओपन बार) में लाइव परफॉर्मेंस पर भी रोक लगा दी गई है।

गुरुग्राम में शराब नीलामी ने न केवल हरियाणा में नई शराब नीति के असर को उजागर किया है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि एक्साइज सेक्टर में निवेशकों का भरोसा और प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

नॉर्थ-ईस्ट भारत में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही, राहत कार्य जारी

नेशनल डेस्क/नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:-  पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण व्यापक तबाही मची हुई है। मणिपुर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

मणिपुर: 3,800 से अधिक लोग प्रभावित, 883 घर क्षतिग्रस्त

मणिपुर में पिछले चार दिनों से मूसलधार बारिश जारी है, जिससे इंफाल पूर्वी जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। अब तक 3,800 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 883 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। राज्य सरकार ने 31 राहत शिविर स्थापित किए हैं और सेना व असम राइफल्स की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। इंफाल नदी का जलस्तर बढ़ने से ऑल इंडिया रेडियो और जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान जैसे प्रमुख संस्थान जलमग्न हो गए हैं।

सिक्किम: 1,500 से अधिक पर्यटक फंसे, 32 की मौत

सिक्किम में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण 1,500 से अधिक पर्यटक उत्तर सिक्किम में फंसे हुए हैं। लाचुंग होटल एसोसिएशन और स्थानीय प्रशासन की मदद से बचाव कार्य जारी है। अब तक 32 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

अरुणाचल प्रदेश: 14 लोग सुरक्षित निकाले गए

अरुणाचल प्रदेश के निचली दिबांग घाटी में बाढ़ के कारण 14 लोग फंस गए थे। भारतीय वायुसेना ने एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से इन लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। यह अभियान राज्य प्रशासन के अनुरोध पर चलाया गया।

असम: 78,000 लोग प्रभावित, 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर

असम में 15 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर है, जहां 78,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। 10 प्रमुख नदियां, जिनमें ब्रह्मपुत्र और बाराक शामिल हैं, खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सरकार ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं और प्रभावितों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आगामी सप्ताह, 6 जून तक अरुणाचल प्रदेश के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इन राज्यों के निवासियों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे सुरक्षित स्थानों पर जाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

Aaj Ka Rashifal 2 June 2025: सोमवार का राशिफल, जानें किन राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ और किसे बरतनी होगी सावधानी

राशिफल 2 जून 2025 (Daily Horoscope 2 June 2025)सर्वोदय न्यूज़: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवार का दिन कई राशियों के लिए तरक्की, लाभ और सकारात्मक परिणाम लेकर आया है। वहीं कुछ राशि के जातकों को सतर्क रहने की जरूरत है। जानिए सभी 12 राशियों का राशिफल (Horoscope Today in Hindi) और समझिए दिन भर की संभावनाएं।

मेष राशि (Aries)

आज आपके मन में कुछ असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है। ऑफिस में तनाव महसूस हो सकता है, लेकिन पारिवारिक जीवन शांतिपूर्ण रहेगा। सेहत और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।

वृषभ राशि (Taurus)

आज का दिन शानदार रहेगा। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। प्रमोशन या आयवृद्धि के योग बन रहे हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।

मिथुन राशि (Gemini)

काम का दबाव अधिक रहेगा। पुराने रुके हुए कामों में आज गति आ सकती है। परिवार का साथ मिलेगा और आर्थिक मामलों में सुधार संभव है।

कर्क राशि (Cancer)

आज भागदौड़ बनी रहेगी। कामकाज में व्यस्तता बढ़ेगी लेकिन पारिवारिक सहयोग से राहत मिलेगी। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।

सिंह राशि (Leo)

आपकी मेहनत रंग लाएगी। नौकरी में तरक्की और नए प्रोजेक्ट मिलने के योग हैं। पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।

कन्या राशि (Virgo)

आज थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। व्यावसायिक निर्णय सोच-समझकर लें। धैर्य रखें और किसी वरिष्ठ की सलाह से निर्णय लें।

तुला राशि (Libra)

यह दिन आपकी मेहनत को सफलता में बदल सकता है। आर्थिक क्षेत्र में प्रगति होगी और करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। मान-सम्मान में भी बढ़ोतरी होगी।

वृश्चिक राशि (Scorpio)

आज सरकारी कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है। कारोबार में लाभ और निवेश से फायदा हो सकता है। परिवार से संबंध मधुर बने रहेंगे।

धनु राशि (Sagittarius)

आज का दिन भाग्य का साथ लेकर आया है। धार्मिक यात्रा के योग हैं, और मन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी। दोस्तों और रिश्तेदारों से सहयोग मिलेगा।

मकर राशि (Capricorn)

सावधानी जरूरी है। सेहत पर ध्यान दें और महत्वपूर्ण निर्णय जल्दबाजी में न लें। बुजुर्गों का मार्गदर्शन लाभकारी रहेगा।

कुंभ राशि (Aquarius)

नए संपर्क बन सकते हैं जो भविष्य में लाभदायक होंगे। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति मिल सकती है। संबंधों में मधुरता आएगी।

मीन राशि (Pisces)

भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी और करियर में तरक्की के योग बनेंगे। विद्यार्थी वर्ग के लिए दिन अनुकूल है।

इस बार योगी के लिए बेहद खास होगा उनका जन्मदिन

लखनऊ/सर्वोदय न्यूज़:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए विश्व पर्यावरण दिवस हर वर्ष खास रहा है। वजह इसी दिन उनका जन्मदिन होना और पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति उनकी निजी रुचि तथा उनके किए जा रहे प्रयास हैं। इस बार का उनका जन्मदिन व पर्यावरण दिवस उनके लिए और खास होने वाला है।

उल्लेखनीय है कि योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री के साथ गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। यह वही पीठ है जिसकी तीन पीढ़ियों ने करीब एक सदी तक राम मंदिर आंदोलन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये पीढ़ियां हैं योगी के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ, उनके गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ और पीठ के उत्तराधिकारी एवं पीठाधीश्वर के रूप में वह खुद भी। देश और दुनिया के इतिहास में किसी एक मुद्दे पर एक ही शिद्दत से संघर्ष करने और उसे अंजाम तक पहुंचते हुए देखने वाला ऐसी पीढ़ियां खुद में अपवाद है। यही नहीं आज से करीब आठ साल पहले जब योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तब भी जब भी मौका मिला, अयोध्या जाकर उन्होंने लोगों और संत समाज को यह संदेश दिया कि वह अयोध्या के हैं और अयोध्या के लोग उनके। सिर्फ संदेश ही नहीं दिया, अयोध्या की बेहतरी के लिए जो भी संभव है वह दिया। राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद तो उन्होंने अयोध्या के कायाकल्प के लिए खजाने का मुंह ही खोल दिया। आज बदली अयोध्या इसका प्रमाण है। बदलाव का यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मंशा के अनुसार अपने बदले रूप में अयोध्या का शुमार धार्मिक लिहाज से दुनिया के सबसे खूबसूरत तीर्थस्थान के रूप में नहीं हो जाता

क्यों खास है इस बार योगी का जन्मदिन

दरअसल इसी दिन इस बार अयोध्या स्थित राम मंदिर के राम दरबार सहित पूरक मंदिरों में अन्य देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। अपने जन्मदिन एवं पर्यावरण दिवस के नाते यह दिन उनके लिए यूं ही खास होता है। राम दरबार की स्थापना समारोह में मुख्य अतिथि होने के नाते यह और खास होने वाला है। यही नहीं मुहूर्त इसे और खास बना रहे है। मसलन यह कृष्ण के द्वापर युग की आरंभ तिथि है।
पांच जून को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी की तिथि है। यह मोक्षदायिनी, जीवनदायिनी, दुनिया के सबसे पुरानी सभ्यताओं का पालना रही भारतीय परंपरा में सबसे पवित्र एवं पूज्यनीय गंगा नदी के धरा पर अवतरण की भी तिथि है। उनका अवतरण सतयुग में हुआ था। इस तिथि पर गंगा दशहरा का आयोजन होता है। त्रेता में भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पूरे रामेश्वरम की स्थापना भी इसी तिथि पर की थी। इस तरह इस तिथि का विस्तार सभी युगों तक है।
उल्लेखनीय है कि अपनी परंपरा में शुभ मुहूर्त का शुरू से ही बेहद महत्व रहा है। यहां तक कि जब भगवान श्रीराम ने अवतार लिया था तब भी शुभ मुहूर्त ही था, इस बारे में रामचरित मानस में तुलसी दास ने लिखा है, “नौमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता। मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा।”

राम मंदिर के हर आयोजन में रखा गया शुभ मुहूर्त का ख्याल

मालूम हो कि राम मंदिर निर्माण के हर महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए शुभ मुहूर्त का चयन किया गया। मसलन पिछले 30 अप्रैल को जब निर्माण के बाद प्रतिमाओं को जयपुर से लाकर संबंधित मंदिरों में रखा गया, तब अक्षय तृतीया का दिन था। माना जाता है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। इसी क्रम में पिछले साल 22 जनवरी को मंदिर के भूतल में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पौष शुक्ल द्वादशी को हुई थी। इसे भगवान विष्णु के कूर्मावतार की तिथि मानी जाती है।

गोरक्षपीठ और राम मंदिर आंदोलन

गोरक्षपीठ और राम मंदिर आंदोलन के रिश्ते का विस्तार करीब 100 वर्षों और पीठ की तीन पीढ़ियों का है। इन पीढ़ियों का एक ही सपना था, अयोध्या में रामलला की जन्मभूमि पर दिव्य और भव्य राम मंदिर बने। गोरक्षपीठ के मौजूदा पीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उनके दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ एवं पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने इस बाबत न सिर्फ सपना देखा बल्कि इस सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष भी किया। एक सदी के दौरान राम मंदिर को लेकर अयोध्या में हुई हर महत्वपूर्ण घटनाक्रम में इनमें से किसी न किसी की उपस्थित इसका प्रमाण है।
गोरक्षपीठ के साथ सुखद संयोग यह भी रहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने से लेकर भूमि पूजन, शिलान्यास और प्राण प्रतिष्ठा तक हुए कार्यक्रम के अलावा हर घटनाक्रम में योगी मौजूद थे। उनकी मंशा है, अयोध्या धार्मिक लिहाज से विश्व का सबसे सुंदर पर्यटन स्थल बने। इस संदर्भ में हो रहे कार्यों का निरीक्षण करने के लिए वह 100 से अधिक बार अयोध्या गए होंगे। इससे उन्होंने साबित किया कि अयोध्या उनकी है और अयोध्या के लोग भी उनके हैं।

योगी के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने दिया मंदिर आंदोलन को संगठित रूप

यूं तो राम जन्मभूमि स्थित मंदिर पर फिर से रामलला आंदोलन विराजमान हों, इस बाबत छिटपुट संघर्ष की शुरुआत इसको गिराए जाने के बाद से ही शुरू हो गया था। मुगल काल से लेकर ब्रिटिश काल के गुलामी के दौर और आजाद भारत का करीब 500 साल का कालखंड इसका प्रमाण है। इन सारे संघर्षों और इसके लिए खुद को बलिदान देने वालों के दस्तावेजी सबूत भी हैं। पर, आजादी के बाद इसे पहली बार रणनीति रूप से संगठित स्वरूप और एक व्यापक आधार देने का श्रेय गोरक्षपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ को जाता है। 1935 में गोरक्षपीठाधीश्वर बनने के बाद से ही उन्होंने इस बाबत प्रयास शुरू कर दिया था। इस क्रम में उन्होंने अयोध्या के अलग-अलग मठों के साधु, संतों को एकजुट करने के साथ ही जातीय विभेद से परे हिंदुओ को समान भाव व सम्मान के साथ जोड़ा। 22-23 दिसंबर 1949 को प्रभु श्रीरामलला के विग्रह के प्रकटीकरण के नौ दिन पूर्व ही महंत दिग्विजयनाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो चुका था। श्रीरामलला के प्राकट्य पर महंत जी खुद वहां मौजूद थे। प्रभु श्रीराम के विग्रह के प्रकटीकरण के बाद मामला अदालत पहुंचा। इसके चलते विवादित स्थल पर ताला भले जड़ दिया गया पर पहली बार वहां पुजारियों को दैनिक पूजा की अनुमति भी मिल गई।
श्रीरामलला के प्रकटीकरण के बाद मंदिर आंदोलन को एक नई दिशा देने वाले महंत दिग्विजयनाथ 1969 में महासमाधि लेने तक श्रीराम जन्मभूमि के उद्धार के लिए अनवरत प्रयास करते रहे। ये आजादी के बाद के दिन थे। कांग्रेस की आंधी चल रही थी। खुद को धर्म निरपेक्ष घोषित करने की होड़ मची थी। इस होड़ में कई लोग तो करोड़ों के आराध्य प्रभु श्रीराम के वजूद को ही नकार रहे थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी पूरी निर्भीकता से दिग्विजयनाथ सदन से लेकर संसद और सड़क तक हिंदू, हिंदुत्व और राम मंदिर की मुखर आवाज बन गए।

राममंदिर आंदोलन के सर्व स्वीकार्य अगुआ थे योगी के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ

जिस मंदिर आंदोलन को महंत दिग्विजयनाथ ने एक ठोस बुनियाद और व्यापक आधार दिया, उसे उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनके शिष्य एवं उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ की अगुआई में नई ऊंचाई मिली। अस्सी के दशक की शुरूआत के साथ श्रीराम जन्मभूमि को लेकर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने जो बीज बोया था वह अंकुरित हो चुका था। इसे बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा अलग-अलग पंथ और संप्रदाय के संत समाज की मत भिन्नता थी। इन सबको संत समाज का वही एक कर सकता था जो सबको स्वीकार्य हो। यह सर्व स्वीकार्यता बनी तबके गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के पक्ष में। इसी सर्वसम्मति का परिणाम था कि 21 जुलाई 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में जब श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन हुआ तो महंत अवेद्यनाथ समवेत स्वर से इसके अध्यक्ष चुने गए और उनके नेतृत्व में देश में ऐसे जनांदोलन का उदय हुआ जिसने देश का सामाजिक-राजनीतिक समीकरण बदल दिया।
उनकी अगुआई में शुरू श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन आजादी के बाद का सबसे बड़ा और प्रभावी आंदोलन था। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद 7 अक्टूबर 1984 को अयोध्या के सरयू तट से धर्मयात्रा निकाली गई जो 14 अक्टूबर 1984 को लखनऊ पहुंची। यहां के बेगम हजरत महल पार्क में ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ जिसमें लाखों लोग शामिल हुए। महंत अवेद्यनाथ की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन से तत्कालीन सरकार हिल गई। तबके मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से महंत जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और मांग पत्र सौंपा।
धर्मचार्यों के आह्वान पर 22 सितंबर 1989 को दिल्ली के बोट क्लब पर विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। महंत जी की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए 9 नवंबर 1989 को शिलान्यास का ऐलान कर दिया गया। बोट क्लब की इस रैली से पूर्व 20 सितंबर 1989 को भारत सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने महंत जी से बातचीत का आग्रह किया था लेकिन महंत जी ने रैली के बाद ही बातचीत संभव होने की बात कही। 25 सितंबर को मुलाकात हुई तो बूटा सिंह ने शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित करने का निवेदन किया लेकिन महंत जी निर्णय पर अडिग रहे। इसके बाद लखनऊ में बूटा सिंह, तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने महंत जी, महंत नृत्यगोपाल दास, अशोक सिंहल, दाऊदयाल खन्ना के साथ बैठक कर आग्रह किया। पर, महंत जी ने दो टूक कहा कि यह राष्ट्रीय सम्मान एवं हिंदू समाज की आस्था का सवाल है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता।
इसके बाद देशभर में शिलान्यास समारोह के लिए श्रीराम शिला पूजन का अभियान प्रारंभ हो गया। महंत अवेद्यनाथ की अगुवाई में देशभर के गांव-गांव से श्रीराम शिला पूजन कर अयोध्या के लिए चल पड़ी। खुद महंत जी दर्जनों कार्यक्रमों में शामिल हुए। शिलान्यास समारोह की तैयारियों से घबराई सरकार ने एक बार फिर महंत जी को 8 नवंबर को गोरखपुर विशेष विमान भेजकर बातचीत के लिए लखनऊ आमंत्रित किया। वार्ता के बाद महंत जी को अयोध्या पहुंचाया गया। उनके अयोध्या पहुंचने पर शिलान्यास का कार्य तेजी से अंजाम की ओर आगे बढ़ा। शुभ मुहूर्त में गर्भगृह के बाहर निर्धारित स्थान पर भूमि पूजन और हवन के बाद महंत जी ने सांकेतिक रूप से नींव खोदकर दलित कामेश्वर प्रसाद चौपाल से पहली शिला रखवाकर एक नए भविष्य की शुरुआत की।
गर्भगृह के बाहर शिलान्यास के बाद मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा का दौर प्रारंभ हुआ। महंत अवेद्यनाथ की अगुवाई में हिंदू समाज तन, मन, धन से कारसेवा के लिए समर्पित होने लगा। 30 अक्टूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 को कारसेवा के दौरान तत्कालीन सरकार के आदेश पर पुलिस फायरिंग में कई रामभक्त बलिदान ही गए। पर, दमनात्मक कार्रवाई के बावजूद महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व में आंदोलन को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। नारा दिया गया, “बच्चा-बच्चा राम का”।

शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर सरकार को दिया मौका

1984 में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के गठन के बाद से आंदोलन के निर्णायक होने तक महंत अवेद्यनाथ ने हर सरकार को शांतिपूर्ण समाधान का मौका दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, पीवी नरसिम्हा राव से समय-समय पर उनकी वार्ता भी हुई। सरकारें कोरे आश्वासन से आगे नहीं बढ़ती थीं और महंत जी जन्मभूमि को मुक्त कराने के संकल्प पर अडिग रहे।

श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति को हुआ राजनीति में दोबारा प्रवेश

तत्कालीन मानीराम विधानसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार, 1962 से लेकर 1977 तक के चुनाव में विधायक चुने गए महंत अवेद्यनाथ 1969 में अपने गुरु महंत दिग्विजयनाथ के ब्रह्मलीन होने के बाद रिक्त हुए गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के उप चुनाव में सांसद चुने गए। 1980 में मीनाक्षीपुरम में धर्मांतरण की घटना के बाद उन्होंने राजनीति की बजाय खुद को सामाजिक समरसता के अभियान में समर्पित कर दिया। सितंबर 1989 में महंत अवेद्यनाथ के नेतृत्व में दिल्ली में हुए विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान जब मंदिर शिलान्यास की तारीख घोषित कर दी गई तो तत्कालीन गृहमंत्री बूटा सिंह ने उन्हें यह कहकर चुनौती दे दी कि अपनी बात रखनी है तो संसद में आइए। इस चुनौती को को स्वीकार कर महंत अवेद्यनाथ ने दोबारा राजनीति में प्रवेश करने का निर्णय लिया। फिर तो वह ताउम्र सड़क से लेकर संसद तक अयोध्या में दिव्य और भव्य मंदिर की आवाज बने रहे। उनका एक मात्र सपना भी यही था, उनके जीते जी ऐसा हो। आज वह भले ब्रह्मलीन हो चुके हैं, पर अपने सुयोग्य शिष्य की देख रेख में जो अयोध्या में अपने सपनों के अनुरूप भव्य राम मंदिर को साकार होता देख उनकी आत्मा जरूर खुश हो रही होगी।

दादागुरु और गुरुदेव के सपनों और संघर्षों को मूर्त कर रहे योगी आदित्यनाथ

बतौर उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ के साथ दो दशक से लंबा समय गुजारने वाले उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी इस पूरे परिवेश की छाप पड़ी। बतौर सांसद उन्होंने अपने गुरु के सपने को स्वर्णिम आभा दी। मुख्यमंत्री होने के बावजूद अपनी पद की गरिमा का पूरा खयाल रखते हुए कभी राम और रामनगरी से दूरी नहीं बनाई। गुरु के सपनों को अपना बना लिया। नतीजा सबके सामने है। उनके मुख्यमंत्री रहते हुए ही राम मंदिर के पक्ष में देश की शीर्ष अदालत का फैसला आया। देश और दुनिया के करोड़ों रामभक्तों, संतों, धर्माचार्यों की मंशा के अनुसार योगी की मौजूदगी में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन्मभूमि पर भव्य एवं दिव्य राम मंदिर की नींव रखी। युद्ध स्तर इसका जारी निर्माण अब पूर्णता की ओर है।

त्रेतायुगीन वैभव से सराबोर की जा रही अयोध्या

बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जितनी बार गए, अयोध्या को कुछ न कुछ सौगात देकर आए। उनकी मंशा अयोध्या को दुनिया का सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल बनाने की है। इसके अनुरूप ही अयोध्या के कायाकल्प का काम जारी है। योगी सरकार की मंशा है कि अयोध्या उतनी ही भव्य दिखे जितनी त्रेता युग में थी। इसकी कल्पना गोस्वामी तुलसीदास ने कुछ इस तरह की है, ‘अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई।’ अयोध्या के इस स्वरूप की एक झलक दीपोत्सव के दौरान दिखती भी है। कायाकल्प के बाद यह स्वरूप स्थायी हो जाएगा। तब भगवान श्रीराम की अयोध्या कुछ वैसी ही होगी जिसका वर्णन उन्होंने खुद कभी इस तरह किया था। ‘अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ, यह प्रसंग जानइ कोउ कोऊ, जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।’

हमेशा पप्पी जैसे दिखने वाली 6 कुत्तों की नस्लें – जानिये कौन से है !

लाइफस्टाइल/सर्वोदय न्यूज़:-  कुत्ते इंसान के सबसे वफादार और प्यारे साथी माने जाते हैं। कुछ लोग बड़े आकार के कुत्ते पसंद करते हैं, तो कुछ ऐसे होते हैं जो चाहते हैं कि उनका पालतू हमेशा छोटा, प्यारा और पप्पी जैसा दिखे। ऐसे में कुछ विशेष नस्लें हैं जो उम्र बढ़ने के बावजूद भी अपने छोटे आकार और मासूम चेहरे के कारण हमेशा पप्पी जैसी लगती हैं। डॉ. हेमंत कुमार तिवारी, जो एक अनुभवी पशु चिकित्सक हैं, उनके अनुसार नीचे दी गई 5 डॉग ब्रीड्स ऐसी हैं जो जीवनभर पप्पी जैसे ही नजर आती हैं।

1. पोमेरेनियन (Pomeranian)

पोमेरेनियन (Pomeranian)

पोमेरेनियन एक छोटी नस्ल है जो अपनी फूली हुई फर और नन्हे आकार के लिए मशहूर है। इनका चेहरा हमेशा मुस्कुराता हुआ और मासूम लगता है, जिससे ये उम्रभर पप्पी जैसे लगते हैं।

  • ऊँचाई: 7-12 इंच
  • वजन: 1.5 से 3.5 किलो
  • स्वभाव: चंचल, सतर्क, और समझदार
  1. शिह त्ज़ु (Shih Tzu)

शिह त्ज़ु (Shih Tzu)

शिह त्ज़ु एक प्राचीन नस्ल है जो चीन में राजपरिवार के लिए पाली जाती थी। इनकी बड़ी-बड़ी आँखें, छोटा चेहरा और रेशमी बाल इन्हें हमेशा बच्चा बनाए रखते हैं।

  • ऊँचाई: 8-11 इंच
  • वजन: 4 से 7.5 किलो
  • स्वभाव: शांत, स्नेही और मिलनसार

3. माल्टीज़ (Maltese)

माल्टीज़ (Maltese)

माल्टीज़ सफेद और रेशमी फर वाली एक नाजुक नस्ल है जो पूरी उम्र छोटी और खूबसूरत दिखती है। इन्हें गोद में बैठाना आसान होता है और ये पप्पी जैसे दिखने में नंबर वन मानी जाती हैं।

  • ऊँचाई: 7-9 इंच
  • वजन: 3 से 4 किलो
  • स्वभाव: प्यार करने वाली, सामाजिक और हंसमुखl

4. यॉर्कशायर टेरियर (Yorkshire Terrier)

यॉर्कशायर टेरियर (Yorkshire Terrier)

‘यॉर्की’ के नाम से प्रसिद्ध यह नस्ल छोटी होती है लेकिन ऊर्जा से भरपूर होती है। इनकी आंखों की मासूमियत और रेशमी बाल इन्हें हमेशा पप्पी जैसा बनाए रखते हैं।

  • ऊँचाई: 7-8 इंच
  • वजन: 2 से 3 किलो
  • स्वभाव: आत्मविश्वासी, सतर्क और चंचल

5. टॉय पूडल (Toy Poodle)

टॉय पूडल (Toy Poodle)

टॉय पूडल सिर्फ दिखने में ही सुंदर नहीं बल्कि बहुत ही बुद्धिमान नस्ल भी है। इनका घुंघराला बाल और छोटा चेहरा इन्हें उम्रभर बच्चों जैसा रूप देता है।

  • ऊँचाई: 9-10 इंच
  • वजन: 2 से 4 किलो
  • स्वभाव: बुद्धिमान, आज्ञाकारी और अति सक्रिय

6.  चिहुआहुआ(Chihuahua

चिहुआहुआ (Chihuahua)

दुनिया की सबसे छोटी डॉग ब्रीड्स में से एक है, लेकिन इसका स्वभाव बहुत ही साहसी, एक्टिव और अट्रैक्टिव होता है। अगर आप किसी छोटे साइज के डॉग की तलाश में हैं, तो Chihuahua पप्पी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

  • ऊँचाई:  6-9 इंच
  • वजन: 1.5 से 3 किलो
  • स्वभाव: लॉयल, अलर्ट, कभी-कभी शरारती

अगर आप ऐसे कुत्ते की तलाश में हैं जो हमेशा पप्पी जैसा दिखे और आपके परिवार के लिए एक प्यारा साथी हो, तो ऊपर दी गई नस्लों में से किसी एक को चुनना एक अच्छा विकल्प होगा। इन डॉग्स की देखभाल और प्यार से ये न केवल आपके दिल को खुश करेंगे बल्कि आपके जीवन में एक नई ऊर्जा भी लाएंगे।

डॉ. हेमंत कुमार तिवारी की सलाह:
“ऐसे कुत्तों को नियमित ग्रूमिंग, संतुलित आहार और समय-समय पर पशु चिकित्सक से चेकअप की आवश्यकता होती है ताकि उनकी सेहत और सुंदरता दोनों बनी रहें।”