सर्वोदय/लखनऊ:- राजधानी लखनऊ में प्राइवेट अस्पतालों की लापरवाही से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें कभी इलाज के दौरान मरीज की मौत तो कभी इलाज के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की खबरें आती हैं। अब लखनऊ के इंदिरानगर स्थित श्री मेडिकल केयर अस्पताल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां 17 साल पहले एक महिला के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने पेट में कैची छोड़ दी थी। शुरुआत में यह दर्द ऑपरेशन का हिस्सा समझा गया, लेकिन जब महिला को लंबे समय तक दर्द की समस्या हुई, तो जांच के दौरान पेट में कैची होने की बात सामने आई। इसके बाद KGMU के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर महिला की जान बचाई।
2008 में हुआ था ऑपरेशन, उसके बाद शुरू हुई समस्याएं
इंदिरानगर के अरविंद कुमार पांडेय ने बताया कि उनकी पत्नी का ऑपरेशन 26 फरवरी 2008 को श्री राम हॉस्पिटल में गर्भावस्था के दौरान किया गया था। शुरुआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन कुछ समय बाद पेट में दर्द और अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। उन्होंने कई डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन समस्या में कोई राहत नहीं मिली।
X-Ray में पेट में कैची का पता चला, KGMU ने बचाई जान
अरविंद ने बताया कि लंबे समय तक दर्द से परेशान होकर उन्होंने अपनी पत्नी का एक्स-रे कराया, जिसमें पेट में कैची का पता चला। इसके बाद 25 मार्च को उन्होंने अपनी पत्नी को लखनऊ के KGMU अस्पताल में भर्ती कराया। 26 मार्च को KGMU के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर पेट में फंसी कैची को बाहर निकाला और महिला की जान बचाई। इस घटना के बाद अरविंद ने गुरुवार को गाजीपुर थाने में श्री राम हॉस्पिटल के खिलाफ तहरीर दी और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।’ यह मामला अस्पतालों की लापरवाही और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का एक और उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसमें अस्पताल की गलतियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
17 साल बाद महिला के पेट से निकाली गई कैची, KGMU के डॉक्टरों ने बचाई जान
कृष्ण भक्ति से जुड़ा है ,सीमा हैदर की बेटी नाम, बोली- ‘अब मैं हिंदू बन चुकी हूं, इसलिए…
सर्वोदय/लखनऊ:- पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर और सचिन मीणा ने हाल ही में अपनी बेटी का नाम घोषित किया है, जो उनकी प्यार की निशानी बनी है। सीमा, जो दो साल पहले पाकिस्तान से भारत आई थीं, ने हाल ही में पांचवीं बार मां बनने का अनुभव किया है। इसके साथ ही, अब यह सवाल उठ रहा था कि सीमा और सचिन अपनी बेटी का क्या नाम रखेंगे, जिसे उन्होंने आखिरकार सभी के सामने पेश किया।
सीमा और सचिन ने अपनी बेटी का नाम मीरा रखा है, जो भगवान कृष्ण की भक्त मीरा से प्रेरित है। हालांकि, पंडित जी द्वारा आधिकारिक नामकरण किया जाएगा, लेकिन फिलहाल उन्होंने इसे प्यार से मीरा नाम रखा है। सीमा ने खुद कहा कि वह अब हिंदू बन चुकी हैं और भगवान कृष्ण की भक्त हैं, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी का नाम मीरा रखा है।
सीमा के चार बच्चे पहले के पति से हैं, जिनके नाम भी अब हिंदू नामों में बदल दिए गए हैं। सीमा ने अपने नाम में कोई बदलाव नहीं किया, क्योंकि उनका नाम सीमा हिंदू धर्म में भी प्रचलित है।
सीमा और सचिन की मुलाकात का दिलचस्प किस्सा
सीमा हैदर और सचिन मीणा की मुलाकात ऑनलाइन गेम PUBG के दौरान हुई थी। दोनों गेम खेलते-खेलते एक-दूसरे से दिल लगा बैठे, और फिर सीमा ने पाकिस्तान की सीमा लांघते हुए नेपाल के रास्ते भारत में अवैध रूप से प्रवेश किया। इस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन बाद में वह जमानत पर बाहर आ गईं। सीमा का कहना है कि वह सचिन से बहुत प्यार करती हैं और उनसे शादी कर चुकी हैं, और अब वह अपनी बाकी की जिंदगी भारत में ही बिताना चाहती हैं।
पूर्व पति का विवादित बयान
वहीं, सीमा हैदर के पूर्व पति गुलाम हैदर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीमा और सचिन की संतान को ‘नाजायज’ करार दिया है। इसके साथ ही, गुलाम हैदर अपने चार बच्चों को वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी कर रहे हैं।
भाई-बहन की हुई शादी! लड़का बोला- साफा पहनने के शौक में दीदी के साथ बैठ गया”
सर्वोदय/जौनपुर:- उत्तर प्रदेश के जौनपुर में हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में एक भाई और बहन के शादी करने का अजीब मामला सामने आया है। आरोप है कि इस आयोजन में फर्जी तरीके से दोनों को विवाह के लिए बैठाया गया। इस सामूहिक विवाह में कुल 1001 जोड़ों का विवाह हुआ था, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे और उन्होंने सभी जोड़ों को आशीर्वाद दिया था।
यह घटना 12 मार्च को जौनपुर के शाही किले में आयोजित जौनपुर महोत्सव के दौरान हुई, जहां सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया था। हालांकि, इस दौरान एक भाई-बहन को विवाह की सूची में शामिल किया गया। जब इस मामले पर लड़के से सवाल किया गया, तो उसने दावा किया कि वह केवल शौकिया तौर पर साफा पहनकर अपनी बहन के साथ विवाह समारोह में बैठ गया था। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हंगामा मच गया।
सामूहिक विवाह के आयोजन के संबंध में कई सवाल उठ रहे हैं, खासकर विवाह की सूची को लेकर। समाज कल्याण विभाग से कई बार सूची मांगी गई, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे फर्जीवाड़े के मामलों की जांच में परेशानी हो रही है।
इस मामले में प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी दिनेश सिंह ने कहा कि यदि जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, तो सामूहिक विवाह में सहायता राशि को रोका जा सकता है। साथ ही, लड़के की चाची ने यह भी खुलासा किया कि उनका भतीजा विवाह से 15 दिन पहले ही गांव आया था और इसके बाद वह कहीं दिखाई नहीं दिया। वहीं, लड़की ने बताया कि शादी के बाद उसका पति मुंबई चला गया। प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
धूल के गुबार से ढका इलाका, तेज भूकंप के दौरान चंद सेकंड में धराशायी हुई गगनचुंबी इमारत
सर्वोदय/ देश -विदेश:- दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में शुक्रवार को आए दो तेज भूकंपों ने व्यापक तबाही मचाई। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में कई इमारतें हिल गईं, और एक निर्माणाधीन 30 मंजिला टावर चंद सेकंड में ढह गया। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग मलबे में फंसे हुए हैं।
भूकंप के झटके बैंकॉक के अलावा म्यांमार में भी महसूस किए गए, जिससे वहां भी दहशत का माहौल बन गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जर्मनी के जीएफजेड भूविज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र म्यांमार में था, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। भूकंप के तुरंत बाद थाईलैंड के उपप्रधानमंत्री फुमथाम वेचायाचाई ने स्थिति का आकलन किया और बताया कि बैंकॉक में ढही इमारत में कम से कम तीन श्रमिकों की मौत हुई, और 81 लोग मलबे में फंसे हैं।
भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें निर्माणाधीन इमारत ढहते हुए दिखाई दे रही थी। इसके अलावा, भूकंप के झटके से बैंकॉक की सड़कों पर पानी बहने लगा और कई इमारतों से मलबा गिरने की घटनाएं हुईं।
भूकंप के बाद लोग घबराए हुए थे और घनी आबादी वाले इलाकों से बाहर निकलने के लिए भागे। प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और आपदा के प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। म्यांमार में भूकंप से धार्मिक स्थलों और घरों को भी नुकसान पहुंचा है, लेकिन वहां के गृहयुद्ध के कारण नुकसान की विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं हो पाई है।
महिला टीचर और सहायिका के बीच आंगनवाड़ी केंद्र में मारपीट का चौंकाने वाला वीडियो वायरल
सर्वोदय/मथुरा:- मथुरा के छाता क्षेत्र में एक आंगनवाड़ी केंद्र से एक गंभीर घटना की खबर सामने आई है, जहां एक शिक्षिका और आंगनवाड़ी सहायिका के बीच हुई हिंसक झगड़े ने सभी को चौंका दिया। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो में दोनों महिलाएं एक-दूसरे पर लात-घूंसे बरसाते हुए दिखाई दे रही हैं। बाल खींचने और गालियाँ देने के साथ-साथ यह मारपीट इतनी भयानक थी कि वहां मौजूद बच्चे भयभीत हो गए। यह घटना न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में डालती है, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता पैदा करती है।
इस वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला पीले सूट में और दूसरी सहायिका आपस में भिड़ गईं। दोनों के बीच पहले तीखी बहस हुई, जो फिर हाथापाई में बदल गई। एक महिला को जमीन पर गिरा दिया गया, उसके बाल खींचे गए और फिर लात-घूंसे चलने लगे। कुछ लोग बीच-बचाव की कोशिश करते नजर आए, लेकिन दोनों महिलाएं गुस्से में इतनी खोई हुई थीं कि किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थीं। वीडियो के अंत में एक महिला बेहोश होकर जमीन पर पड़ी हुई नजर आई, जिसे देखकर उपस्थित लोग उसे उठाने का प्रयास कर रहे थे। यह सब कुछ बच्चों के सामने हुआ, जिसने माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया।
इस घटना ने स्थानीय अभिभावकों में गुस्सा उत्पन्न कर दिया है। उनका कहना है कि अगर स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर शिक्षक और कर्मचारी इस तरह की हरकत करेंगे, तो बच्चों का क्या होगा? एक अभिभावक ने कहा, “हम अपने बच्चों को शिक्षा और अच्छे संस्कार सिखाने के लिए भेजते हैं, लेकिन अगर ऐसा माहौल बना रहेगा तो उनके भविष्य की सुरक्षा कैसे होगी?” यह सवाल सभी माता-पिता के मन में अनायास उठता है, जो अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा की आशा रखते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। समय समय पर शिक्षकों और स्टाफ के बीच विवाद की घटनाएं समाचारों की सुर्खियाँ बनती रहती हैं। मथुरा की इस घटना ने एक बार फिर बेसिक शिक्षा विभाग की अनुशासनात्मक कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में अनुशासन और शिक्षकों के व्यवहार को सुधारने के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए। अगर स्थिति यूं ही बनी रही, तो बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से कार्रवाई की है और जांच प्रारंभ कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाओं को सहन नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यूपी के पोस्टर से गायब हुई सीएम योगी की तस्वीर, अखिलेश यादव ने कसा तंज – ‘काम की तरह तस्वीर भी गोल’
सर्वोदय/ लखनऊ:- उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के आठ साल पूरे होने पर सरकार ने अपनी उपलब्धियों को दर्शाने के लिए एक विशेष पोस्टर जारी किया, लेकिन इस पोस्टर में सीएम योगी की तस्वीर गायब होने को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कस दिया। उन्होंने कहा कि “जैसे उनके काम का कोई अता-पता नहीं, वैसे ही पोस्टर से भी उनकी तस्वीर गायब है। अब उन्हें खुद ही सम्मानपूर्वक चले जाना चाहिए।”
क्या है पूरा मामला?
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर इस पोस्टर को साझा किया।
पोस्टर में अयोध्या के राम मंदिर और महाकुंभ में उमड़ी भीड़ को आठ साल की उपलब्धियों के रूप में दिखाया गया है। पोस्टर के ऊपरी हिस्से में राम मंदिर, जबकि नीचे महाकुंभ के दौरान संगम में स्नान कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। लेकिन पूरे पोस्टर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहीं नजर नहीं आ रहे।
अखिलेश यादव का BJP पर कटाक्ष
अखिलेश यादव ने पोस्टर साझा करते हुए लिखा –”उत्तर प्रदेश के ‘झूठे विकास’ के प्रचार में जिनकी तस्वीर तक नहीं लगी है, वे खुद ही सम्मानपूर्वक वापस चले जाएं तो बेहतर होगा। उनकी तस्वीर, उनके काम की तरह ही गोल है।”
डबल इंजन सरकार पर फिर साधा निशाना
अखिलेश यादव अक्सर यूपी सरकार और केंद्र सरकार के बीच अंदरूनी मतभेद का मुद्दा उठाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार के दोनों इंजन ही आपस में टकरा रहे हैं। उनका दावा है कि पीएम मोदी और सीएम योगी के बीच संबंध इतने खराब हैं कि वे एक-दूसरे को नमस्ते तक नहीं करते।
योगी आदित्यनाथ का जवाब
हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है। हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि “हम वर्तमान नेतृत्व का भी सम्मान करते हैं और पूर्वजों के प्रति भी श्रद्धा रखते हैं। लेकिन जिनके आदर्श औरंगजेब जैसे हों, उनका आचरण भी वैसा ही होता है।”
क्या यह संकेत किसी सियासी बदलाव का?
क्या पोस्टर से योगी की तस्वीर गायब होना महज एक संयोग है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश छिपा है?
क्या अखिलेश यादव के तंज का BJP पर कोई असर पड़ेगा? क्या यह घटना यूपी की राजनीति में किसी बदलाव का संकेत दे रही है?
यूपी पुलिस में आ रही है बड़े पैमाने पर भर्ती, योगी सरकार जल्द करेगी 28,138 पदों पर भर्ती
सर्वोदय/लखनऊ:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशानुरूप यूपी पुलिस बल को सुदृढ़ करने के लिए नए वित्तीय वर्ष में पुलिस भर्ती की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ द्वारा अप्रैल और मई माह में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने एलान किया है। बोर्ड ने अप्रैल और मई में 28,138 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करेगा। बोर्ड द्वारा इस वर्ष मार्च माह में लगातार साठ हजार से अधिक आरक्षियों एवं रेडियो संवर्ग के चौदह सौ से अधिक पदों पर भर्तियां पूरी की हैं। यह पुलिस भर्तियों को स्ट्रीमलाइन करने एवं भर्ती कैलेंडर को ससमय करने की दिशा में यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड का सुचिंतित एवं सुनियोजित प्रयास है।
8 वर्षों में 2 लाख से अधिक पुलिस विभाग में हुई भर्ती
उतर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप पुलिस में रोज़गार के समस्त उपलब्ध अवसर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराने के लिए भर्ती बोर्ड कृतसंकल्पित है। बीते आठ वर्षों में बोर्ड द्वारा विभिन्न पदों पर लगभग दो लाख चौदह हजार (2,14,468) से अधिक भर्तियां पूर्ण कर चुका है। जिनमें चौतीस हजार से अधिक महिलाओं (34,832) की तथा लगभग एक लाख उन्यासी हज़ार (1,79,636) पुरुषों को भर्ती किया गया है। जिनमें उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस स्तर के 12,144 पद, प्लाटून कमांडर के 780 पद, आरक्षी नागरिक पुलिस के 1,48,222 पद, आरक्षी पी०ए०सी० के 42,539 पदों पर भर्ती करने के साथ-साथ आरक्षी स्तर के कुशल खिलाड़ियों के 516 पदों की भर्ती भी की गई, जिसमें 178 महिला खिलाड़ियों की भर्ती पूर्ण कराई गई।
अप्रैल और मई में इन पदों पर शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया
यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड ने उत्तर प्रदेश शासन के रोडमैप के अनुरूप आगामी भर्ती प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कर ली है। बोर्ड अप्रैल 2025 के अंतिम सप्ताह या मई 2025 के प्रथम सप्ताह से अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस भर्ती प्रक्रिया में उप निरीक्षक (नागरिक पुलिस) के 4,242 पद, प्लाटून कमांडर (पीएसी) के 135 पद, प्लाटून कमांडर (विशिष्ट बल) के 60 पद और जनपद बंदायू, लखनऊ व गोरखपुर के लिए महिला पीसी के 106 पद शामिल हैं, जिसके तहत कुल 4,543 पदों पर उप निरीक्षक स्तर की भर्ती की जाएगी। इसके अतिरिक्त, आरक्षी स्तर पर भी विभिन्न पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया उसी समय शुरू होगी। इसमें आरक्षी पीएसी, आरक्षी विशिष्ट बल और महिला आरक्षी पीएसी के 15,904 पद, आरक्षी (नागरिक पुलिस) के 3,245 पद, आरक्षी घुड़सवार पुलिस के 71 पद और जेल वार्डन के 2,833 पद शामिल हैं, जिसके तहत आरक्षी स्तर पर कुल 22,053 पदों पर भर्ती होगी। इस तरह, कुल 26,596 पदों पर भर्ती प्रक्रिया निकट भविष्य में प्रारंभ होगी।
कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड ए के 1153 पदों पर भी होगी भर्ती
साथ ही, रेडियो सहायक परिचालक के 44 पद और कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए के 1,153 पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया में अग्रिम कार्यवाही अप्रैल-मई 2025 में शुरू की जाएगी। इस प्रकार निकट भविष्य में कुल अठाईस हज़ार से अधिक पदों हेतु विभिन्न पदों पर भर्ती की कार्यवाही इस वर्ष प्रारम्भ की जायेगी। कुशल खिलाड़ी के अन्तर्गत उप निरीक्षक नागरिक पुलिस के 91 पदों व आरक्षी नागरिक पुलिस 372 एवं आरक्षी पीएसी 174 पदों के लिए भी कार्यवाही प्रचलित है। इसमें अप्रैल माह, 2025 के तीसरे सप्ताह से अभिलेखों की संवीक्षा एवं खेल कौशल परीक्षण की प्रकिया प्रारम्भकी जायेगी। सभी भर्तियों के संबंध में शीघ्र ही यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की वेबसाइट व सोशिल मीडिया पर शीघ्र ही अग्रिम सूचना दी जायेगी
धीरेंद्र शास्त्री ने किया था कव्वाली कार्यक्रम का शुभारम्भ: उसमें शराब पार्टी का वीडियो हुआ वायरल
सर्वोदय:- बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मथुरा में एक आयोजन का उद्घाटन किया, जिसके बाद विवाद उत्पन्न हो गया है। इस कार्यक्रम में एक शराब पार्टी का आयोजन किया गया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके चलते स्थानीय लोगों ने आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कुछ लोगों का कहना है कि असामाजिक तत्वों ने पंडित जी को बदनाम करने के लिए ये सब किया है।
22 मार्च को धीरेंद्र शास्त्री ने एक दीप जलाकर कव्वाली कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसमें सागर भाटिया और उनकी टीम ने प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम के शुरू होने से पहले शास्त्री ने ब्रज क्षेत्र को मांस और शराब से मुक्त कराने के लिए एक बड़ी पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया था। यह कार्यक्रम मथुरा के लायंस क्लब और केबी ग्रुप द्वारा आयोजित किया गया था।
जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में शराब का आधिकारिक इंतजाम नहीं था। कुछ लोगों ने अपनी व्यक्तिगत शराब लाकर इसका सेवन किया, जिसका वीडियो बाद में वायरल हो गया। इसके कारण धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया जा रहा है। कार्यक्रम के बाद, शास्त्री वापस वृंदावन लौट गए। कुछ व्यक्तियों ने यह भी कहा है कि यह सब एक साजिश के तहत किया गया है।
इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए विभिन्न कैटेगरी जैसे डायमंड, प्लेटिनम, गोल्ड और सिल्वर रखी गई थीं। उद्घाटन से पहले इस कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार भी व्यापक रूप से किया गया था। कई लोगों ने इस आयोजन को देखने के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी की थी। कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद, धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनका उद्देश्य भारत को हर हाल में हिंदू राष्ट्र घोषित कराना है, ताकि भारत में सनातन धर्म के खिलाफ किसी भी प्रकार की नकारात्मकता को समाप्त किया जा सके।
कांग्रेस विधायक का साधु-संतों को लेकर विवादित बयान: ‘सांड’ से की तुलना
सर्वोदय:- मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक डॉ. राजेन्द्र सिंह ने साधु-संतों और महामंडलेश्वरों के बारे में एक विवादित टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हंगामा मचा दिया है। उन्होंने साधु-संतों और महामंडलेश्वरों की तुलना ‘सांड’ से करते हुए कहा कि बीजेपी ने इन्हें जनता के बीच छोड़ दिया है। डॉ. सिंह ने कहा, “बीजेपी ने साधु-संतों, संन्यासियों, बाबा बैरागियों और महामंडलेश्वरों को छोड़ दिया, अब उन्हें हिंदुत्व, भाजपा का प्रचार और सनातन की बातें करने के लिए कह दिया। और ये सांड दूसरों के खेतों में चर रहे हैं।”
यह बयान तब आया जब मध्यप्रदेश के सतना जिले में कांग्रेस ने जिला स्तरीय कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मौजूद थे। मंच से डॉ. सिंह ने इस विवादित बयान को दिया।उन्होंने कहा कि राम मंदिर और महाकुंभ के प्रचार पर बात करते हुए कहा, “संयोग से राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया और महाकुंभ भी आ गया। प्रचार तो बहुत हुआ, लेकिन मैंने गणित से हिसाब लगाया कि 10-12 करोड़ से ज्यादा लोग नहीं गए। मैं विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूं, इंजीनियर हूं।”
इसके बाद डॉ. सिंह ने महाकुंभ में शामिल होने वाले लोगों की संख्या का हवाला देते हुए कहा, “महाकुंभ में 60 करोड़ लोग गए, लेकिन यह सब वाट्सएप यूनिवर्सिटी के प्रभाव से हुआ है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने धार्मिक नेताओं को प्रचार के लिए इस्तेमाल किया और अब उन्हें अकेला छोड़ दिया।
डॉ. राजेन्द्र सिंह मध्यप्रदेश के सतना जिले की अमरपाटन विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में माने जाते हैं और पांचवीं बार विधायक बने हैं। वे दिग्विजय सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और मध्यप्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं।



