न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज:- महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र शुरू होने के साथ ही परिसीमन का मुद्दा गरमा गया है। जहां एक ओर दक्षिण भारत के कई दल इस पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव का समर्थन कर सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया है।
परिसीमन पर क्या बोले नायडू?
नायडू ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने यह भरोसा दिया है कि लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी और इसमें राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा। उनका कहना है कि सीटों का निर्धारण केवल आबादी के आधार पर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे दक्षिण भारत के राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन को जनगणना से जोड़ना जरूरी नहीं है। अगर ऐसा किया गया, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
साउथ के राज्यों में क्यों है चिंता?
दक्षिण भारत के कई दलों का मानना है कि यदि परिसीमन मौजूदा जनगणना के आधार पर हुआ, तो उत्तर भारत के राज्यों की सीटें बढ़ेंगी और दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे “काला कानून” तक करार दिया है। उनकी पार्टी DMK राज्यभर में विरोध प्रदर्शन कर रही है।
अन्य नेताओं ने भी जताई आपत्ति
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री Naveen Patnaik ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि भले ही सीटों की संख्या बढ़े, लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में अनुपात कम हो सकता है, जिससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।
क्या है पूरा मामला?
महिला आरक्षण कानून में संशोधन के साथ इसे 2029 के आम चुनाव में लागू करने की तैयारी है। हालांकि, इस प्रक्रिया में परिसीमन का मुद्दा जुड़ने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन बदलना चाहती है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम सभी राज्यों के हित में है।



