Sunday, May 10, 2026

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फिर नोटिस, प्रयागराज माघ मेले से आजीवन प्रतिबंध की चेतावनी

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले को लेकर प्रशासन और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच टकराव और गहराता जा रहा है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस जारी करते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्हें मेले से आजीवन प्रतिबंधित किया जा सकता है।

नोटिस जारी होते ही उनके समर्थकों और अनुयायियों में नाराजगी देखने को मिल रही है और मामले ने तूल पकड़ लिया है।

प्रशासन की कार्रवाई पर भड़के समर्थक

शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने प्रशासन की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेला प्रशासन ने पारदर्शिता का उल्लंघन करते हुए शिविर पांडाल के पीछे बैकडेट में नोटिस चस्पा किया।
उनका कहना है कि नोटिस लगाए जाने के बाद अधिकारी स्वयं आकर जवाब न देने का सवाल पूछने लगे, जो पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाता है।

24 घंटे में जवाब देने की चेतावनी

नोटिस में साफ कहा गया है कि यदि 24 घंटे के भीतर जवाब नहीं दिया गया, तो शंकराचार्य से जुड़ी संस्था को दी गई भूमि और सभी सुविधाएं निरस्त कर दी जाएंगी और भविष्य में मेले में प्रवेश पर स्थायी रोक लगा दी जाएगी। इस पर शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने स्पष्ट किया कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और शीघ्र ही प्रशासन को सौंपा जाएगा।

बग्घी पर सवार होने को लेकर विवाद

प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना अनुमति के बग्घी पर सवार होकर संगम क्षेत्र की ओर बढ़े।नोटिस के अनुसार, त्रिवेणी पंटून पुल नंबर-2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए संगम अपर मार्ग से प्रवेश किया गया, जबकि मेला प्रशासन द्वारा पहले ही संगम क्षेत्र में किसी भी प्रकार के वाहन ले जाने पर रोक लगाई गई थी।

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प्रशासन का कहना है कि उस समय संगम क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु मौजूद थे और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में वाहन ले जाने से भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर चुनौती पैदा हुई।

सुप्रीम कोर्ट आदेश का भी उल्लंघन का आरोप

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा स्वयं को शंकराचार्य बताते हुए बोर्ड और प्रचार सामग्री लगाई गई है, जबकि उनके शंकराचार्य होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगी हुई है। प्रशासन ने इसे अदालत की अवमानना की श्रेणी में बताया है।

मेले से स्थायी प्रतिबंध की चेतावनी

नोटिस के अंत में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो यह मान लिया जाएगा कि संबंधित पक्ष को कोई आपत्ति नहीं है और इसके बाद आजीवन मेला प्रतिबंध का आदेश पारित कर दिया जाएगा।

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