प्रयागराज/सर्वोदय न्यूज़:- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और मेलाधिकारी ऋषिराज द्वारा जारी किए गए नोटिस का जवाब दे दिया है। जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन नोटिस 24 घंटे के भीतर वापस ले, अन्यथा वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र ने आठ पृष्ठ के दस्तावेज में बताया कि स्वामी का पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका है और कोर्ट का आदेश बाद में आया। यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो प्रशासन के खिलाफ अवमानना याचिका समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मौनी अमावस्या के दौरान पहिया लगी पालकी से संगम स्नान न करने पर शंकराचार्य ने कहा था कि वे अपने शिविर में तब तक रहेंगे जब तक अफसर उनसे ससम्मान माफी लेकर संगम स्नान की अनुमति नहीं देंगे। प्रशासन ने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्टीकरण मांगा था कि स्वामी और उनके शिविर पर ‘शंकराचार्य’ कैसे लिखा है।
संतों का समर्थन और आलोचना
द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी सनानंद ने कहा कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर संतों के साथ हुई अवैधानिक रोकथाम और बटुकों के साथ अभद्रता निंदनीय है। उन्होंने अधिकारियों को अहंकार त्यागने की चेतावनी दी।
यह भी पढ़े:- संभल में सपा vs भाजपा: गरमाई सियासत? समर्थकों के साथ सपा विधायक धरने पर बैठे
वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी ने शंकराचार्य की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी की आलोचना की, जबकि जगद्गुरु संतोषदास ‘सतुआ बाबा’ ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी और संत समाज की चेतावनी दी। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि ने कहा कि इस घटना से प्रयागराज की धार्मिक मर्यादा धूमिल हो रही है।



