Wednesday, March 25, 2026

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जान देकर चुकाई झोपड़ी की कीमत, पाक में हिंदू किसान की हत्या; सड़कों पर उतरा जनाक्रोश

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदीन जिले में एक युवा हिंदू किसान की कथित हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। इस घटना के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। पाकिस्तानी अख़बार द नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलाश कोलही नाम के किसान को प्रभावशाली जमींदार सरफराज निजामानी ने गोली मार दी। बताया जा रहा है कि विवाद जमींदार की जमीन पर झोपड़ी खड़ी करने को लेकर हुआ था।

हत्या की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने बदीन–हैदराबाद नेशनल हाईवे और बदीन–थार कोयला मार्ग पर धरना देकर यातायात ठप कर दिया, जिससे सैकड़ों वाहन घंटों फंसे रहे। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जब तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

“यह विरोध नहीं, जख्मी ज़मीर की पुकार है”

पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के चेयरमैन और सामाजिक कार्यकर्ता शिवा काच्छी ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि कैलाश कोलही की हत्या के खिलाफ चल रहा धरना अपने आप में मिसाल बन गया है। उनके मुताबिक, यह धरना सुबह से देर रात तक लगातार चलता रहा। उन्होंने कहा कि पुरुषों, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने एक स्वर में केवल एक मांग रखी—हत्या के दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी।

शिवा काच्छी ने आगे कहा कि भूख, थकान और रात की ठंड के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि कैलाश का कसूर सिर्फ इतना था कि वह गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदाय से था। उनके अनुसार, पीड़ित परिवार का दर्द आज पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।

पुलिस के दावे, लेकिन कार्रवाई शून्य

इससे पहले पीड़ित परिवार और समुदाय के लोगों ने पीरू लशारी स्टॉप पर शव रखकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान एसएसपी बदीन ने 24 घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी का भरोसा दिलाया था। हालांकि, घटना को चार दिन बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

कई संगठनों का समर्थन

चल रहे धरने को राजनीतिक, राष्ट्रवादी, धार्मिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है। द नेशन के अनुसार, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, जिये सिंध महाज, कौमी अवामी तहरीक, जय सिंध कौमी महज और अवामी तहरीक जैसे संगठनों के नेता और कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक दोषियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह मामला एक बार फिर सिंध प्रांत में अल्पसंख्यकों, गरीब किसानों की सुरक्षा, भूमि विवादों और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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