नई दिल्ली/सर्वोदय न्यूज़:- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए विवादित नारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता उदित राज ने इन नारों को विरोध का तरीका बताते हुए इसे ‘राजनीतिक भाषा’ करार दिया है।
JNU से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें एक समूह ‘मोदी-शाह की कब्र खुदेगी’ जैसे नारे लगाता दिखाई दे रहा है। यह नारेबाजी सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किए जाने के बाद हुई।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि ऐसे नारे लंबे समय से राजनीतिक आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह एक नारा है और विरोध जताने का तरीका है। इसे शाब्दिक अर्थों में नहीं लेना चाहिए। यह एक राजनीतिक भाषा है, जो भीड़ के माहौल में कई जगह सुनने को मिलती है।”
उदित राज ने आगे कहा कि JNU में इस फैसले को लेकर छात्रों के बीच आक्रोश है और इसी भावना के तहत नारे लगाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी भाषा केवल आज की नहीं, बल्कि लंबे समय से अलग-अलग आंदोलनों में देखने को मिलती रही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ न्याय नहीं हुआ है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण फैसला बताते हुए सवाल उठाया कि लंबे समय तक चार्जशीट और ट्रायल शुरू न होने के बावजूद जमानत क्यों नहीं दी गई।
क्या है नारेबाजी का पूरा मामला
पीटीआई के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद JNU कैंपस में विरोध प्रदर्शन हुआ। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो सोमवार रात के हैं, जिनमें प्रदर्शन कर रहे लोग ‘मोदी शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर’ जैसे नारे लगाते नजर आ रहे हैं।
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इस मुद्दे पर छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा के विरोध में हर साल प्रदर्शन किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया।
वहीं पुलिस का कहना है कि इस नारेबाजी को लेकर अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन नारों को लेकर कड़ा विरोध जताया है और इसे निंदनीय बताया है।



