वेनेजुएला में उलझा रहा अमेरिका, इधर उसके सहयोगी देश सीरिया में एयर स्ट्राइक; फाइटर जेट्स से बरसे बम

न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- एक ओर अमेरिका वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर कूटनीतिक और रणनीतिक दबाव बनाने में व्यस्त रहा, वहीं दूसरी तरफ उसके नए सहयोगी देश सीरिया में हवाई हमले किए गए। हैरानी की बात यह रही कि ये एयर स्ट्राइक अमेरिका ने नहीं, बल्कि नाटो के सदस्य देश ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर अंजाम दी।

ब्रिटेन और फ्रांस ने शनिवार शाम सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ठिकानों को निशाना बनाते हुए संयुक्त हवाई अभियान चलाया। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला एक संदिग्ध भूमिगत ठिकाने पर किया गया, जहां हथियार और विस्फोटक सामग्री छिपाए जाने की आशंका थी।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स और फ्रांसीसी वायु सेना ने मिलकर उस ठिकाने पर बमबारी की, जिसका इस्तेमाल पहले आईएस द्वारा हथियार भंडारण के लिए किया जा चुका था। यह ठिकाना प्राचीन शहर पल्मायरा से कुछ मील उत्तर पहाड़ी इलाके में स्थित था।

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इस संयुक्त ऑपरेशन में ब्रिटेन ने अपने टाइफून FGR4 लड़ाकू विमानों को तैनात किया, जबकि फ्रांस के फाइटर जेट्स भी मिशन का हिस्सा रहे। हमले के दौरान भूमिगत सुविधा तक जाने वाली कई सुरंगों को निशाना बनाने के लिए पेववे IV गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया। मंत्रालय ने बताया कि शुरुआती आकलन में लक्ष्य को सफलतापूर्वक तबाह किए जाने के संकेत मिले हैं, हालांकि विस्तृत मूल्यांकन अभी जारी है।

ब्रिटेन के रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा कि यह कार्रवाई मध्य पूर्व में आईएस और उसकी हिंसक विचारधारा के दोबारा उभार को रोकने के लिए सहयोगी देशों के साथ मिलकर उठाया गया एक सख्त कदम है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगा।

सीरिया सरकार की ओर से इन हवाई हमलों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि सीरिया पिछले साल के अंत में आईएस विरोधी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल हुआ था।

गौरतलब है कि 2019 में सीरिया में आईएस की हार के बावजूद, संगठन के स्लीपर सेल अब भी सीरिया और इराक में सक्रिय हैं और समय-समय पर हमले कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों देशों में आईएस के करीब 5,000 से 7,000 लड़ाके अब भी मौजूद हैं।

बताया जा रहा है कि पिछले महीने ट्रंप प्रशासन ने भी सीरिया में आईएस ठिकानों पर सैन्य हमले शुरू किए थे। ये हमले पल्मायरा के पास हुए एक घातक हमले के जवाब में किए गए थे, जिसमें दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिये की मौत हो गई थी।

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