ताशकंद पहुंचे PM Modi, भारत के इतिहास से जुड़ा है ये शहर; मिला था एक जख्म

न्यूज़ डेस्क/ सर्वोदय न्यूज़:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान के ताशकंद के लिए रवाना हो गए। पीएम मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर तक उज्बेकिस्तान और किर्गिज गणराज्य की यात्रा पर हैं। इस दौरान वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे।

प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा को भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा से मध्य एशिया के साथ भारत के रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए साझा प्रयासों को भी गति मिलने की उम्मीद है।

भारत के इतिहास में क्यों खास है ताशकंद?

पीएम मोदी अपने दौरे की शुरुआत ताशकंद से कर रहे हैं। यहां उनकी मुलाकात उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव से होगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

ताशकंद भारत के आधुनिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना से भी जुड़ा हुआ है। 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद इसी शहर में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक ताशकंद समझौता हुआ था। हालांकि, समझौते के कुछ ही समय बाद भारत को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन के रूप में गहरा सदमा लगा।

10 जनवरी 1966 को हुआ था ताशकंद समझौता

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 के युद्ध के बाद शांति बहाल करने के उद्देश्य से सोवियत संघ की मध्यस्थता में ताशकंद में वार्ता हुई थी। उस समय सोवियत संघ का हिस्सा रहे ताशकंद में 10 जनवरी 1966 को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

वार्ता में भारत की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति मोहम्मद अयूब खान शामिल हुए थे। सोवियत संघ के प्रधानमंत्री एलेक्सी कोसिगिन ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

समझौते के तहत दोनों देशों ने युद्ध से पहले की स्थिति में लौटने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर सहमति जताई थी।

समझौते के बाद उसी रात शास्त्री जी का निधन

ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ घंटे बाद ही लाल बहादुर शास्त्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई। 11 जनवरी 1966 की रात उनका निधन हो गया। आधिकारिक तौर पर उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया था।

शास्त्री जी के निधन को लेकर समय-समय पर कई सवाल और चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में उनकी मौत का कारण हृदयाघात ही दर्ज है।

ताशकंद समझौते के तहत भारत द्वारा कुछ रणनीतिक क्षेत्रों को पाकिस्तान को वापस किए जाने को लेकर भी उस समय राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा हुई थी।

ताशकंद में शास्त्री स्मारक भी जाएंगे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा से पहले कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी ने हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वह राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल कनेक्टिविटी, रक्षा और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

पीएम मोदी ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में स्थित लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। इन स्थलों को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों का प्रतीक माना जाता है।

ताशकंद के बाद बिश्केक जाएंगे पीएम मोदी

उज्बेकिस्तान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे। वहां वह राष्ट्रपति सादिर झापारोव के निमंत्रण पर SCO के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब शंघाई सहयोग संगठन अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रहा है। भारत वर्ष 2017 से SCO का सक्रिय सदस्य है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत क्षेत्र में सुरक्षा, संपर्क और अवसरों पर आधारित अपने दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना चाहता है। आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करना जरूरी है।

विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन में भी शामिल होंगे

बिश्केक में पीएम मोदी राष्ट्रपति सादिर झापारोव और अन्य SCO नेताओं से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह छठे विश्व घुमंतू खेलों के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे।

विश्व घुमंतू खेल मध्य एशिया की पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला प्रमुख आयोजन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है।

मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी पर जोर

पीएम मोदी ने भरोसा जताया है कि उनकी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा से मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिलेगी। साथ ही इससे भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच ऐतिहासिक एवं सभ्यतागत संबंध भी और गहरे होंगे।

प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत मध्य एशिया के साथ व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लगातार बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

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