Wednesday, June 10, 2026

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वाराणसी में मांस, मछली और पोल्ट्री की दुकानें शहर से बाहर होंगी स्थानांतरित

वाराणसी/सर्वोदय न्यूज़:- सावन माह शुरू होने से पहले वाराणसी नगर निगम ने शहर के भीतर संचालित मांस, मछली और पोल्ट्री की दुकानों को नगर सीमा से बाहर निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। इस कदम को लेकर शहर में समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, वाराणसी शहर में वर्तमान में लगभग 350 से 400 मांस, मछली और चिकन की दुकानें संचालित हो रही हैं। सावन शुरू होने से पहले इन्हें शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थापित किए जाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर को संभावित स्थानों के रूप में चिन्हित किया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि सावन के दौरान धार्मिक कारणों से शहर में मांस बिक्री प्रभावित होती है, जिससे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नई व्यवस्था से व्यापारियों को पूरे वर्ष कारोबार जारी रखने में सुविधा मिल सकती है और उनकी आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सकेगा।

फैसले का स्वागत, लेकिन उठे कई सवाल

शहर के निवासी अजय शर्मा ने नगर निगम के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि काशी भगवान विश्वनाथ की नगरी है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। उनके मुताबिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए यह कदम उचित है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शहर के धार्मिक क्षेत्र से शराब की दुकानों को भी बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर कई स्थानीय लोगों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। बंगाली टोला के निवासी सुब्रत मुखर्जी का कहना है कि मछली और मांस कई परिवारों के दैनिक भोजन का हिस्सा हैं। ऐसे में खरीदारी के लिए शहर से बाहर जाना आम लोगों के लिए व्यावहारिक नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मांस की दुकानों को हटाया जा रहा है तो शराब और अन्य नशे से जुड़े प्रतिष्ठानों पर भी समान नीति क्यों नहीं लागू की जा रही।

उपभोक्ताओं और कारोबारियों को होगी परेशानी

मंडुआडीह निवासी अनीश सिंह का मानना है कि इस निर्णय से सभी समुदायों के लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोग अपने आसपास के बाजारों से मांस और मछली खरीद लेते हैं, लेकिन लंबी दूरी तय करना हर किसी के लिए संभव नहीं होगा। साथ ही इससे उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ सकता है और ऑनलाइन मीट डिलीवरी कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है।

कांग्रेस ने मांगी वैकल्पिक व्यवस्था

जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि वाराणसी की स्वच्छता और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि व्यापारियों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो। उन्होंने मांग की कि स्थानांतरण से पहले पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जाएं और शराब की दुकानों को लेकर भी समान नीति पर विचार किया जाए।

व्यापारियों ने जताई चिंता

मांस कारोबार से जुड़े साहिल ने कहा कि यदि दुकानें शहर से दूर स्थानांतरित की जाती हैं तो उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि अधिकांश ग्राहक दूर जाकर खरीदारी नहीं कर पाएंगे, जिससे नियमित ग्राहकों की संख्या घट सकती है और बिक्री में गिरावट आ सकती है।

फिलहाल नगर निगम ने स्थानांतरण प्रक्रिया की अंतिम समयसीमा और नई जगहों पर दुकानों के आवंटन संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में व्यापारी और स्थानीय निवासी आगे की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

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