न्यूज़ डेस्क/सर्वोदय न्यूज़:- ओडिशा सरकार ने राज्य के प्रोफेशनल शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के लिए आरक्षण बढ़ाने की घोषणा की है। इस संबंध में राज्य सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार का यह निर्णय ओडिशा प्रोफेशनल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2007 के तहत गठित नीति नियोजन निकाय (Policy Planning Body) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत ST वर्ग के लिए आरक्षण को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 22.5 प्रतिशत किया गया है, जबकि SC वर्ग का आरक्षण 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 16.25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा, SEBC वर्ग को पहली बार 11.25 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।
इन पाठ्यक्रमों पर लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, संशोधित आरक्षण नीति इंजीनियरिंग, चिकित्सा, डेंटल, नर्सिंग, फार्मेसी, कृषि, पशु चिकित्सा, प्रबंधन, वास्तुकला, पॉलिटेक्निक, आईटीआई और अन्य प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में प्रवेश पर लागू होगी। राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधीन संचालित सभी प्रोफेशनल संस्थानों में यह व्यवस्था समान रूप से प्रभावी रहेगी।
2026-27 सत्र से लागू होगा नया नियम
नई आरक्षण नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अधिक अवसर प्राप्त होंगे। विशेष रूप से मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतिस्पर्धी पाठ्यक्रमों में इन वर्गों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
सामाजिक न्याय और शैक्षणिक समानता पर जोर
राज्य सरकार ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य सामाजिक न्याय को मजबूत करना और शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि बढ़ा हुआ आरक्षण समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करेगा और राज्य के समग्र विकास में योगदान देगा।
अन्य आरक्षण व्यवस्थाएं रहेंगी यथावत
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अखिल भारतीय कोटा (All India Quota) के तहत आने वाली सीटों पर यह नई आरक्षण व्यवस्था लागू नहीं होगी। वहीं दिव्यांगजन, पूर्व सैनिक, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और अन्य क्षैतिज आरक्षण से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
संस्थानों को दिए गए पालन के निर्देश
संबंधित विभागों ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को नई आरक्षण नीति का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राज्य में शैक्षणिक समावेशन को बढ़ावा देगा और लाखों छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर खोलेगा। छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है।



