Gold Price Today: साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाला सोना अब लगातार दबाव में नजर आ रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मौजूदा गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका है या कीमतें अभी और नीचे जा सकती हैं।
रिकॉर्ड हाई से ₹37,000 तक टूटा सोना
जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। उसी दौरान भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.80 लाख तक पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद बाजार में तेज गिरावट आई और अब घरेलू बाजार में सोने का भाव करीब ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। यानी अपने उच्चतम स्तर से सोना करीब ₹37,000 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है।
सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आ रही है?
विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की कीमतों पर कई वैश्विक कारण असर डाल रहे हैं।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति: ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशक सोने की बजाय बेहतर रिटर्न देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। चूंकि सोना ब्याज या डिविडेंड नहीं देता, इसलिए ऊंची दरों के दौर में इसकी मांग प्रभावित होती है।
- महंगाई पर फेड का फोकस: फेड महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त रुख बनाए हुए है। बाजार को फिलहाल ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद नहीं है, जिससे गोल्ड पर दबाव बना हुआ है।
- भू-राजनीतिक तनाव: ईरान से जुड़े घटनाक्रम और वैश्विक तनाव ने पहले सोने को सहारा दिया था, लेकिन तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बदलते हालात के कारण निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिला।
क्या सोना अभी और सस्ता हो सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी फेड लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची बनाए रखता है या उनमें और बढ़ोतरी होती है, तो निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या यह खरीदारी का सही समय है?
लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से सोना अब भी एक मजबूत एसेट माना जाता है। पिछले 30 वर्षों में सोने ने लगभग 950 फीसदी का रिटर्न दिया है। वहीं, बीते पांच वर्षों में इसकी औसत वार्षिक चक्रवृद्धि (CAGR) वृद्धि करीब 19 फीसदी रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी तक गोल्ड रखना चाहता है, तो एकमुश्त निवेश करने के बजाय सिस्टेमेटिक तरीके से अलग-अलग समय पर खरीदारी करना अधिक समझदारी भरा कदम हो सकता है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। निवेश से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।



