पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार को एजेंसी ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 9 स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) घोटाले से जुड़ी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता, बर्धवान और हाबरा समेत कई इलाकों में छापे मारे गए। ये सभी ठिकाने इस मामले के मुख्य आरोपी निरंजन चंद्र साहा और उससे जुड़े अन्य लोगों से संबंधित बताए जा रहे हैं। ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया है और उसी के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस घोटाले की शुरुआत 23 अक्टूबर 2020 को दर्ज एक एफआईआर से हुई थी, जिसे पश्चिम बंगाल पुलिस ने बसीरहाट थाने में दर्ज किया था। शिकायत कस्टम विभाग के एक डिप्टी कमिश्नर की ओर से की गई थी। आरोप था कि गरीबों में वितरण के लिए आया गेहूं अवैध रूप से बाजार में बेच दिया गया या फिर उसकी जमाखोरी की गई।
जांच के दौरान यह मामला बड़ा घोटाला बनकर सामने आया। इसी सिलसिले में सुशांत साहा और उनसे जुड़ी कंपनियों पर भी छापेमारी की गई है। उनकी फर्म सागर इंटरप्राइजेज भी जांच के दायरे में है।
इसके अलावा समीर कुमार चंद्र और पार्थ साहा से जुड़े प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की गई। इनकी कंपनियों में मां अन्नपूर्णा राइस कंसर्न, आदर्श इंटरनेशनल और साइनैक्स अन्नपूर्णा उद्योग शामिल हैं। उत्तरपारा के कारोबारी दौलत राम गुप्ता के ठिकानों पर भी ईडी ने रेड डाली है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस घोटाले में शामिल लोगों ने सस्ते दामों पर सप्लायर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से गेहूं खरीदा और बाद में उसे बाजार में ऊंची कीमत पर बेच दिया। इस प्रक्रिया के जरिए गरीबों के लिए निर्धारित राशन से भारी मुनाफा कमाया गया।
बताया जा रहा है कि इस अनाज को अलग-अलग स्थानों पर स्टोर किया गया था। इससे पहले भी पहले चरण के मतदान से पूर्व ईडी ने राज्य में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। अब दूसरे चरण से पहले फिर कार्रवाई तेज हो गई है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन छापों को चुनावी राजनीति से प्रेरित कदम बताती रही है।